पत्नी ने बिना अनुमति अस्पताल ले जाने पर उठाए सवाल, 20 जुलाई की रैली से पहले हुई कार्रवाई ने आंदोलन को नया मोड़ दिया
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तीन सप्ताह से जारी सोनम वांगचुक के आमरण अनशन ने शनिवार, 18 जुलाई को नया मोड़ ले लिया। अनशन के 21वें दिन सुबह-सुबह सादे कपड़ों में पहुंची दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया। दूसरी ओर, वांगचुक की पत्नी और आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना परिवार या स्वयं वांगचुक की सहमति के अस्पताल ले जाया गया।
इस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर तनाव का माहौल बन गया और आंदोलन को लेकर राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं।
क्या हुआ 18 जुलाई की सुबह?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी सादे कपड़ों में जंतर-मंतर पहुंचे। प्रदर्शन स्थल के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई और कुछ समय बाद सोनम वांगचुक को वहां से निकालकर सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस का कहना है कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई, हालांकि इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया और हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों से भी स्थल खाली करने की अपील की।
पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर कहा कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी किसी भी नागरिक के जीवन की रक्षा करना है। पुलिस के अनुसार, डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के बाद ही वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार 21 दिनों के उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो चुकी थी और यदि समय पर चिकित्सा सहायता नहीं दी जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। इसलिए कार्रवाई केवल स्वास्थ्य कारणों से की गई, न कि आंदोलन को समाप्त करने के उद्देश्य से।
सफदरजंग अस्पताल ने क्या बताया?
अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार, लंबे समय से उपवास पर रहने के कारण सोनम वांगचुक शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो गए हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर (Stable) है, लेकिन लगातार निगरानी और उपचार की आवश्यकता है।
बताया गया कि लंबे अनशन के कारण शरीर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन के लक्षण पाए गए हैं, इसलिए उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
पत्नी ने क्यों जताई आपत्ति?
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें बिना परिवार की अनुमति के अस्पताल ले जाया गया। उनका कहना था कि यदि किसी प्रकार का इलाज किया जाता है, तो वह वांगचुक की सहमति से ही होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जानकारी में ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी, जिसके कारण तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी हो। उनके इस बयान के बाद आंदोलन से जुड़े समर्थकों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
एक दिन पहले जारी किया था भावुक वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले, सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने समर्थकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा था कि यदि लोग इस आंदोलन के लिए आगे नहीं आए, तो “मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और आंदोलन को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
अभिजीत दीपके ने शांतिपूर्ण अनशन की अपील की
जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के कुछ ही घंटों बाद Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से देशभर में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों की आवाज है। दीपके ने समर्थकों से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या टकराव से बचें और अपने-अपने शहरों में शांतिपूर्ण उपवास, धरना या प्रार्थना सभाओं के जरिए एकजुटता दिखाएं।
उनका कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यवस्था से संघर्ष करना नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान उन मुद्दों की ओर आकर्षित करना है जिनके लिए सोनम वांगचुक पिछले कई वर्षों से आवाज उठा रहे हैं।
क्या हैं सोनम वांगचुक की प्रमुख मांगें?
सोनम वांगचुक का यह आंदोलन केवल व्यक्तिगत विरोध नहीं है। उनकी प्रमुख मांगें NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराना है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
वे चाहते हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की जा रही है।
आंदोलन से जुड़े संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई है और उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। इन मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
20 जुलाई की रैली पर अब सबकी नजर
सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन का भविष्य सबसे बड़ा सवाल बन गया है। हालांकि उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है, लेकिन आंदोलन से जुड़े नेताओं और समर्थकों ने स्पष्ट कर दिया है कि विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
Cockroach Janta Party (CJP) ने घोषणा की कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च और अन्य कार्यक्रमों को रद्द नहीं किया जाएगा। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की और कहा कि आंदोलन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई के बाद कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने सरकार की आलोचना की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अनशन लोकतांत्रिक अधिकार हैं तथा प्रशासन को आंदोलनकारियों के साथ संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। कुछ नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश बताया, जबकि सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का जीवन बचाना प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी कि सार्वजनिक विरोध और राज्य की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
अरविंद केजरीवाल ने जताया विरोध
इस घटना पर विरोध जाहिर करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने एक्स अकाउंट पर ट्वीट करते हुए लिखा –
“ऐसा अहंकार उचित नहीं है। सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर ले जाने के बजाय मोदी सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए थी। कॉकरोच आंदोलन को दबाने की कोशिश करने के बजाय देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। सोनम वांगचुक के साथ जबरन कार्रवाई करना मोदी सरकार की हार को दर्शाता है”।
आगे क्या?
फिलहाल सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर रखे हुए हैं। दूसरी ओर, उनके समर्थकों ने साफ किया है कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और उनकी मांगें पहले की तरह जारी रहेंगी।
यह मामला अब केवल एक अनशन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश में शिक्षा के चरमराते ढांचे और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन जैसे व्यापक सवाल भी खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में सरकार, प्रशासन और आंदोलनकारियों के अगले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।
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