दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग में गांधी की प्रतिमा उनके शुरुआती संघर्ष की याद दिलाती है। जानिए ट्रेन से उतारे जाने की घटना और उस स्थान पर बने स्मारक का ऐतिहासिक महत्व।
नई दिल्ली: विश्व इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं, जिनका प्रभाव किसी एक देश या सीमा तक सीमित नहीं रहा। महात्मा गांधी भी ऐसी ही शख्सियतों में शामिल हैं। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण संघर्ष के जरिए भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
उनके नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरू हुए आंदोलनों ने न केवल देश की आजादी की लड़ाई को मजबूत किया, बल्कि दुनियाभर में नागरिक अधिकारों, समानता और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं को भी प्रभावित किया।
गांधी के विचारों और उनके योगदान को आज भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में याद किया जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के कई देशों में महात्मा गांधी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन स्मारकों में कहीं गांधी को हाथ में लाठी लेकर चलते हुए दिखाया गया है, तो कहीं ध्यानमग्न मुद्रा में दर्शाया गया है।
गांधी जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं भारत समेत दुनिया की सात ऐसी स्थानों के बारे में, जहां उनकी प्रतिष्ठित प्रतिमाएं स्थापित हैं। साथ ही समझते हैं कि इन स्मारकों का ऐतिहासिक महत्व क्या है।
दुनिया की 7 जगहों पर महात्मा गांधी की प्रतिष्ठित प्रतिमाएं
1. गांधी मैदान (पटना, भारत)
महात्मा गांधी की सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमाओं में पटना के गांधी मैदान में स्थापित प्रतिमा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह प्रतिमा 72 फीट ऊंची है, जिसमें इसका आधार भी शामिल है। बिहार सरकार की ओर से स्थापित इस प्रतिमा का अनावरण 15 फरवरी 2013 को किया गया था। इसे प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार राम सुतार की फर्म ने तैयार किया था।
इस प्रतिमा की खास बात यह है कि इसमें गांधी जी को दो बच्चों के साथ खड़े हुए दिखाया गया है। यह दृश्य शांति, समानता और समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच एकता का संदेश देता है।
प्रतिमा के आधार पर गांधी जी के जीवन से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घटनाओं को भी दर्शाया गया है। इनमें 1917 का चंपारण सत्याग्रह, 1930 का दांडी मार्च, 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन और चरखे का प्रतीक शामिल है। इस तरह यह स्मारक गांधी के जीवन के साथ-साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी याद दिलाता है।
2. पार्लियामेंट स्क्वायर (लंदन, ब्रिटेन)
ब्रिटेन की राजधानी लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लगभग 9 फीट ऊंची इस कांस्य प्रतिमा में गांधी जी को उनकी पहचान बन चुकी पैदल चलने वाली मुद्रा में दिखाया गया है। इसे ब्रिटिश मूर्तिकार फिलिप जैक्सन ने तैयार किया था और 14 मार्च 2015 को इसका अनावरण किया गया।
इस प्रतिमा का स्थान भी अपने आप में खास है। यह ब्रिटिश संसद और वेस्टमिंस्टर पैलेस के नजदीक स्थापित है। जिस ब्रिटिश शासन के खिलाफ गांधी ने भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था, उसी देश की संसद के पास उनकी प्रतिमा स्थापित होना इतिहास के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाता है। यह प्रतिमा भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक संबंधों के साथ-साथ गांधी के विचारों के अंतरराष्ट्रीय सम्मान को भी दर्शाती है।
3. एरियाना पार्क (जिनेवा, स्विट्जरलैंड)
स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित एरियाना पार्क में भी महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है। यह स्थान संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के नजदीक ‘एवेन्यू डे ला पै’ (Avenue de la Paix) के इलाके में स्थित है। प्रतिमा का अनावरण 14 नवंबर 2007 को किया गया था। इस अवसर का संबंध भारत और स्विट्जरलैंड के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ से था।
भारतीय दूतावास के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिमा का अनावरण जिनेवा के तत्कालीन मेयर पैट्रिस मुग्नी और स्विट्जरलैंड में भारत के तत्कालीन राजदूत अमिताभ त्रिपाठी ने किया था।
जिनेवा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे स्थान पर गांधी की प्रतिमा की मौजूदगी उनके शांति, संवाद और अहिंसा के संदेश को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ प्रदान करती है। यह भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मित्रता और सांस्कृतिक संबंधों की भी याद दिलाती है।
