Wednesday, 21 October 2026
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वैश्विक नियमों के तहत स्टेबलकॉइन

अमेरिका से चीन तक, स्टेबलकॉइन पर सख़्त होता सरकारी रुख

नई दिल्ली: अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि स्टेबलकॉइन क्रिप्टो बाज़ार का हाशिये का हिस्सा नहीं रहे। 2023 से 2025 के बीच उनका वैश्विक आकार 120 अरब डॉलर से बढ़कर 300 अरब डॉलर से ऊपर चला गया है।

इसी कारण वैश्विक संस्थानों की चेतावनियाँ भी एक जैसी रही हैं। BIS, IMF, फ़ाइनेंशियल स्टैबिलिटी बोर्ड (FSB) और FATF जैसे निकायों ने स्पष्ट कहा है कि यदि स्टेबलकॉइन बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बढ़ते रहे, तो वे मौद्रिक नीति को कमजोर कर सकते हैं, भुगतान प्रणालियों को खंडित कर सकते हैं और वित्तीय तनाव को बढ़ा सकते हैं। इसलिए अलग-अलग देशों और राजनीतिक प्रणालियों में नियामकीय प्रतिक्रिया एक सरल सिद्धांत पर आकर ठहरी है—जिन जोखिमों का स्वरूप समान है, उन्हें समान नियमों से नियंत्रित किया जाना चाहिए।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2025 के GENIUS एक्ट के ज़रिए इसी दिशा में निर्णायक क़दम उठाया। यह स्टेबलकॉइन पर उसका पहला व्यापक क़ानून है। इसका संदेश साफ़ है—केवल बीमाकृत बैंक और संघीय रूप से अधिकृत संस्थाएँ ही भुगतान-आधारित स्टेबलकॉइन जारी कर सकती हैं। इन स्टेबलकॉइन को नक़द या अल्पकालिक ट्रेज़री प्रतिभूतियों से एक-के-बदले-एक अनुपात में पूरी तरह समर्थित होना होगा और वे लेखा-परीक्षण, रिडेम्पशन गारंटी तथा मनी-लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों के अधीन रहेंगे। सबसे अहम बात यह है कि यह क़ानून स्टेबलकॉइन को सिर्फ़ एक तकनीकी उत्पाद मानने की सोच से आगे बढ़ता है और उन्हें उनके वास्तविक रूप में देखता है—ऐसे भुगतान उपकरण जिनका प्रणालीगत प्रभाव पड़ता है।

यूरोप ने इससे भी अधिक सख़्त रुख अपनाया है। यूरोपीय यूनियन का क्रिप्टो परिसंपत्ति बाज़ार (MiCA) ढाँचा, जो अब पूरी तरह लागू है, स्टेबलकॉइन को सीधे वित्तीय नियमन के दायरे में लाता है। उन्हें एसेट-रेफ़रेंस्ड या ई-मनी टोकन के रूप में वर्गीकृत कर, उनके जारीकर्ताओं पर लाइसेंस, कड़े रिज़र्व नियम और निरंतर निगरानी अनिवार्य की गई है। जो बड़े स्टेबलकॉइन प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकते हैं, उन पर अतिरिक्त सीमाएँ भी लागू हैं। यूरोप का संकेत स्पष्ट है—नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन उपभोक्ता संरक्षण और मौद्रिक स्थिरता की क़ीमत पर नहीं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का डिजिटल यूरो पर समानांतर काम एक गहरी सच्चाई को रेखांकित करता है—राज्य भविष्य की मुद्रा को पूरी तरह निजी हाथों में छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

