Friday, 23 October 2026
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ज्यादा स्क्रीन टाइम बना रहा है दिमाग के लिए खतरा, न्यूरोलॉजिस्ट की चेतावनी

मोबाइल और लैपटॉप पर अधिक समय बिताना अब दिमाग के लिए खतरा बन गया है, डिजिटल फटीग और मानसिक स्वास्थ्य से बचने के तरीके पढ़ें

आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। स्कूल, ऑफिस, सोशल मीडिया या मनोरंजन—हर जगह स्क्रीन का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है। लेकिन लगातार स्क्रीन पर रहने से दिमाग और शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. के मुताबिक, डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक इस्तेमाल “डिजिटल फटीग” नामक समस्या पैदा कर रहा है, जो सिर्फ थकान नहीं बल्कि नींद, याददाश्त और मूड पर भी बुरा असर डालती है।

डिजिटल फटीग: सिर्फ थकान नहीं

डिजिटल फटीग का मतलब है लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने से होने वाली मानसिक और शारीरिक थकान। न्यूरोलॉजिस्ट कहते हैं कि जब हम लगातार स्क्रीन देखते हैं, तो हमारा दिमाग हमेशा त्वरित प्रतिक्रिया मोड में रहता है। इससे हमारी एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और याददाश्त प्रभावित होती है। कई लोगों में इससे ब्रेन फॉग, यानी दिमागी कुहासा जैसा अनुभव भी देखने को मिलता है।

नींद पर असर

स्क्रीन का सबसे बड़ा असर नींद पर होता है। मोबाइल और लैपटॉप की ब्लू लाइट नींद के लिए जरूरी मलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है। इसका मतलब है कि देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद में खलल पड़ता है और शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता। धीरे-धीरे यह सोने के समय में गड़बड़ी, नींद में कमी और दिन में थकान जैसी समस्याओं में बदल जाता है।

मूड और इमोशनल हेल्थ

ज्यादा स्क्रीन टाइम से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ता है। इससे व्यक्ति जल्दी चिड़चिड़ा हो सकता है, मूड में उतार-चढ़ाव आता है और भावनात्मक असंतुलन बढ़ता है। न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि कई लोग इसके कारण छोटे-छोटे कामों में भी घबराहट महसूस करने लगते हैं।

कौन सबसे ज्यादा प्रभावित है?

• बच्चे और युवा, जिनका मस्तिष्क तेजी से डिजिटल उत्तेजना का आदी हो जाता है।
• स्क्रीन-भारी पेशेवर, जैसे आईटी कर्मचारी, ग्राफिक डिजाइनर या सोशल मीडिया मैनेजर, जिन्हें लगातार आंखों में जलन, माइग्रेन और गर्दन-कंधे में दर्द जैसी समस्या होती है।

विशेषज्ञ की सलाह

न्यूरोलॉजिस्ट ने कुछ आसान सुझाव दिए हैं, जिनसे स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं:

  1. सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करें।
  2. हर 30–60 मिनट में ब्रेक लें और आंखों को आराम दें।
  3. रोजाना थोड़ा समय बाहर टहलने या असली बातचीत में बिताएं।
  4. सोशल मीडिया और फालतू स्क्रॉलिंग को सीमित करें।

डिजिटल दुनिया में संतुलन जरूरी

विशेषज्ञ कहते हैं कि स्क्रीन हमारे जीवन का हिस्सा है, लेकिन इसे नियंत्रित करना सीखना जरूरी है। ज्यादा स्क्रीन समय से बचकर हम बेहतर नींद, मजबूत याददाश्त और स्थिर मूड बनाए रख सकते हैं। साथ ही डिजिटल डिवाइस के सही इस्तेमाल से मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।

आज की दुनिया में जहां स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपनी डिजिटल आदतों पर ध्यान दें। छोटे-छोटे बदलाव जैसे ब्रेक लेना, नींद से पहले स्क्रीन बंद करना और असली दुनिया में समय बिताना, लंबे समय में स्वस्थ दिमाग और शरीर की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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