कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, जिन्हें राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया गया है? जानिए उनके सैन्य करियर, ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका और नई जिम्मेदारी से जुड़ी खास बातें।
अयोध्या/नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को एक बड़ा बदलाव हुआ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक का लंबा करियर रखने वाले मिश्रा ने पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट का ध्यान अब सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार, वित्तीय निगरानी और अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे काम अब स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। ऐसे में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासन को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पहली बार मंदिर ट्रस्ट को मिलेगा पूर्णकालिक CEO
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन राम जन्मभूमि परिसर में मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े प्रबंधन की देखरेख के लिए किया गया था। अब तक ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी ही मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और संचालन संबंधी मामलों को देखते रहे हैं।
लेकिन मंदिर निर्माण के आगे बढ़ने और अयोध्या में श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ एक समर्पित कार्यकारी पद की जरूरत महसूस की गई।
इसी जरूरत को देखते हुए ट्रस्ट ने पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का फैसला किया। इस पद के लिए देशभर से हजारों आवेदन आए। आखिरकार कई चरणों की चयन प्रक्रिया के बाद तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा गया और बुधवार को जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम फैसला लिया गया।
5,585 आवेदनों से जितेंद्र मिश्रा तक पहुंची चयन प्रक्रिया
राम मंदिर के सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया अपने आप में काफी व्यापक रही। ट्रस्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने देशभर से आए 5,585 आवेदनों की जांच की।
कमेटी में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी के श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व प्रमुख सुरेश हावरे शामिल थे।
चयन प्रक्रिया को कई स्तरों में बांटा गया था। आवेदन मिलने के बाद उम्मीदवारों के अनुभव, प्रबंधन क्षमता, बड़े स्तर के कार्यक्रमों और कर्मचारियों को संभालने की क्षमता, भाषाई दक्षता, तकनीकी समझ तथा भविष्य की रणनीति जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।
सर्च कमेटी ने बताया कि प्रक्रिया में AI आधारित स्क्रीनिंग और मैनुअल मूल्यांकन, दोनों का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद उम्मीदवारों की संख्या लगातार कम की गई। करीब 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन बातचीत के लिए चुना गया, जिसके बाद 16 उम्मीदवारों को आमने-सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। ये इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में हुए। इसके बाद कमेटी ने तीन नामों का अंतिम पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपा।
इस प्रक्रिया में रक्षा, प्रशासन, कॉरपोरेट, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी सहित अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को शामिल किया गया था। यानी ट्रस्ट सिर्फ धार्मिक या प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े संस्थानों को संचालित करने का अनुभव रखने वाले पेशेवरों को भी विकल्प के तौर पर देखा गया।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी फाइटर पायलट और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रहे हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन प्राप्त किया था। करीब 38 वर्षों के सैन्य करियर के बाद वह मई 2026 में वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए।
मिश्रा ने अपने करियर में फाइटर कॉम्बेट लीडर और टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के विमानों पर उड़ान भरी और 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव हासिल किया। सैन्य प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने भारत के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के प्रमुख रक्षा संस्थानों में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, अमेरिका और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, ब्रिटेन से जुड़े रहे हैं।

