कलाई की चोट से वापसी के बाद कार्लोस अल्कराज ने जापान ओपन का खिताब जीता, लेकिन शंघाई मास्टर्स में जिजू बर्ग्स से हार गए। इस नतीजे ने उनके खिताबी अभियान को रोक दिया और सीजन की नंबर-1 रैंकिंग की दौड़ को प्रभावित किया।
शंघाई, चीन: टेनिस जगत में सोमवार, 12 अक्टूबर को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब बेल्जियम के खिलाड़ी जिजू बर्ग्स ने स्पेन के स्टार टेनिस खिलाड़ी और सात बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन कार्लोस अल्कराज को शंघाई मास्टर्स के तीसरे दौर में हरा दिया।
गैरवरीयता प्राप्त बर्ग्स ने दूसरे वरीय अल्कराज को सीधे सेटों में 7-5, 7-6(4) से मात दी। करीब दो घंटे और दो मिनट तक चले मुकाबले में अल्कराज अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते नजर आए। इस हार के साथ उनका टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।
यह परिणाम इसलिए भी अहम रहा, क्योंकि अल्कराज हाल ही में जापान ओपन का खिताब बचाकर शंघाई पहुंचे थे। कलाई में चोट के चलते करीब पांच महीने तक टेनिस कोर्ट से दूर रहने के बाद उन्होंने वापसी की थी। एशियाई दौरे के दौरान उनके खेल में भी सुधार नजर आने लगा था, लेकिन शंघाई में शुरुआती दौर में ही हार का सामना करना उनके लिए झटका साबित हुआ।
दूसरी ओर, बर्ग्स के लिए यह जीत उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल अल्कराज को हराकर अगले दौर में जगह बनाने की अपनी चुनौती पूरी की। इस नतीजे का असर एटीपी सीजन के अंत की विश्व नंबर-1 रैंकिंग की दौड़ पर भी पड़ा।
पहले सेट में बर्ग्स ने अल्कराज पर बनाया दबाव
मुकाबले की शुरुआत से ही बर्ग्स ने अल्कराज को सहज होकर खेलने का मौका नहीं दिया। स्पेनिश खिलाड़ी अपनी सामान्य आक्रामक शैली और सटीक शॉट्स के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस मैच में उन्हें लगातार अपनी लय तलाशनी पड़ी। बर्ग्स ने अहम मौकों पर संयम बनाए रखा और पहले सेट में अल्कराज की गलतियों का फायदा उठाया।
पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। बर्ग्स ने निर्णायक पलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7-5 से सेट अपने नाम कर लिया। इस बढ़त के बाद बर्ग्स का आत्मविश्वास बढ़ा, वहीं अल्कराज के सामने दूसरे सेट में वापसी करने की चुनौती और कठिन हो गई।
अल्कराज के लिए परेशानी सिर्फ प्रतिद्वंद्वी के शॉट्स तक सीमित नहीं थी। मैच के दौरान वह कोर्ट पर गेंद के उछाल और खेल की परिस्थितियों से भी असहज दिखाई दिए।
टाईब्रेक में भी नहीं कर पाए वापसी
पहला सेट गंवाने के बाद अल्कराज के सामने मैच में बने रहने के लिए दूसरा सेट जीतना जरूरी था। उन्होंने मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन बर्ग्स ने अपना दबाव बनाए रखा। दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला टाईब्रेक तक पहुंच गया।
टाईब्रेक में बर्ग्स ने ज्यादा प्रभावी खेल दिखाया और 7-4 से जीत दर्ज की। इसके साथ ही उन्होंने दूसरा सेट 7-6(4) से अपने नाम करते हुए मैच भी जीत लिया। दो सेटों में मिली इस जीत ने अल्कराज के अभियान का अंत कर दिया।
बर्ग्स ने अल्कराज को तीसरे सेट तक मैच खींचने का अवसर नहीं दिया। शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ किसी बड़े टूर्नामेंट में जीत हासिल करने के लिए निर्णायक क्षणों का फायदा उठाना बेहद अहम होता है। बर्ग्स ने यही किया और टाईब्रेक में अपनी बढ़त को जीत में बदल दिया।
अल्कराज के लिए यह हार इसलिए भी निराशाजनक थी, क्योंकि वह टूर्नामेंट में खिताब जीतने की उम्मीद के साथ उतरे थे। शंघाई उन एटीपी मास्टर्स 1000 प्रतियोगिताओं में शामिल है, जहां वह अब तक खिताब नहीं जीत सके हैं। इस बार भी उनकी यह तलाश अधूरी रह गई।
कौन हैं जिजू बर्ग्स?
