हिंदी ‘दृश्यम 3’ की कहानी मोहनलाल की मलयालम ‘दृश्यम 3’ की सीधी रीमेक नहीं है। निर्देशक अभिषेक पाठक ने हिंदी फ्रेंचाइजी के लिए अलग कहानी पेश की है, इसलिए मलयालम फिल्म देख चुके दर्शकों के लिए भी क्लाइमैक्स नया है।
नई दिल्ली: 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ यानी ‘दृश्यम 3’ के साथ विजय सलगांवकर की कहानी अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। अजय देवगन एक बार फिर विजय के किरदार में लौटे हैं, जबकि तब्बू, श्रिया सरन और इशिता दत्ता भी अपने पुराने किरदारों में नजर आ रही हैं। इस बार फिल्म में जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री कहानी को नया मोड़ देती है। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पिछली दो फिल्मों के फॉर्मूले को आगे बढ़ाते हुए अब एक नए रहस्य के साथ आती है। वहीं, हिंदी फ्रेंचाइजी का यह हिस्सा हाल में रिलीज हुई मोहनलाल की मलयालम ‘दृश्यम 3’ से अलग कहानी लेकर आया है। यानी जिन दर्शकों ने मलयालम फिल्म देख ली है, उनके लिए भी हिंदी वर्जन में कहानी का अगला रास्ता पहले से तय नहीं है।
पुराने राज से आगे बढ़ती कहानी
‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत उसका 2 अक्टूबर वाला रहस्य रहा है। पहली फिल्म में विजय ने अपने परिवार को बचाने के लिए जिस तरह कहानी, तारीखों और सबूतों का जाल बुना था, उसने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा। दूसरी फिल्म ने उसी कहानी को आगे बढ़ाया और जांच को एक नए स्तर पर पहुंचाया।
तीसरे भाग में भी विजय और उसका परिवार उसी पुराने अपराध की छाया से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है। विजय सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश करता है, लेकिन अतीत उसके परिवार का पीछा नहीं छोड़ता। नंदिनी यानी श्रिया सरन और बेटियां भी उस घटना के असर से जूझती दिखाई देती हैं।
दूसरी तरफ मीरा देशमुख यानी तब्बू के लिए मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। उसके बेटे की मौत का सवाल अब भी उसके भीतर जिंदा है। यहीं से फिल्म का नया संघर्ष शुरू होता है।
मामला दोबारा खुलता है और जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर तोमर यानी जयदीप अहलावत को मिलती है। वह विजय के पुराने केस को उसी नजरिए से नहीं देखता, जिस तरह पिछली जांच हुई थी। उसका तरीका ज्यादा आक्रामक और आधुनिक है।
इस बार मामला सिर्फ 2 अक्टूबर की कहानी नहीं
‘दृश्यम 3’ में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कहानी केवल पुराने घटनाक्रम को दोहराने पर निर्भर नहीं करती। फिल्म में जांच का एक अहम आधार एक बरामद कंकाल की पहचान बनता है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करती है कि वह कंकाल किसका है और उसका पुराने मामले से क्या संबंध है।
विजय को पता है कि अगर पुलिस एक बार उस पुराने मामले की कड़ियों को सही तरीके से जोड़ने में सफल हो गई, तो उसके परिवार के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। इसलिए वह फिर से अपनी बुद्धि और पुराने अनुभव का इस्तेमाल करता है।
फिल्म की पटकथा का सारा खेल ये ही है कि पुलिस विजय से कितनी आगे निकल पाती है और विजय जांच को कितनी देर तक अपने हिसाब से मोड़ सकता है।
