Saturday, 03 October 2026
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TIOL रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: ₹4.88 लाख करोड़ की क्रिप्टो ट्रेडिंग ऑफशोर शिफ्ट, भारत को हो रहा भारी कर नुकसान

नई रिपोर्ट बताती है कि भारतीय यूजर्स का 90% से अधिक क्रिप्टो ट्रेड विदेशी प्लेटफॉर्म पर जा रहा है, जिससे TDS और टैक्स में हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा है।

4 दिसंबर 2025

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के टैक्स ढांचे पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है। TIOL नॉलेज फाउंडेशन की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2024–25 में लगभग ₹4.88 लाख करोड़ का क्रिप्टो ट्रेड भारतीय यूज़र्स ने ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर किया, जिससे देश को भारी राजस्व नुकसान झेलना पड़ा है।

“Taxation of Digital Assets in India – A Data-Driven Assessment of India’s VDA Tax Regime and its Market Impact” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपयोगकर्ता तेज़ी से विदेशी एक्सचेंजों की ओर जा रहे हैं, जबकि घरेलू एक्सचेंजों पर वॉल्यूम लगातार गिर रहा है। यह स्थिति भारत के मौजूदा क्रिप्टो टैक्स ढांचे की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

भारत का टैक्स ढांचा, लेकिन रेवेन्यू गायब

2022 के वित्त अधिनियम के तहत क्रिप्टो पर 30% टैक्स, 1% TDS और हानि सेट-ऑफ पर रोक जैसी कड़ी नीतियाँ लागू की गई थीं। उद्देश्य था—सट्टा ट्रेडिंग पर रोक और पारदर्शिता बढ़ाना।

लेकिन हकीकत में हुआ उलटा।

FY22–23 और FY23–24 के दौरान सरकार को पूंजीगत लाभ कर से सिर्फ ₹706 करोड़, और 1% TDS से ₹338 करोड़ ही प्राप्त हुए। जबकि भारतीय ट्रेडर्स करोड़ों–करोड़ों की ट्रेडिंग ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर जारी रखे हुए हैं।

90% से अधिक क्रिप्टो वॉल्यूम देश से बाहर

TIOL ने वेब ट्रैफ़िक, ऑर्डर बुक डेटा और Binance के पी2पी डेस्क के आधार पर विश्लेषण कर बताया कि:

  • घरेलू भारतीय एक्सचेंजों ने FY24–25 में केवल ₹45,000 करोड़ का ट्रेड हैंडल किया
  • जबकि कुल भारतीय वॉल्यूम का करीब 90% यानी ₹4.88 लाख करोड़ विदेशी प्लेटफॉर्म पर चला गया
  • कई एक्सचेंज भारत में ब्लॉक होने के बावजूद VPN के जरिए आसानी से एक्सेस किए जा रहे हैं

कर चोरी या कर ढांचे की खामी? नुकसान खड़ा है बड़ा सवाल

1% TDS के नियम के बावजूद ₹11,000 करोड़ से अधिक TDS ऑफशोर ट्रेड में कट ही नहीं पाया, जबकि पिछले 12 महीनों में गायब TDS लगभग ₹4,877 करोड़ आंका गया है।

इसके अलावा संभावित पूंजीगत लाभ कर में करीब ₹36,000 करोड़ की कमी भी सामने आई है।

TIOL का अनुमान है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो अगले पाँच वर्षों में भारतीय ट्रेडर्स लगभग ₹39.9 लाख करोड़ तक ऑफशोर ट्रेड कर सकते हैं, जिससे FY2030 तक करीब ₹40,000 करोड़ TDS का नुकसान हो सकता है।

क्यों बढ़ रहा है ऑफशोर ट्रेड?

  • घरेलू एक्सचेंजों पर वॉल्यूम में गिरावट
  • कड़ी टैक्स नीतियों से ट्रेडिंग महंगी
  • ब्लॉक किए प्लेटफॉर्मों पर बढ़ता भारतीय ट्रैफ़िक
  • P2P चैनलों का तेज़ विस्तार

Esya सेंटर की पिछली रिपोर्टों में भी पाया गया था कि VDA कर पैकेज लागू होने के तुरंत बाद भारतीय ट्रेडिंग का लगभग 92% ऑफशोर शिफ्ट हो गया था।

TIOL की सिफारिशें: टैक्स ढांचा बदले बिना समाधान नहीं

रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया गया है कि—

  • सेक्शन 194S में संशोधन किया जाए, ताकि घरेलू और विदेशी दोनों एक्सचेंज भारतीय यूज़र्स पर TDS काटने के लिए बाध्य हों
  • VDA का टैक्स उपचार अन्य एसेट क्लास की तरह किया जाए
  • वार्षिक रिपोर्टिंग और निगरानी को सख़्त बनाया जाए

निष्कर्ष: भारत क्रिप्टो का केंद्र बन सकता था, पर…

TIOL की रिपोर्ट साफ़ करती है कि सही टैक्स नीति के अभाव में भारत न सिर्फ क्रिप्टो इनोवेशन बल्कि हजारों करोड़ रुपये का राजस्व भी खो रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार आगामी बजट और नीतिगत सुधारों में इस गंभीर मुद्दे को किस तरह से संबोधित करती है।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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