Monday, 19 October 2026
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एफआरएनडी प्लेटफॉर्म ने बदली इलक्किया की जिंदगी, मिला प्यार, भरोसा और आत्मनिर्भर बनने का अवसर

नई दिल्ली: कुछ कहानियां यह साबित करती हैं कि जिंदगी में मिला एक छोटा-सा अवसर भी पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। 28 वर्षीय इलक्किया की कहानी इसी का उदाहरण है। भावनात्मक सहारे, अपनापन और आत्मनिर्भर बनने की उनकी तलाश को नई मंजिल तब मिली, जब उन्होंने इंटरैक्ट ग्रुप के भारत के प्रमुख वॉयस-फर्स्ट सोशल डिस्कवरी प्लेटफॉर्म एफआरएनडी से जुड़ने का फैसला किया।

जन्म लेते ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। उनके पिता ही उनका पूरा संसार थे। लेकिन कोविड महामारी के दौरान जब उनके पिता का भी निधन हो गया, तो मानो उनके जीवन का आखिरी सहारा भी छिन गया। रिश्तेदारों के साथ रहते हुए उन्हें छत तो मिली, लेकिन अपनापन नहीं। आखिरकार उन्होंने अपने दम पर जिंदगी जीने का मुश्किल फैसला किया।

इलक्किया स्वभाव से बेहद संकोची थीं। लोगों से खुलकर बात करना उनके लिए आसान नहीं था, खासकर पुरुषों से। बार-बार अपनों को खोने के बाद किसी पर भरोसा करना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे ही एक दौर में सोशल मीडिया पर उनकी नजर एफआरएनडी के बारे में एक वीडियो पर पड़ी। उन्हें लगा कि शायद यहां कोई ऐसा सुरक्षित मंच मिल जाए, जहां कोई उन्हें परखे बिना उनकी बात सुने और वे बिना किसी झिझक के अपनी बात कह सकें। उन्होंने इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने का फैसला किया।

शुरुआत में उठाया गया यह छोटा-सा कदम जल्द ही न सिर्फ इलक्किया, बल्कि उनसे जुड़ने वाले कई लोगों की जिंदगी में भी बदलाव की वजह बन गया।

एफआरएनडी पर उनकी मुलाकात कतर में 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने वाले एक युवक से हुई। घर और परिवार से दूर वह लंबे समय से अकेलेपन से जूझ रहा था। दोनों के बीच नियमित बातचीत होने लगी। धीरे-धीरे इलक्किया उसकी ऐसी दोस्त बन गईं, जिससे वह अपने मन की हर बात कह सकता था। उनकी दोस्ती ने उस युवक को भावनात्मक रूप से संभलने में काफी मदद की। एक-दूसरे का सहारा बनने से शुरू हुई यह पहचान समय के साथ गहरी दोस्ती में बदल गई और उसके जीवन को नई दिशा दे गई।

लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे खास अध्याय अभी बाकी था।

इसी प्लेटफॉर्म पर इलक्किया की पहचान एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसके जीवन में भी दर्द और अकेलापन कम नहीं था। उसने भी अपनी मां को खोया था और धीरे-धीरे जिंदगी से निराशा हो चुका था। काम ही उसकी दुनिया बन गया था। उसके लिए जिंदगी अब बस गुजर रही थी, जी नहीं जा रही थी।

देर रात तक चलने वाली बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा तो दोनों ने एक-दूसरे के दर्द, संघर्ष और भावनाओं को करीब से समझना शुरू किया। धीरे-धीरे यह रिश्ता और मजबूत होता गया। सहानुभूति से शुरू हुई यह पहचान दोस्ती में बदली और फिर दोस्ती ने प्यार का रूप ले लिया। इसी साल दोनों विवाह बंधन में बंध गए।

इलक्किया के लिए एफआरएनडी सिर्फ नए लोगों से मिलने का मंच नहीं बना, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का जरिया भी साबित हुआ। प्लेटफॉर्म से हुई आय की मदद से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। आज वे एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट हैं और अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हैं। कभी खुद को पूरी तरह अकेला महसूस करने वाली इलक्किया आज एक नई जिंदगी जी रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भरोसे, प्यार और दूसरी शुरुआत का सफर है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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