Monday, 13 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
ईरानी सिनेमा की 7 कालजयी फिल्में, जिन्होंने दुनिया को इंसानियत का नया नजरिया दिया टोकनयुक्त शेयर: क्रिप्टो और ब्लॉकचेन से बदलती निवेश की दुनिया, भारत के लिए आगे का रास्ता वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार सिंह ने पत्रकारिता में 30 वर्ष पूरे किए, सत्य और जनहित को बताया अपनी सबसे बड़ी प्रतिबद्धता Paper Bag Day 2026: कैसे एक मामूली-सा दिखने वाला बैग, पर्यावरण बचाने की बड़ी सोच का प्रतीक बन गया? Shraddha Walkar Murder Case: MA की परीक्षा के कारण टली आफताब की पेशी, 20 जुलाई को होनी थी सुनवाई Monaco Diamond League 2026: सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जम्पर बने विश्व जनसंख्या दिवस 2026: 8.3 अरब की दुनिया में सबसे बड़ा सवाल आबादी नहीं, बेहतर भविष्य है FIFA Golden Boot Race: मेसी, एम्बाप्पे, हालैंड या हैरी केन…जानिए इस बार किसके नाम होगी गोल्डन बूट? ईरानी सिनेमा की 7 कालजयी फिल्में, जिन्होंने दुनिया को इंसानियत का नया नजरिया दिया टोकनयुक्त शेयर: क्रिप्टो और ब्लॉकचेन से बदलती निवेश की दुनिया, भारत के लिए आगे का रास्ता वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार सिंह ने पत्रकारिता में 30 वर्ष पूरे किए, सत्य और जनहित को बताया अपनी सबसे बड़ी प्रतिबद्धता Paper Bag Day 2026: कैसे एक मामूली-सा दिखने वाला बैग, पर्यावरण बचाने की बड़ी सोच का प्रतीक बन गया? Shraddha Walkar Murder Case: MA की परीक्षा के कारण टली आफताब की पेशी, 20 जुलाई को होनी थी सुनवाई Monaco Diamond League 2026: सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जम्पर बने विश्व जनसंख्या दिवस 2026: 8.3 अरब की दुनिया में सबसे बड़ा सवाल आबादी नहीं, बेहतर भविष्य है FIFA Golden Boot Race: मेसी, एम्बाप्पे, हालैंड या हैरी केन…जानिए इस बार किसके नाम होगी गोल्डन बूट?

वैश्विक क्रिप्टो नियमों में तेजी, लेकिन खामियां उजागर; भारत की चुप्पी बढ़ा रही अनिश्चितता

वैश्विक संस्थाओं की ताज़ा रिपोर्टें दिखाती हैं कि क्रिप्टो नियम दुनिया भर में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन भारत की स्पष्ट नीति की कमी गंभीर चिंता बन गई है।

22 नवंबर 2025, नई दिल्ली

दुनिया भर में क्रिप्टो विनियमन को लेकर पिछले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण रहे। फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज कमीशन्स (IOSCO) की नई रिपोर्टों ने साफ दिखा दिया है कि क्रिप्टो नियमों को लेकर देशों की रफ्तार भले ही बढ़ रही हो, लेकिन दिशाहीनता, असमानता और कमजोर लागूकरण अब भी बड़े अवरोध बने हुए हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां कई देश तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं, वहीं भारत अब भी किसी व्यापक नियामकीय ढांचे के बिना खड़ा है—ऐसे समय में जब देश में 10 करोड़ से अधिक क्रिप्टो उपयोगकर्ता मौजूद हैं।

FSB की रिपोर्ट में भारत का नाम ‘नो फ्रेमवर्क’ सूची में

FSB द्वारा अक्टूबर में जारी ‘पीयर रिव्यू’ के अनुसार, सर्वे किए गए 29 देशों में केवल 11 देश ही पूर्ण क्रिप्टो नियम लागू कर पाए हैं।
स्टेबलकॉइन पर स्थिति और कमजोर है—करीब 290 अरब डॉलर के बढ़ते बाज़ार के बावजूद केवल 5 देशों में ही ठोस ढांचा है।

FSB ने भारत को उन छह देशों में रखा है जिनके पास अभी तक कोई नियामकीय फ्रेमवर्क नहीं है। इस सूची में चीन, कज़ाकिस्तान, लेबनान, मेक्सिको और सऊदी अरब भी शामिल हैं।