उनका सैन्य करियर केवल उड़ान और कमांड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने संगठनात्मक प्रबंधन, प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और बड़े स्तर के सैन्य अभियानों से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभालीं।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति की सबसे ज्यादा चर्चा उनके ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े सैन्य अनुभव को लेकर हो रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। यह कमांड भारत के पश्चिमी क्षेत्र की हवाई सुरक्षा और पाकिस्तान की ओर से संभावित सैन्य खतरे से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (Sarvottam Yudh Seva Medal) से सम्मानित किया गया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे सैन्य सम्मान भी मिले हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट के लिए उनका यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मंदिर परिसर अब एक ऐसे चरण में है जहां रोजाना बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही होती है और आने वाले समय में इसके और बढ़ने की संभावना है।
हालांकि मंदिर का संचालन सैन्य अभियान से पूरी तरह अलग क्षेत्र है, लेकिन बड़े संगठन का प्रबंधन, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, संकट की स्थिति में निर्णय लेना और अनुशासित तरीके से व्यवस्था चलाना उनके सैन्य अनुभव से जुड़े ऐसे पहलू हैं जिन्हें ट्रस्ट उपयोगी मान सकता है।
CEO बनते ही जितेंद्र मिश्रा के सामने बड़ी जिम्मेदारियां
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर का स्वरूप एक निर्माण परियोजना से आगे बढ़कर एक बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। इसलिए CEO के सामने कई स्तर की जिम्मेदारियां होंगी।
सबसे पहली चुनौती मंदिर के रोजमर्रा के संचालन को व्यवस्थित करने की होगी। इसमें श्रद्धालुओं की आवाजाही, दर्शन और प्रवेश व्यवस्था, कर्मचारियों का प्रबंधन, सुविधाओं की निगरानी और मंदिर परिसर से जुड़े अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय शामिल है।
इसके साथ ही सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। अयोध्या में राम मंदिर राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर ट्रस्ट, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना भी सीईओ की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हो सकता है।
इसके अलावा वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। मंदिर को देश और विदेश से श्रद्धालुओं की ओर से बड़ी मात्रा में दान मिलता है। इसलिए दान के संग्रह, गिनती, बैंकिंग, लेखांकन और ऑडिट से जुड़े सिस्टम को मजबूत करना ट्रस्ट की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
चंदा चोरी विवाद के बीच नियुक्ति के मायने
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित हेराफेरी को लेकर विवाद सामने आया था।
जून 2026 में इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने FIR दर्ज की थी और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। SIT की शुरुआती जांच के आधार पर कार्रवाई हुई थी। पुलिस ने जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी दी थी।
विवाद के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। इस घटनाक्रम ने मंदिर में आने वाले दान और उसकी निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
ऐसे माहौल में CEO की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक विस्तार के रूप में नहीं देखा जा रहा। इससे वित्तीय निगरानी, आंतरिक नियंत्रण और जवाबदेही की व्यवस्था को अधिक संस्थागत बनाने की उम्मीद भी जुड़ी है।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव के नाम शामिल हैं।

मदन मोहन पांडेय अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और राम जन्मभूमि से जुड़े मुकदमों में स्थानीय स्तर पर पैरवी कर चुके हैं। महेश भागचंदका दिल्ली से हैं और अशोक सिंघल फाउंडेशन से जुड़े रहे हैं। वहीं निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं।
इन नियुक्तियों के पीछे ट्रस्ट की संरचना को मजबूत करने का उद्देश्य भी देखा जा रहा है। ट्रस्ट में कुछ पद इस्तीफों और एक सदस्य की मृत्यु के बाद खाली हुए थे। तीन नए सदस्यों के आने से उन रिक्तियों को भरा गया है।
राम मंदिर प्रशासन के लिए नई शुरुआत
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह राम मंदिर प्रशासन में एक नए मॉडल की शुरुआत है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष कार्यकारी पद पर लाना यह बताता है कि ट्रस्ट अब बड़े पैमाने के संस्थागत प्रबंधन के लिए पेशेवर नेतृत्व पर जोर दे रहा है।
हालांकि यह बात भी स्पष्ट है कि सीईओ की नियुक्ति अपने आप में सभी प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान नहीं है। असली परीक्षा इस बात की होगी कि नई व्यवस्था मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता को किस हद तक बेहतर बनाती है।
आने वाले समय में अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना के बीच राम मंदिर का प्रबंधन पहले से कहीं अधिक जटिल होने वाला है। ऐसे में करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जितेंद्र मिश्रा के सामने एक ऐसी संस्था को संभालने की चुनौती होगी जिसका धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व असाधारण है।
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