दो Twin Towers के बीच हवा में चलते एक कलाकार ने 1974 में पूरे न्यूयॉर्क को आसमान की ओर देखने पर मजबूर कर दिया। Philippe Petit की यह कहानी कला, जोखिम और जुनून का असाधारण मेल है।
न्यूयॉर्क: 7 अगस्त 1974 की सुबह न्यूयॉर्क शहर में लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे। लेकिन मैनहट्टन के आसमान में उस दिन कुछ ऐसा होने वाला था, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दो विशाल इमारतों, North Tower और South Tower के बीच एक पतली स्टील वायर पर एक व्यक्ति कदम रखने वाला था। उसके नीचे सैकड़ों मीटर की गहराई और सामने सिर्फ आसमान था।
वह व्यक्ति था फ्रांस का कलाकार और हाई-वायर वॉकर फिलिप पेटी। करीब 1,350 फीट की ऊंचाई पर दोनों टावरों के बीच बिना किसी सुरक्षा जाल के वायर पर चलते हुए पेटी ने लगभग 45 मिनट तक प्रदर्शन किया। वह केवल एक बार तार पर नहीं चला, बल्कि आगे-पीछे कई बार गया, घुटनों के बल बैठा और तार पर लेटकर नीचे न्यूयॉर्क शहर को देखा।
यह कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। इसके लिए न अनुमति ली गई थी और न ही इसे किसी संस्था ने आयोजित किया था। पेटी और उनके साथियों ने महीनों की तैयारी, गुप्त योजनाओं और असाधारण जोखिम के बाद यह प्रदर्शन किया। घटना के बाद इसे मीडिया ने “The Artistic Crime of the Century” जैसे नाम दिए।
फिलिप पेटी कौन थे?
फिलिप पेटी का जन्म 13 अगस्त 1949 को फ्रांस के नेमौर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें पारंपरिक रास्तों से हटकर कुछ करने का शौक था। वह जादू, कला और खास तौर पर जगलिंग तथा बैलेंसिंग जैसी गतिविधियों में रुचि रखते थे।
किशोरावस्था तक आते-आते उन्होंने हाई-वायर वॉकिंग को अपनी कला का हिस्सा बना लिया। पेटी के लिए रस्सी पर चलना केवल किसी ऊंची जगह से दूसरी जगह पहुंचने का तरीका नहीं था। वह इसे प्रदर्शन कला यानी Performance Art मानते थे।
उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर बिना आधिकारिक अनुमति के भी अपने प्रदर्शन किए। इससे उन्हें लोकप्रियता भी मिली और कई बार कानून से परेशानी भी हुई। लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें भविष्य के सबसे महत्वाकांक्षी स्टंट के लिए तैयार किया।
Twin Towers ने कैसे खींचा पेटी का ध्यान?
1960 के दशक के अंत में पेटी की नजर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण पर पड़ी। उस समय Twin Towers अभी निर्माणाधीन थे। पेटी को इन विशाल इमारतों के बीच वायर वॉक करने का विचार आया।
विचार बेहद असंभव लग सकता था। दोनों टावरों की छतों के बीच लगभग 1,200 फीट और सड़क से उनकी ऊंचाई करीब 1,350 फीट थी। इतनी ऊंचाई पर तार लगाना और उस पर चलना किसी सामान्य करतब की तरह बिल्कुल नहीं था। लेकिन पेटी के लिए यही इसकी खासियत थी।
उन्होंने इस प्लान को तुरंत अंजाम देने के बजाय सालों तक इसके बारे में विचार किया, योजना बनाई और संभावित तरीकों का अध्ययन किया।
करतब बना एक गुप्त मिशन
पेटी का सबसे बड़ा लक्ष्य था कि प्रशासन को इसकी जानकारी पहले न हो। अगर पुलिस या भवन सुरक्षा अधिकारियों को पहले पता चल जाता, तो प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही रोक दिया जाता।
इसलिए पूरी योजना को बेहद गोपनीय रखा गया। पेटी ने अपने दोस्तों और सहयोगियों की मदद ली। इनमें जीन-फ्रांस्वा हेकेल (Jean-François Heckel), जीन-लुई ब्लोन्दो (Jean-Louis Blondeau), एनी एलिक्स (Annie Allix) और जिम मूर (Jim Moore) शामिल थे।