इसके साथ ही IOSCO की थीमैटिक समीक्षा में भारत का शामिल न होना और भी चौंकाने वाला है, जबकि देश दुनिया के सबसे बड़े रिटेल क्रिप्टो बाजारों में से एक है।

जिन देशों में नियम हैं, लागूकरण वहां भी एकसा नहीं

ऑस्ट्रेलिया, बरमूडा, हांगकांग, सिंगापुर और कनाडा जैसे देशों ने न केवल अपने क्रिप्टो नियम लागू किए हैं, बल्कि प्रवर्तन भी तेज किया है।
Binance, XT.com, CoinEx और अवैध क्रिप्टो ATM के खिलाफ हालिया कार्रवाई इसी का संकेत है।

इसके उलट भारत वर्तमान में केवल PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम तक सीमित है। कस्टडी, लाइसेंसिंग, मार्केट सुपरविजन और उपभोक्ता सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में अभी भी कोई परिभाषित ढांचा नहीं है।

नियमन की कमी से बढ़ी रेगुलेटरी आर्बिट्रेज़

भारत में नियमों की अनिश्चितता का फायदा उठाकर कई ऑफशोर प्लेटफॉर्म विदेशी लोकेशन से भारत के उपयोगकर्ताओं को सेवाएं दे रहे हैं।
इससे दो बड़े जोखिम सामने आते हैं—

  1. निगरानी कमजोर पड़ती है
  2. उपभोक्ता जोखिम कई गुना बढ़ जाता है

स्टेबलकॉइन पर सबसे बड़ी चेतावनी

FSB और IOSCO दोनों ने स्टेबलकॉइन की क्रॉस-बॉर्डर संरचना को गंभीर खतरा बताया है।
जब किसी एक स्टेबलकॉइन से जुड़ी संस्थाएं अलग-अलग देशों के अलग नियमों के तहत काम करती हैं, तो तनावपूर्ण स्थितियों में जोखिम सबसे कमजोर कड़ी पर केंद्रित हो जाता है।
IOSCO ने यह भी बताया कि स्टेबलकॉइन जारीकर्ता बड़ी मात्रा में अपनी पूंजी अल्पकालिक बॉन्ड और मनी-मार्केट फंड में रखते हैं, जिससे पारंपरिक वित्तीय बाजार और क्रिप्टो बाजार दोनों एक-दूसरे पर और अधिक निर्भर हो रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी कमजोर

IOSCO के मल्टीलेट्रल MMoU पर अधिकांश देशों ने हस्ताक्षर तो कर रखे हैं, लेकिन साल भर में केवल एक-दो बार ही जानकारी साझा करने का अनुरोध आता है—जो क्रॉस-बॉर्डर मॉनिटरिंग की गंभीर कमी दर्शाता है।
FSB ने भी स्वीकार किया है कि लीवरेज, लिक्विडिटी और जोखिम एकाग्रता पर मानकीकृत डेटा की कमी से निगरानी प्रभावित हो रही है।

FSB का स्टेजिंग मॉडल: भारत अब भी शुरुआती पायदान पर

FSB की स्टेज 5 सूची—बहामास, बरमूडा, यूरोपीय संघ, हांगकांग, इंडोनेशिया, जापान, नाइजीरिया, सिंगापुर, थाईलैंड और तुर्किये—उन देशों को शामिल करती है जिन्होंने वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए नियम पूरी तरह लागू कर दिए हैं।

इसके मुकाबले भारत अब भी स्टेज 1 पर है—

  • न कोई विधायी मसौदा
  • न कोई नियामकीय आदेश
  • और न ही किसी समयसीमा का संकेत

भारत के लिए जरूरी कदम—स्पष्ट, चरणबद्ध और मजबूत क्रिप्टो नीति

दोनों वैश्विक संस्थाओं का संदेश साफ है—स्पष्ट नियमन ही सुरक्षित और टिकाऊ डिजिटल एसेट बाजार की नींव है।
जहां नियम नहीं होते, वहां गतिविधियां देश से बाहर निकल जाती हैं और जोखिम बढ़ जाता है।

भारत के लिए अब यह अनिवार्य हो गया है कि वह चरणबद्ध तरीके से एक व्यापक और अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल खाती नीति तैयार करे।
एक मजबूत और पारदर्शी नियम पुस्तक न केवल उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि भारत को एक विश्वसनीय डिजिटल एसेट हब के रूप में स्थापित करने का रास्ता भी तैयार करेगी और RBI के वित्तीय स्थिरता लक्ष्यों को मजबूत करेगी।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।