अजय देवगन ने फिर संभाली विजय की कमान
फिल्म में अजय देवगन के लिए विजय सलगांवकर का किरदार अब सिर्फ एक किरदार नहीं रहा। पिछले दो हिस्सों में जिस तरह इस किरदार की पहचान बनी है, उसी निरंतरता को उन्होंने तीसरे भाग में भी बनाए रखा है।
दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में विजय बहुत ज्यादा बोलता नहीं है। उसका अभिनय कई जगह संवादों से ज्यादा चेहरे और आंखों के भाव पर निर्भर करता है। जब सामने पुलिस हो, परिवार पर खतरा हो और पुराने राज खुलने का डर हो, तब भी वह खुद को ज्यादा जाहिर नहीं करता।
अजय इसी नियंत्रित अंदाज को आगे बढ़ाते हैं। यही वजह है कि विजय का किरदार इस बार भी कहानी का भावनात्मक और रणनीतिक केंद्र बना रहता है।
जयदीप अहलावत की एंट्री
‘दृश्यम 3’ में सबसे महत्वपूर्ण नए किरदारों में से एक है एसपी राजवीर तोमर, जिसे जयदीप अहलावत ने निभाया है।
पिछली फिल्मों में पुलिस और विजय के बीच टकराव रहा था, लेकिन जयदीप का किरदार इस मुकाबले को नई ऊर्जा देता है। वह सिर्फ पुराने सबूतों पर निर्भर रहने वाला पुलिस अधिकारी नहीं दिखता, बल्कि विजय की सोच को समझने की कोशिश करता है।
समीक्षको ने जयदीप के प्रदर्शन को खास तौर पर सराहा गया है। उनके किरदार में आत्मविश्वास, सख्ती और एक अलग तरह का स्वैग दिखाई देता है।
इसी वजह से अजय देवगन और जयदीप अहलावत के बीच आमना-सामना फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में शामिल हो जाता है।
तब्बू फिर बनीं विजय के लिए सबसे बड़ा खतरा
मीरा देशमुख के रूप में तब्बू की वापसी फ्रेंचाइजी के लिए स्वाभाविक थी। उनका किरदार पहले से ही विजय के परिवार के खिलाफ सबसे मजबूत पक्ष रखता है।
इस बार भी मीरा के भीतर अपने बेटे की मौत का दर्द और सच जानने की बेचैनी मौजूद है। हालांकि फिल्म का फोकस पूरी तरह उसके भावनात्मक पक्ष पर नहीं रहता और कहानी ज्यादा तेजी से नए क्राइम-थ्रिलर ट्रैक की तरफ बढ़ती है।
कुछ समीक्षकों ने भी यही अंतर महसूस किया है। लोगों ने अजय और तब्बू के प्रदर्शन और कहानी के भावनात्मक पक्ष की तारीफ की, वहीं कुछ अन्य समीक्षकों ने माना कि फिल्म थ्रिलर को इमोशनल ड्रामा पर प्राथमिकता देती है।
श्रिया सरन और इशिता दत्ता का काम
श्रिया सरन एक बार फिर नंदिनी सलगांवकर के रूप में दिखाई देती हैं। नंदिनी अब उस परिवार की सदस्य है जिसने वर्षों तक एक राज को अपने भीतर दबाकर रखा है।
इशिता दत्ता अंजू के किरदार में हैं, जबकि मृणाल जाधव भी परिवार का हिस्सा बनी हुई हैं। पिछली फिल्मों की तरह इस बार भी परिवार सिर्फ कहानी की पृष्ठभूमि नहीं है। विजय जो कुछ करता है, उसकी सबसे बड़ी वजह परिवार की सुरक्षा ही है।
इसी वजह से कहानी में अपराध और परिवार के बीच लगातार तनाव बना रहता है।
प्रकाश राज ने भी बढ़ाई गंभीरता
फिल्म में प्रकाश राज इंद्रजीत शेट्टी की भूमिका में नजर आते हैं। उनका किरदार कहानी में कानूनी और जांच से जुड़े संघर्ष को नया आयाम देता है।
रजत कपूर भी महेश देशमुख की भूमिका में वापस हैं। वहीं कमलेश सावंत गायतोंडे के किरदार में फिर दिखाई देते हैं। शुरुआती समीक्षाओं में गायतोंडे के किरदार को कहानी के तनाव के बीच हल्के हास्य का संतुलन बनाने वाला बताया गया है।
पहला हाफ कैसा है?