किसी को तकनीकी तैयारी करनी थी, किसी को इमारत के भीतर पहुंचने में मदद करनी थी और किसी को वायर लगाने की व्यवस्था करनी थी।
यह अभियान कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण था क्योंकि Twin Towers उस समय भी अत्यधिक सुरक्षा वाले और महत्वपूर्ण व्यावसायिक परिसर थे।
इमारत तक पहुंचने की योजना
पेटी और उनके साथियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की संरचना और सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया। उन्हें यह समझना था कि उपकरणों को बिना संदेह पैदा किए ऊपर कैसे पहुंचाया जाए और दोनों टावरों की छतों तक कैसे पहुंचा जाए।
उन्होंने पहले कई बार इमारत में जाकर परिस्थितियों को समझने की कोशिश की। पेटी ने भवन के आसपास के क्षेत्र को देखा और ऊंचाई, दूरी तथा संभावित तारों की प्लेसमेंट का अध्ययन किया।
आखिरकार, 6 अगस्त 1974 की रात उनके सहयोगी अलग-अलग तरीकों से दोनों टावरों की ऊपरी मंजिलों तक पहुंचे। वहां वायर वॉक के लिए जरूरी उपकरण पहुंचाया गया।
दोनों टावरों के बीच तार को पहुंचाना। इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौती थी
तार को दूसरी इमारत तक पहुंचाने की चुनौती
दोनों टावरों के बीच की दूरी 1200 फीट थी। इतनी दूरी पर एक भारी स्टील केबल को हाथ से एक टावर से दूसरे टावर तक फेंकना संभव नहीं था। इसलिए पेटी की टीम ने एक तरकीब तैयार की।
पहले एक हल्की लाइन को दोनों टावरों के बीच पहुंचाना था। इसके लिए एक Arrow और Bow का इस्तेमाल किया गया। इस हल्की लाइन के जरिए धीरे-धीरे ज्यादा मजबूत रस्सी और फिर स्टील केबल को दूसरी तरफ खींचा गया।
यह काम बेहद सावधानी से करना पड़ा क्योंकि अगर शुरुआती लाइन गलत दिशा में जाती या नीचे गिरती, तो पूरी योजना विफल हो सकती थी।
आखिरकार केबल दोनों टावरों के बीच पहुंचा दी गई। इसके बाद उसे मजबूत और स्थिर करने का काम शुरू हुआ।
7 अगस्त की सुबह और ऐतिहासिक क्षण
7 अगस्त 1974 की सुबह करीब 7 बजे के आसपास पेटी ने तार पर पहला कदम रखा। उस समय Twin Towers के बीच मौजूद दूरी और नीचे की ऊंचाई किसी भी इंसान के लिए भयावह हो सकती थी।
पेटी के पास कोई Modern Safety Harness नहीं था। उनके पास केवल संतुलन छड़ (Balancing Pole) थी, जिसकी मदद से वह अपने शरीर का संतुलन बनाए रख रहे थे।
उन्होंने धीरे-धीरे कदम बढ़ाना शुरू किया। पहले कुछ कदमों के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। नीचे न्यूयॉर्क शहर था और ऊपर खुला आसमान।
पेटी ने तार पर करीब 45 मिनट बिताए और इस दौरान उन्होंने कई बार दोनों टावरों के बीच आवाजाही की। उन्होंने तार पर चलने के साथ-साथ घुटनों के बल बैठने और लेटने जैसे प्रदर्शन भी किए।
प्रशासन में मचा हड़कंप
जैसे ही लोगों ने आसमान में Twin Towers के बीच एक व्यक्ति को तार पर चलते देखा, खबर तेजी से फैलने लगी।
पुलिस और आपातकालीन कर्मी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि जिस व्यक्ति को वे गिरफ्तार करना चाहते थे, वह जमीन से करीब 1,350 फीट ऊपर एक पतली केबल पर खड़ा था।
पुलिस ने उसे नीचे आने के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन पेटी ने अपना प्रदर्शन जारी रखा।
कुछ समय बाद उन्होंने आखिरकार वायर वॉक समाप्त किया और वापस टावर की ओर आए। जैसे ही वह सुरक्षित सतह पर पहुंचे, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पेटी पर क्या कार्रवाई हुई?