चीन का रास्ता अलग है, लेकिन चिंता वही है। उसकी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा—ई-CNY—अब उन्नत चरण में पहुँच चुकी है। 2023 के बाद से इसके लेन-देन का आकार 800 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है और कुल उपयोग 2.3 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है। अपनाने को बढ़ाने के लिए चीन देश के भीतर ब्याज-आधारित और स्टेबलकॉइन-जैसी विशेषताओं के प्रयोग कर रहा है, जबकि प्रोजेक्ट एम-ब्रिज जैसे मंचों के ज़रिए सीमा-पार उपयोग को आगे बढ़ाया जा रहा है। ये प्रयास दिखाते हैं कि बीजिंग डिजिटल युआन को घरेलू भुगतान और अंतरराष्ट्रीय निपटान—दोनों में मज़बूती से स्थापित करना चाहता है।

एशिया के अन्य वित्तीय केंद्रों ने सतर्क समावेशन का रास्ता चुना है। जापान अपने भुगतान क़ानून के तहत केवल बैंक-लिंक्ड स्टेबलकॉइन की अनुमति देता है। सिंगापुर ने “मौद्रिक प्राधिकरण-नियंत्रित स्टेबलकॉइन” का एक वैकल्पिक लेबल पेश किया है, जिसके साथ रिज़र्व, पारदर्शिता और गवर्नेंस पर बेहद कड़े मानक जुड़े हैं। दोनों देशों का मानना है कि स्टेबलकॉइन दक्षता बढ़ा सकते हैं—लेकिन तभी, जब वे मौजूदा वित्तीय ढाँचे के भीतर काम करें।

हांगकांग का 2025 का स्टेबलकॉइन अध्यादेश भी इसी क्षेत्रीय रुझान में फिट बैठता है। सभी फ़िएट-समर्थित स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर, यह खुली-छूट वाले प्रयोगों से संरचित निगरानी की ओर स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है।

खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात ने सबसे स्पष्ट नियामकीय रेखा खींची है। घरेलू उपयोग के लिए केवल दिरहम-समर्थित स्टेबलकॉइन की अनुमति है, जिससे विदेशी मुद्रा-पेग्ड कॉइन स्थानीय भुगतान प्रणालियों से बाहर हो जाते हैं। लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कई हिस्सों में दृष्टिकोण को व्यापक आर्थिक अस्थिरता आकार देती है। ब्राज़ील ने स्टेबलकॉइन ट्रांसफ़र पर रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ और विदेशी मुद्रा नियंत्रण लागू किए हैं, यह मानते हुए कि वे पूंजी प्रवाह और अनौपचारिक डॉलरकरण में बढ़ती भूमिका निभा रहे हैं। नाइजीरिया और कई अन्य देश अभी भी सतर्क हैं—वे निजी स्टेबलकॉइन की बजाय केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा या कड़े निगरानी वाले मध्यस्थों को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि घरेलू मुद्राओं को कमजोर होने से बचाया जा सके।

इन सभी राष्ट्रीय नीतियों को जो बात जोड़ती है, वह है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असामान्य रूप से मज़बूत समन्वय। FSB की वैश्विक सिफ़ारिशें, IMF की अस्थिर पूंजी प्रवाह पर चेतावनियाँ और BIS की स्टेबलकॉइन की नाज़ुकता पर बार-बार की गई टिप्पणियाँ—ये सभी सीधे घरेलू क़ानूनों में झलकती हैं। FATF का यात्रा नियम यह भी सुनिश्चित करता है कि स्टेबलकॉइन लेन-देन अब मनी-लॉन्ड्रिंग विरोधी निगरानी से बाहर नहीं रह सकते।

इस दौर की सबसे उल्लेखनीय बात नियामकीय बिखराव नहीं, बल्कि एकरूपता है। अलग-अलग क्षेत्रों में सरकारें तीन शर्तों पर सहमत होती दिख रही हैं—पूर्ण रिज़र्व समर्थन, लाइसेंस और निगरानी, तथा लागू करने योग्य रिडेम्पशन अधिकार। स्टेबलकॉइन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है। उन्हें वित्तीय प्रणाली में शामिल किया जा रहा है—लेकिन पूरी तरह राज्य की शर्तों पर।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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