Saturday, 03 October 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग से मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने की मंजूरी दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी है। उन्हें सफदरजंग से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को उनकी मेडिकल स्थिति और लगातार निगरानी की जरूरत को देखते हुए उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी।

वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया था, जहां वह कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ चल रहे Cockroach Janta Party (CJP) और छात्रों के आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर थे।

अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है जब NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर देश में छात्र विरोध तेज है। वांगचुक की अस्पताल में भर्ती और उनकी मेडिकल स्थिति ने इस आंदोलन को एक नया राजनीतिक और मानवीय आयाम दे दिया है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वांगचुक स्वयं NEET परीक्षा के उम्मीदवारों के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि आंदोलन के समर्थन में अनशन कर रहे थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद अब उन्हें उनकी पसंद के निजी अस्पताल में उपचार और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की सुविधा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

जंतर-मंतर से अस्पताल तक कैसे पहुंचा मामला?

सोनम वांगचुक पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनका अनशन NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और उससे जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन में था। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई।

18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट की एक पीठ ने 16 जुलाई को केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि वांगचुक की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित उपचार दिया जाए। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो और समर्थकों की ओर से यह सवाल उठाया गया कि उन्हें ऐसे अस्पताल में इलाज की अनुमति दी जानी चाहिए जहां उनके परिवार और डॉक्टर उनकी पसंद के अनुसार उनकी देखभाल कर सकें।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

मंगलवार, 21 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत पर जोर दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज की चिकित्सा जरूरतों और उसकी पसंद को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके बाद मेदांता अस्पताल में उन्हें स्थानांतरित करने का रास्ता खुल गया। केंद्र की ओर से भी इस स्थानांतरण पर आपत्ति नहीं जताई गई।

मेदांता अस्पताल गुरुग्राम में स्थित है, जो दिल्ली-एनसीआर का प्रमुख निजी चिकित्सा केंद्र है। वांगचुक को यहां शिफ्ट किए जाने से उनके स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी और इलाज उपलब्ध कराने की उम्मीद है।

वांगचुक की पत्नी ने क्या कहा?

वांगचुक की पत्नी ने उनके अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाने की अनुमति दिए जाने का स्वागत किया।

परिवार की ओर से लगातार यह चिंता जताई जा रही थी कि वांगचुक की चिकित्सा देखभाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप और उनकी पसंद के अनुसार होनी चाहिए। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उनके परिवार को उम्मीद है कि मेदांता में उन्हें आवश्यक चिकित्सा निगरानी और उपचार मिल सकेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप क्यों महत्वपूर्ण है?

सोनम वांगचुक के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।

पहला, यह मामला एक व्यक्ति के स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारों से जुड़ा है। भूख हड़ताल जैसे विरोध के तरीकों में प्रदर्शनकारी जानबूझकर भोजन का त्याग करता है, जिससे लंबे समय तक ऐसा करने पर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।

दूसरा, यह मामला राज्य की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर अनशन करता है और उसकी तबीयत बिगड़ती है, तो प्रशासन के सामने उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है।

तीसरा, यह मामला विरोध करने के अधिकार और व्यक्ति की चिकित्सा पसंद के बीच संतुलन का सवाल भी उठाता है।

वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करने और बाद में उनकी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने का मामला इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

क्या वांगचुक का अनशन खत्म हो गया?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल में स्थानांतरण का आदेश उनके स्वास्थ्य और चिकित्सा निगरानी से जुड़ा है। इसे उनके आंदोलन या अनशन के समाप्त होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उनके अनशन और आंदोलन की आगे की स्थिति उनके स्वास्थ्य, चिकित्सकीय सलाह और आंदोलन से जुड़े निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल प्राथमिकता उनकी चिकित्सा देखभाल और स्वास्थ्य की निगरानी है।

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाना है। अब सबसे बड़ा ध्यान उनके स्वास्थ्य और चिकित्सकीय निगरानी पर रहेगा।

दूसरी ओर, NEET विवाद से जुड़े छात्र आंदोलन की मांगों पर भी सरकार और संबंधित संस्थाओं को जवाब देना होगा। यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी होगा।

अदालत ने उन्हें चिकित्सा सुविधा से वंचित नहीं किया, बल्कि उनकी पसंद के अस्पताल में उपचार की अनुमति दी। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि उनका स्वास्थ्य कैसा रहता है और NEET विवाद को लेकर सरकार तथा प्रदर्शनकारी पक्षों के बीच बातचीत और कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

फिलहाल, 21 जुलाई 2026 का यह घटनाक्रम केवल सोनम वांगचुक के अस्पताल बदलने की खबर नहीं है। यह एक ऐसे दौर की तस्वीर भी सामने रखता है जहां शिक्षा, परीक्षा की निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में इस विवाद का स्थायी समाधान केवल विरोध को नियंत्रित करने में नहीं, बल्कि छात्रों के भरोसे को मजबूत करने वाली पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था बनाने में होगा।

ये भी पढ़ें :- छात्रों के विरोध के बाद अब दिल्ली में किसानों का मोर्चा, हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर को किया सील

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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