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4. मैसाचुसेट्स एवेन्यू (वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका)
अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के सामने महात्मा गांधी की एक कांस्य प्रतिमा स्थापित है। इसमें गांधी जी को हाथ में लाठी लेकर चलते हुए दिखाया गया है। यह उनकी उस पहचान को दर्शाती है, जिसमें उन्होंने लंबे पैदल मार्च और जनआंदोलनों के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ लोगों को एकजुट किया था।
सितंबर 2000 में इस प्रतिमा को औपचारिक रूप से समर्पित किया गया था। अमेरिका में गांधी की प्रतिमा का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि उनके अहिंसक संघर्ष के विचारों ने वहां नागरिक अधिकार आंदोलन को प्रभावित किया।
अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गांधी के अहिंसा के सिद्धांत से प्रेरणा ली थी। इस तरह भारतीय दूतावास के बाहर स्थापित यह प्रतिमा भारत और अमेरिका के सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ नागरिक अधिकारों और समानता के विचारों के बीच वैचारिक संबंध को भी दर्शाती है।
5. प्लाजा सिसिलिया (ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना)
दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में भी महात्मा गांधी की स्मृति को एक प्रतिमा के माध्यम से संजोया गया है। प्लाजा सिसिलिया में स्थापित यह प्रतिमा पूरी लंबाई वाली मूर्ति नहीं, बल्कि गांधी जी की कांस्य प्रतिमा है। इसे भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वनजी सुतार ने तैयार किया था।
ब्यूनस आयर्स शहर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह प्रतिमा भारत की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत सरकार की ओर से शहर के प्रशासन को भेंट की गई थी। इसमें गांधी जी को आंखें बंद किए ध्यानमग्न मुद्रा में दिखाया गया है।
प्रतिमा का यह स्वरूप उनके आत्मचिंतन, शांति और नैतिक मूल्यों से जुड़े व्यक्तित्व को सामने लाता है। भारत से हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका में स्थापित यह स्मारक बताता है कि गांधी की पहचान केवल स्वतंत्रता सेनानी के रूप में नहीं, बल्कि शांति और अहिंसा के वैश्विक विचारक के रूप में भी बनी हुई है।
6. पारामारिबो (सूरीनाम)
दक्षिण अमेरिका के उत्तर में स्थित सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो में भी महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है। इस स्मारक का संबंध भारतीय मूल के उन लोगों के इतिहास से जुड़ता है, जो औपनिवेशिक दौर में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में सूरीनाम पहुंचे थे।
19वीं और 20वीं शताब्दी में ब्रिटिश भारत से बड़ी संख्या में मजदूरों को अनुबंधित श्रम व्यवस्था के तहत कैरेबियाई और दक्षिण अमेरिकी क्षेत्रों में ले जाया गया था। सूरीनाम भी ऐसे देशों में शामिल था, जहां भारतीय मूल के लोगों ने अपनी नई सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान विकसित की। गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के अधिकारों और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया था।
सूरीनाम में उनकी प्रतिमा भारतीय मूल के समुदाय के लिए एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक है। यह भारत और सूरीनाम के बीच साझा विरासत और संबंधों को भी सामने लाती है।
7. चर्च स्ट्रीट, पीटरमैरिट्जबर्ग, दक्षिण अफ्रीका
दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी की प्रतिमा का विशेष ऐतिहासिक महत्व है। क्वाजुलु-नटाल प्रांत के पीटरमैरिट्जबर्ग शहर की चर्च स्ट्रीट पर उनकी कांस्य प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में गांधी जी को उनके युवा दिनों के रूप में दिखाया गया है। इसका अनावरण जून 1993 में आर्कबिशप डेसमंड टूटू ने किया था। यह अवसर उस घटना की 100वीं वर्षगांठ से जुड़ा था, जिसने गांधी के जीवन और उनके संघर्ष की दिशा बदल दी थी।
दरअसल, 7 जून 1893 को गांधी दक्षिण अफ्रीका में एक ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। उनके पास प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद नस्लीय भेदभाव के कारण उन्हें डिब्बे से बाहर जाने के लिए कहा गया। उनके इनकार करने पर उन्हें पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया।
इस घटना ने उन्हें दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। आगे चलकर इसी संघर्ष ने सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध की उनकी विचारधारा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसलिए चर्च स्ट्रीट पर स्थापित प्रतिमा केवल गांधी की याद में बनाया गया स्मारक नहीं है, बल्कि यह नस्लीय भेदभाव के खिलाफ उनके संघर्ष और नागरिक अधिकारों की लड़ाई की भी याद दिलाती है।
कितने देशों में स्थापित हैं महात्मा गांधी की प्रतिमाएं?