‘दृश्यम 3’ का पहला हिस्सा कहानी की जमीन तैयार करने में समय लेता है। फिल्म तुरंत बड़े ट्विस्ट पर नहीं पहुंचती। परिवार की स्थिति, पुराने मामले की छाया और नए जांच अधिकारी की एंट्री को धीरे-धीरे स्थापित किया जाता है।
पहला हाफ अपेक्षाकृत धीमा जान पड़ता है। हालांकि इंटरवल के आसपास विजय और राजवीर के बीच टकराव कहानी को ज्यादा रोमांचक बना देता है। यानी फिल्म शुरुआत में दर्शक से थोड़ा धैर्य मांगती है, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, तनाव बढ़ता जाता है।
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सेकेंड हाफ में बढ़ता है असली खेल
फिल्म का दूसरा भाग ज्यादा तेजी से आगे बढ़ता है। पुराने मामले से जुड़े सवालों के नए जवाब सामने आने लगते हैं और पुलिस की जांच विजय के लिए ज्यादा बड़ा खतरा बन जाती है।
यहां फिल्म अपने मुख्य हथियार यानी ट्विस्ट और माइंड गेम पर ज्यादा निर्भर करती है। फिल्म का क्लाइमैक्स इसका प्रमुख आकर्षण है और कहानी के आखिरी हिस्से में दर्शकों के लिए कई अप्रत्याशित मोड़ रखे गए हैं।
समीक्षकों ने भी फिल्म के समापन को फ्रेंचाइजी के लिए संतोषजनक बताया है और कहा है कि फिल्म पुराने खुले सवालों को जोड़ते हुए कहानी को एक निष्कर्ष तक पहुंचाती है।
मलयालम ‘दृश्यम 3’ से क्यों अलग है फिल्म?
यह ‘दृश्यम 3’ की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। हिंदी फ्रेंचाइजी की पहली दो फिल्में मलयालम फिल्मों की रीमेक थीं। लेकिन तीसरे भाग में कहानी अलग रास्ते पर चली गई है। निर्देशक अभिषेक पाठक ने पहले ही स्पष्ट किया था कि हिंदी फिल्म नई कहानी लेकर आई है और यह मोहनलाल की मलयालम ‘दृश्यम 3’ की सीधी रीमेक नहीं है।
अजय देवगन ने भी कहा था कि हिंदी फिल्म मलयालम संस्करण से पूरी तरह अलग है और इसका उद्देश्य विजय सलगांवकर की कहानी को अपने तरीके से खत्म करना है।
इसका फायदा यह है कि दर्शक मलयालम फिल्म देखने के बाद भी हिंदी फिल्म के क्लाइमैक्स का अंदाजा पहले से नहीं लगा सकते।
अभिषेक पाठक के लिए सबसे बड़ी चुनौती
अभिषेक पाठक ने ‘दृश्यम 2’ के बाद इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म का निर्देशन किया है। इस बार चुनौती सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने की नहीं थी, बल्कि ऐसी कहानी बनाने की थी जो पिछली फिल्मों की पहचान को बरकरार रखते हुए खुद को दोहराए भी नहीं।
निर्देशक ने पहले कहा था कि तीसरे भाग के बाद विजय सलगांवकर की कहानी को आगे बढ़ाने की योजना नहीं है। यानी यह फिल्म इस हिंदी फ्रेंचाइजी का अंतिम अध्याय है। इसी वजह से फिल्म पर कहानी को समेटने का दबाव भी था।
बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी शुरुआत
कहानी और समीक्षा के साथ फिल्म की रिलीज से पहले बॉक्स ऑफिस को लेकर भी काफी चर्चा रही।
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर की रात तक फिल्म ने भारत में छह शो डेट्स के लिए करीब ₹51.44 करोड़ की एडवांस बुकिंग दर्ज की थी, जिसमें ब्लॉक सीटें भी शामिल थीं। बिना ब्लॉक सीटों के आंकड़ा करीब ₹41.17 करोड़ बताया गया। 2 अक्टूबर के लिए अकेले एडवांस बुकिंग करीब ₹28.11 करोड़ थी।
फिल्म के शुरुआती दिन के लिए 5 लाख से ज्यादा टिकट पहले ही बिक चुके थे। महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात एडवांस बुकिंग वाले प्रमुख बाजारों में रहे।
हालांकि ये एडवांस बुकिंग के आंकड़े हैं, अंतिम बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं। इसलिए रिलीज के शुरुआती दिन की वास्तविक कमाई का आकलन बाद के आधिकारिक/ट्रेड आंकड़ों से ही किया जा सकेगा।
