Tuesday, 15 September 2026
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वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के नियमन की दिशा में भारत में अहम कदम

नई दिल्ली: भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के रेगुलेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति की सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड, 2025 पर की गई सिफारिशों में इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक वैधानिक और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जरूरत बताई गई है। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जब तक एक व्यापक रूपरेखा तैयार नहीं होती, तब तक नामित रेगुलेटर की निगरानी में मान्यता प्राप्त सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन्स के जरिए एक अंतरिम रेगुलेटरी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

डिजिटल एसेट इकोसिस्टम के लिए यह एक स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है। पहली बार किसी संसदीय समिति ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को भारत की व्यापक वित्तीय नियामक व्यवस्था के संदर्भ में देखा है और मौजूदा नियामक अंतर को दूर करने की दिशा में एक स्पष्ट रास्ता सुझाया है। समिति की सिफारिशों में इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और जिम्मेदार नवाचार, दोनों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को समझा गया है।

समिति की टिप्पणियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि प्रस्तावित सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड में सिक्योरिटीज की टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल परिभाषा रखी गई है। इसके बावजूद, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स की कई श्रेणियां इस परिभाषा के दायरे में नहीं आतीं, क्योंकि वे कानूनी रूप से सिक्योरिटीज या डेरिवेटिव्स की जरूरी विशेषताओं को पूरा नहीं करतीं। दूसरी ओर, इन एसेट्स का ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट के लिए इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और इनमें पारंपरिक इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स जैसी कई आर्थिक विशेषताएं दिखाई देती हैं।

यहीं एक नियामक गैप सामने आता है। जब किसी एसेट का इस्तेमाल इन्वेस्टमेंट के रूप में हो रहा हो, लेकिन उसके लिए व्यापक नियामक फ्रेमवर्क मौजूद न हो, तो मार्केट कंडक्ट, पारदर्शिता, कंज्यूमर प्रोटेक्शन और शिकायतों के समाधान जैसे सवाल उठते हैं। इन क्षेत्रों में स्पष्ट नियम होना इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस और पूरे सेक्टर के लंबे समय के विकास के लिए जरूरी है।

भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स का सेक्टर पूरी तरह रेगुलेशन से बाहर नहीं है। इस क्षेत्र पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और इनकम-टैक्स एक्ट के तहत महत्वपूर्ण दायित्व लागू हैं। पंजीकृत वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग, रिपोर्टिंग और टैक्स से जुड़े नियमों का पालन करते हैं। इससे इन क्षेत्रों में रेगुलेटरी निगरानी मजबूत हुई है।

हालांकि, मार्केट कंडक्ट, ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स, डिस्क्लोजर प्रैक्टिसेज, कंज्यूमर प्रोटेक्शन और डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अभी एक व्यापक फ्रेमवर्क की जरूरत है। इनका सीधा असर इन्वेस्टर्स के भरोसे और पूरे इकोसिस्टम के विकास पर पड़ता है।

ऐसे में मान्यता प्राप्त सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन्स के जरिए एक अंतरिम फ्रेमवर्क का सुझाव व्यावहारिक रास्ता दिखाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि उद्योग को पूरी तरह सेल्फ-रेगुलेशन के भरोसे छोड़ दिया जाए। इसके बजाय, मान्यता प्राप्त संस्थाएं स्पष्ट मानकों के तहत काम करें और नामित रेगुलेटर की निगरानी में रहें। इससे व्यापक वैधानिक फ्रेमवर्क तैयार होने तक प्रशासन, पारदर्शिता, डिस्क्लोजर और इन्वेस्टर प्रोटेक्शन के लिए जरूरी मानक विकसित किए जा सकते हैं।

यह सिफारिश व्यापक नीति के नजरिए से भी समयानुकूल है। रेगुलेटरी अनिश्चितता से डिजिटल एसेट्स की गतिविधियां खत्म नहीं होतीं। कई बार ऐसी गतिविधियां दूसरे देशों या ऐसे प्लेटफॉर्म की ओर चली जाती हैं जो घरेलू रेगुलेटरी दायरे से बाहर होते हैं। एक स्पष्ट और संतुलित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भारत में जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा दे सकता है, उपभोक्ता विश्वास मजबूत कर सकता है और उन कॉम्प्लायंट बिजनेस को बेहतर माहौल दे सकता है जो पहले से मौजूदा कानूनी और रेगुलेटरी दायित्वों का पालन कर रहे हैं।

भारत डिजिटल एसेट्स के इस्तेमाल और ब्लॉकचेन नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख बाजारों में उभरा है। अपनी जी20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने क्रिप्टो-एसेट रेगुलेशन पर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब इसी अनुभव के आधार पर एक संतुलित घरेलू रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भारत की स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

संसदीय स्थायी समिति ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से जुड़े अवसरों और रेगुलेटरी चुनौतियों, दोनों को पहचानते हुए आगे बढ़ने का एक रचनात्मक रास्ता सुझाया है। इसकी सिफारिशें आगे की नीति चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण संसदीय आधार देती हैं।

अब सरकार के सामने एक ऐसा संतुलित और फ्यूचर-रेडी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने का अवसर है, जो इन्वेस्टर प्रोटेक्शन को मजबूत करे, मार्केट इंटीग्रिटी बनाए रखे, जिम्मेदार इनोवेशन को बढ़ावा दे और भारत के डिजिटल एसेट्स इकोसिस्टम के सतत विकास का रास्ता खोले।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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