जिजू बर्ग्स बेल्जियम के पेशेवर टेनिस खिलाड़ी हैं। 12 अक्टूबर को खेले गए मुकाबले से पहले उनकी एटीपी एकल रैंकिंग 39 थी, जबकि अल्कराज तीसरे स्थान पर थे। दोनों खिलाड़ियों के बीच रैंकिंग का यह अंतर मुकाबले को और भी उल्लेखनीय बनाता है।
बर्ग्स ने शंघाई मास्टर्स में इस जीत से पहले भी अच्छा प्रदर्शन किया था। 2025 में वह इस प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे, जहां उन्हें सर्बिया के दिग्गज खिलाड़ी नोवाक जोकोविच से हार का सामना करना पड़ा था। पिछले साल के प्रदर्शन ने उन्हें शंघाई की परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिया था।
2026 के टूर्नामेंट में बर्ग्स ने शुरुआती मुकाबलों में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले दौर में विट कोप्रिवा को 6-3, 6-1 से हराया और दूसरे दौर में इग्नासियो बुसे को 6-0, 6-3 से मात दी। इसके बाद अल्कराज पर मिली जीत ने उनके अभियान को और खास बना दिया।
अल्कराज जैसे खिलाड़ी को हराना किसी भी उभरते या मध्यम रैंकिंग वाले खिलाड़ी के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला परिणाम हो सकता है।
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चोट से वापसी के बाद अल्कराज की चुनौती
अल्कराज की शंघाई में हार को समझने के लिए उनकी हालिया चोट और वापसी पर भी नजर डालना जरूरी है। कलाई की चोट के कारण वह 2026 के सीजन में लगभग साढ़े चार से पांच महीने तक टेनिस से दूर रहे। अगस्त के आखिर में US Open के दौरान उन्होंने वापसी की और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे, जहां उन्हें अमेरिकी खिलाड़ी बेन शेल्टन से हार मिली।
लंबे समय तक खेल से बाहर रहने के बाद किसी खिलाड़ी के लिए अपनी पुरानी लय हासिल करना आसान नहीं होता। चोट से उबरने के साथ-साथ उसे मैच फिटनेस, शॉट्स की सटीकता और लगातार मुकाबले खेलने की क्षमता पर भी काम करना पड़ता है। अल्कराज के लिए भी वापसी के बाद का दौर इसी प्रक्रिया का हिस्सा रहा।
जापान ओपन में उन्होंने अपनी फॉर्म में सुधार के संकेत दिए। 6 अक्टूबर को खेले गए फाइनल में अल्कराज ने चेक गणराज्य के जिरी लेहेका को 7-6(4), 6-4 से हराकर खिताब बरकरार रखा था। यह उनके करियर का 27वां एटीपी खिताब था। इसके बाद वह शंघाई पहुंचे, जहां उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी।
शंघाई मास्टर्स में खिताब का इंतजार बरकरार
शंघाई मास्टर्स एटीपी टूर की प्रतिष्ठित मास्टर्स 1000 प्रतियोगिताओं में से एक है। इसमें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने से उनकी रैंकिंग तथा सीजन के अंत की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
अल्कराज के लिए यह प्रतियोगिता इसलिए भी खास थी, क्योंकि वह अब तक शंघाई में पुरुष एकल का खिताब नहीं जीत पाए थे। टूर्नामेंट से पहले उनका लक्ष्य इस बार ट्रॉफी हासिल करना था। वह ऐसा करने वाले पहले स्पेनिश पुरुष खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन बर्ग्स के खिलाफ हार ने उनकी यह उम्मीद खत्म कर दी।
शंघाई में अल्कराज की हार अकेला बड़ा उलटफेर नहीं थी। टूर्नामेंट में कई अन्य प्रमुख खिलाड़ियों को भी शुरुआती दौर में बाहर होना पड़ा। 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच और अमेरिकी खिलाड़ी बेन शेल्टन भी प्रतियोगिता से बाहर हो चुके थे। शेल्टन को फ्रांस के आर्थर गिया ने सीधे सेटों में हराया था।
अलेक्जेंडर ज्वेरेव को मिला फायदा
अल्कराज की हार का एक बड़ा असर एटीपी सीजन के अंत की विश्व नंबर-1 रैंकिंग की दौड़ पर भी पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इस नतीजे ने जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए सीजन का अंत विश्व नंबर-1 खिलाड़ी के रूप में करना सुनिश्चित कर दिया। इस उपलब्धि के साथ वह ऐसा करने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बनेंगे।
ज्वेरेव 2026 में फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन के चैंपियन रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब इटली के जैनिक सिनर चोट के कारण लंबे समय से प्रतिस्पर्धी टेनिस से दूर हैं। सिनर ने 12 जुलाई को विंबलडन फाइनल में ज्वेरेव को हराया था, लेकिन इसके बाद घुटने की चोट के कारण वह कई अहम प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सके।

साल के अंत में विश्व नंबर-1 की स्थिति पूरे सीजन में खिलाड़ियों के प्रदर्शन और रैंकिंग अंकों पर आधारित होती है। यह किसी एक टूर्नामेंट का खिताब जीतने से तय नहीं होती। ऐसे में ज्वेरेव के लिए यह उपलब्धि पूरे सीजन में उनकी निरंतरता और प्रमुख प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन का परिणाम है।
बर्ग्स के सामने अगली बड़ी चुनौती
बर्ग्स की जीत ने शंघाई मास्टर्स में उनके अभियान को नई दिशा दी है। अब उनके सामने अगले दौर में आगे बढ़ने की चुनौती होगी, जहां उन्हें फिर एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले साल क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने का अनुभव उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन इस बार उससे आगे जाने के लिए उन्हें लगातार अच्छा खेल दिखाना होगा।
वहीं, अल्कराज के लिए अब ध्यान चोट से वापसी के बाद अपनी लय बनाए रखने और आने वाली प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने पर होगा। जापान ओपन का खिताब जीतने के बाद शंघाई में मिली हार यह बताती है कि शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। एक अच्छा सप्ताह अगले टूर्नामेंट में सफलता की गारंटी नहीं देता।
शंघाई मास्टर्स में 12 अक्टूबर का यह मुकाबला दो अलग-अलग कहानियों के साथ याद किया जाएगा। अल्कराज को जहां खिताब की उम्मीद छोड़नी पड़ी, वहीं बर्ग्स ने एक बड़ी जीत दर्ज कर टूर्नामेंट में अपनी दावेदारी मजबूत की। इसके साथ ही ज्वेरेव के साल के अंत में विश्व नंबर-1 बनने का रास्ता भी साफ हो गया।