महात्मा गांधी की लोकप्रियता और उनके विचारों के वैश्विक प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के 100 से अधिक देशों में उनकी प्रतिमाएं या अर्धप्रतिमाएं स्थापित हैं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) से प्राप्त 2019 के आरटीआई आंकड़ों के मुताबिक, उस समय दुनिया के 102 देशों में गांधी की प्रतिमाएं मौजूद थीं।
इनमें से 82 देशों में उनकी पूर्ण आकार की प्रतिमाएं थीं, जबकि 20 देशों में अर्धप्रतिमाएं या बस्ट स्थापित थे। हालांकि, यह आंकड़ा 2019 में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।
इस आंकड़े का एक और दिलचस्प पहलू अमेरिका से जुड़ा है। 2019 की रिपोर्टों के मुताबिक, भारत के बाहर अमेरिका में गांधी की सबसे अधिक प्रतिमाएं थीं। वहां न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन डीसी समेत कई स्थानों पर उनके स्मारक स्थापित हैं। इससे पता चलता है कि गांधी का प्रभाव केवल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके विचारों को दुनियाभर के अलग-अलग समाजों में भी जगह मिली।
ऐतिहासिक व्यक्तित्व की प्रतिमा स्थापित होने का क्या है महत्व?
किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की प्रतिमा स्थापित करना केवल उनके सम्मान में स्मारक बनाने तक सीमित नहीं होता। यह उस व्यक्ति के विचारों, संघर्षों और ऐतिहासिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक माध्यम भी होता है।
जब कोई देश किसी दूसरे देश के ऐतिहासिक व्यक्तित्व की प्रतिमा स्थापित करता है, तो इसके पीछे सांस्कृतिक संबंध, साझा इतिहास, वैचारिक समानता और उस व्यक्तित्व के प्रति सम्मान जैसे कई पहलू हो सकते हैं।
महात्मा गांधी के मामले में यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उनकी प्रतिमाएं अलग-अलग देशों में अलग-अलग ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ी हुई हैं। उदाहरण के लिए, लंदन में संसद के पास उनकी प्रतिमा भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक संबंधों की याद दिलाती है। दक्षिण अफ्रीका में उनकी प्रतिमा नस्लीय भेदभाव के खिलाफ उनके संघर्ष को दर्शाती है। वहीं, अमेरिका में स्थापित प्रतिमा नागरिक अधिकार आंदोलन पर गांधी के विचारों के प्रभाव की याद दिलाती है।
इस तरह किसी ऐतिहासिक व्यक्ति की प्रतिमा किसी देश की सार्वजनिक स्मृति का हिस्सा बन जाती है। यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों को उस व्यक्ति के जीवन, विचारों और ऐतिहासिक योगदान के बारे में जानने का अवसर देती है। साथ ही, ऐसे स्मारक देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी संबंधों को मजबूत करने में भी भूमिका निभा सकते हैं।