पेटी को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ आरोप लगाए गए। उनके स्टंट को लेकर अनधिकार प्रवेश (Trespassing) और अन्य उल्लंघनों से संबंधित कार्रवाई की गई।
लेकिन यह मामला सामान्य आपराधिक रूप से नहीं चला। पेटी के प्रदर्शन ने न्यूयॉर्क के लोगों और मीडिया में इतना आकर्षण पैदा कर दिया था कि अधिकारियों ने आ मामले को अपेक्षाकृत हल्के तरीके से निपटाया।
उन्हें जेल भेजने के बजाय Community Service की सजा दी गई। उन्हें बच्चों के लिए प्रदर्शन करने और अपनी कला दिखाने जैसी शर्तों से जोड़ा गया।
इस तरह जिस घटना के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था, वही घटना उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान का आधार बन गई।
प्रदर्शन क्यों कहलाया ‘Artistic Crime of the Century’?
पेटी ने केवल नियम तोड़कर एक इमारत से दूसरी इमारत तक जाने की कोशिश नहीं की थी। उन्होंने इसे एक कला प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत किया। उनके लिए तारों पर चलना कलाकार, वास्तुकला और शहर के बीच के प्रकार का संवाद था।
इसी वजह से इस घटना को केवल स्टंट के रूप में नहीं देखा गया। पेटी ने कई बार कहा कि वह Twin Towers को देखकर उनसे “बात” करना चाहते थे और उनकी ऊंचाई को कला के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे।
उनका प्रदर्शन इतना असामान्य था कि इसे “Artistic Crime of the Century” का नाम दिया गया।
पेटी पहला भी ऐसा कर चुके थे
Twin Towers उनका पहला हाई प्रोफाइल गैर-कानूनी वायर वॉक नहीं था।
उन्होंने इससे पहले Notre-Dame Cathedral और ऑस्ट्रेलिया के Sydney Harbour Bridge जैसे स्थानों पर भी अपने high-wire performances किए थे। इन प्रदर्शनों ने उन्हें असामान्य ऊंचाई पर संतुलन बनाने और बिना सुरक्षा के प्रदर्शन करने का अनुभव दिया।
Twin Towers की योजना हालांकि उन सभी से कहीं अधिक कठिन थी। यह केवल ऊंचाई की वजह से नहीं, बल्कि दोनों इमारतों के बीच केबल स्थापित करने और पूरी कार्रवाई को गुप्त रखने की वजह से भी बेहद चुनौतीपूर्ण थी।
इस घटना ने पेटी की जिंदगी बदल दी
Twin Towers वॉक के बाद पेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गए। उनका नाम केवल सर्कस या स्ट्रीट परफॉर्मेंस की दुनिया तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने आगे भी हाई वायर और परफॉर्मेंस आर्ट जारी रखा। उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए और अपनी कला को लेकर लेक्चर तथा वर्कशॉप भी किए। Twin Towers के बीच उनका प्रदर्शन उनकी पहचान का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा बन गया।
बाद में उनकी कहानी किताबों और फिल्मों का विषय भी बनी। 2008 में बनी डॉक्यूमेंट्री “Man on Wire” ने उनके Twin Towers प्रदर्शन को पूरी दुनिया के सामने फिर से चर्चा में ला दिया। फिल्म ने Academy Award for Best Documentary Feature भी जीता।
2015 में Robert Zemeckis की फिल्म “The Walk” ने भी इस घटना को सिनेमाई रूप में पेश किया।
एक असंभव विचार को सच करने की कहानी
फिलिप पेटी की कहानी की सबसे खास बात शायद उनका तार पर चलना नहीं, बल्कि उस विचार को वास्तविकता में बदलने की जिद है। एक दिन उन्होंने दो विशाल टावरों को देखा और उनके बीच हवा में चलने की कल्पना की। ज्यादातर लोगों के लिए यह कल्पना वहीं खत्म हो जाती। पेटी ने इसे लक्ष्य बनाया।
इसके बाद वर्षों तक तैयारी, अभ्यास, साथियों की मदद, तकनीकी योजना और जोखिम उठाने के बाद उन्होंने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना तक लोगों के लिए मुश्किल थी। उनके कदमों के नीचे न्यूयॉर्क शहर था, लेकिन उनकी कहानी जमीन से कहीं ऊपर लिखी जा रही थी।
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