Wednesday, 28 October 2026
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दिल्ली में दिख रही बिहार की विरासत! भागलपुरी सिल्क और मधुबनी का अनोखा संगम

बिहार की समृद्ध कला और हस्तशिल्प दिल्ली में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। भागलपुरी सिल्क, बावन बूटी और मधुबनी पेंटिंग जैसे शिल्प पीढ़ियों पुराने हुनर को जीवित रखे हैं।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित अंबापाली बिहार एम्पोरियम बिहार की समृद्ध कला, संस्कृति और हस्तशिल्प का जीवंत केंद्र है। यहां प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो दिल्ली की भागदौड़ पीछे छूट गई हो और बिहार के गांवों, करघों तथा लोककलाओं की दुनिया सामने साकार हो उठी हो। यहां प्रदर्शित हर उत्पाद केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि कारीगरों की मेहनत, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की पहचान है।

भागलपुर का सिल्क: बिहार के हैंडलूम का गौरव

भागलपुरी सिल्क बिहार की हैंडलूम परंपरा की सबसे बड़ी पहचान है। टसर, एरी और मलबेरी रेशम से तैयार यह कपड़ा अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और आकर्षक बनावट के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। करघे पर घंटों की मेहनत और पीढ़ियों से मिले हुनर से तैयार प्रत्येक वस्त्र बिहार की समृद्ध बुनाई परंपरा का प्रतीक बन जाता है।

बावन बूटी: ताने-बाने में सिमटी लोककथाएँ

बिहार की पारंपरिक बुनाई कला में बावन बूटी का विशेष स्थान है। धार्मिक प्रतीकों, प्रकृति और लोकजीवन से प्रेरित इसकी बारीक आकृतियां इसे खास बनाती हैं। यह कला आज भी बिहार के बुनकरों की पीढ़ियों से जीवित रखी गई सांस्कृतिक धरोहर है।

हैंडलूम से आगे: बिहार की हाथ से बनी अनमोल विरासत

बिहार केवल रेशमी वस्त्रों के लिए ही नहीं, बल्कि मधुबनी पेंटिंग, सिक्की क्राफ्ट, सुजनी कढ़ाई और खटवा कला के लिए भी प्रसिद्ध है। मधुबनी पेंटिंग आज अपनी एक वैश्विक पहचान बना चुकी है, जबकि सिक्की घास से तैयार सजावटी वस्तुएं और सुजनी-खटवा की बारीक कढ़ाई बिहार के कारीगरों की रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती हैं।

कारीगरों के हाथ का जादू

बिहार के उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता उनका हस्तनिर्मित होना है। भागलपुरी सिल्क, मधुबनी पेंटिंग या सिक्की क्राफ्ट, हर उत्पाद में कारीगरों की मेहनत, धैर्य और वर्षों का अनुभव झलकता है। मशीनें इनकी नकल कर सकती हैं, लेकिन उनमें इंसानी हाथों का वह स्पर्श और आत्मीयता नहीं ला सकतीं जो इन उत्पादों की असली पहचान है।

अंबापाली बिहार एम्पोरियम इन कारीगरों और ग्राहकों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहा है। इसके साथ ही दिल्ली हाट, सरस मेला और विभिन्न हस्तशिल्प प्रदर्शनियां भी बिहार के शिल्पकारों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

हुनर के ताने-बाने से बुनी एक जीवंत विरासत

बिहार का हर हैंडलूम वस्त्र और हर हस्तशिल्प अपने भीतर परंपरा, संस्कृति और मेहनत की कहानी समेटे हुए है। आज हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच भागलपुरी सिल्क, बावन बूटी, मधुबनी पेंटिंग और सिक्की क्राफ्ट जैसी कलाएं देश-दुनिया में बिहार की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं। यही कारण है कि अंबापाली बिहार एम्पोरियम केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि बिहार की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का एक सशक्त प्रतिनिधि बन चुका है।

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Bureau NOTD

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