Thursday, 16 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
ICC ने बदली World Cup की तस्वीर, 2027 वनडे और 2028 टी20 विश्व कप के लिए लागू हुए नए फॉर्मेट और नियम NEET घोटाला: इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में INNOVATIVEVIEW की भूमिका पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज 18वें दिन भी जारी है सोनम वांगचुक का अनशन, इस बीच जानिए दुनिया के 7 सबसे लंबे अनशन और उनके कारण Expiry Date बदलकर आपकी रसोई तक पहुंच रहा ज़हर? दिल्ली के ओखला से सामने आए फूड रैकेट ने बढ़ाई चिंता 1976 Chowchilla Bus Kidnapping: जब फिरौती के लिए रची गई 26 बच्चों को जिंदा दफनाने की साजिश E20 पेट्रोल: देश के लिए हरित भविष्य या वाहन मालिकों के लिए नई चुनौती? आखिर क्यों छिड़ी है एथेनॉल पर इतनी बड़ी बहस रेफरी पर भड़के फ्रांस के मैनेजर डिडिएर डेशॉम्प्स, सेमीफाइनल में मिली हार के बाद उठाए गंभीर सवाल GOFTE के नेतृत्व में दिल्ली में तकनीकी शिक्षा कर्मचारियों का शांतिपूर्ण पैदल मार्च ICC ने बदली World Cup की तस्वीर, 2027 वनडे और 2028 टी20 विश्व कप के लिए लागू हुए नए फॉर्मेट और नियम NEET घोटाला: इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में INNOVATIVEVIEW की भूमिका पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज 18वें दिन भी जारी है सोनम वांगचुक का अनशन, इस बीच जानिए दुनिया के 7 सबसे लंबे अनशन और उनके कारण Expiry Date बदलकर आपकी रसोई तक पहुंच रहा ज़हर? दिल्ली के ओखला से सामने आए फूड रैकेट ने बढ़ाई चिंता 1976 Chowchilla Bus Kidnapping: जब फिरौती के लिए रची गई 26 बच्चों को जिंदा दफनाने की साजिश E20 पेट्रोल: देश के लिए हरित भविष्य या वाहन मालिकों के लिए नई चुनौती? आखिर क्यों छिड़ी है एथेनॉल पर इतनी बड़ी बहस रेफरी पर भड़के फ्रांस के मैनेजर डिडिएर डेशॉम्प्स, सेमीफाइनल में मिली हार के बाद उठाए गंभीर सवाल GOFTE के नेतृत्व में दिल्ली में तकनीकी शिक्षा कर्मचारियों का शांतिपूर्ण पैदल मार्च

दिल्ली पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष पारुल सिंह ने दिल्ली वाईडब्ल्यूसीए द्वारा आयोजित राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भाग लिया।

कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकार, संघर्ष और सुधार पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही दिव्यांग महिलाओं सहित सभी महिलाओं के लिए समावेशिता और समान अवसर सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली वाईडब्ल्यूसीए ने “अधिकार, प्रतिरोध और सुधार” विषय पर एक सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन भारत की सुप्रसिद्ध कवयित्री, स्वतंत्रता सेनानी और “भारत कोकिला” सरोजिनी नायडू की जयंती के उपलक्ष्य में कॉन्स्टेंटिया हॉल, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। पीएएसआई के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रही, जहां महिला अधिकार, जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन पर गहन चर्चा हुई।

मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली पैरालंपिक समिति (जिसे दिल्ली की दिव्यांग पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन भी कहा जाता है) की अध्यक्ष श्रीमती पारुल सिंह ने समावेशिता और दृढ़ता के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं, खासकर दिव्यांग महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने में सुधारों की भूमिका बहुत अहम है। उन्होंने कहा, “सच्चा सशक्तिकरण तब शुरू होता है जब हम केवल बातों से नहीं, बल्कि ठोस और समावेशी नीतियों के जरिए बाधाओं को तोड़ते हैं और असमानता के खिलाफ मजबूती से खड़े होते हैं। सरोजिनी नायडू की विरासत को सम्मान देते हुए हमें ऐसे सुधारों के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए जो हर महिला को आगे बढ़ाएं और अधिकार व न्याय की राह में किसी को पीछे न छोड़ें।”

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा रही। इसमें डॉ. दिव्या तंवर, सुश्री निर्मला और एडवोकेट सुश्री नेहा सलूजा जैसे विशेषज्ञ शामिल थे। पैनल में लिंग समानता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के खिलाफ संघर्ष और प्रभावी सुधारों के रास्तों पर गंभीर चर्चा हुई। इस बातचीत ने उपस्थित लोगों को सोचने और खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिया।

महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा की समर्थक डॉ. दिव्या तंवर ने कहा, “अधिकार किसी को दिए नहीं जाते, उन्हें सामूहिक संघर्ष से हासिल किया जाता है। इस राष्ट्रीय महिला दिवस पर हमें हाशिए पर खड़ी महिलाओं की आवाज को और मजबूत बनाना चाहिए, ताकि विचार से आगे बढ़कर ठोस बदलाव लाया जा सके और एक बेहतर समाज का निर्माण हो।”

समाज सेवा में सक्रिय सुश्री निर्मला ने कहा, “संघर्ष ही सुधार की शुरुआत है। सरोजिनी नायडू के काव्यात्मक विद्रोह से लेकर आज के जमीनी आंदोलनों तक, महिलाओं ने हमेशा नेतृत्व किया है। हमें इसी भावना के साथ ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां हर महिला के अधिकार सुरक्षित और मजबूत हों।”

लिंग न्याय की विशेषज्ञ एडवोकेट सुश्री नेहा सलूजा ने कहा, “कानूनी सुधार स्थायी बदलाव की नींव हैं, लेकिन वे तभी सफल होते हैं जब समाज भी पुरानी सोच और रूढ़ियों के खिलाफ खड़ा हो। यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि महिलाओं के अधिकार ही मानवाधिकार हैं—जिन्हें संघर्ष से हासिल किया जाता है और पूरी दृढ़ता से सुरक्षित रखा जाता है।”

चर्चा के साथ-साथ कार्यक्रम में महिलाओं के इतिहास और वर्तमान मुद्दों पर आधारित एक रोचक क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसके अलावा एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें सशक्तिकरण, संघर्ष और सफलता की कहानियों को जीवंत रूप से दिखाया गया। ये सभी गतिविधियां न केवल जानकारी बढ़ाने वाली रहीं, बल्कि लोगों को सामाजिक बदलाव के लिए सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित भी करती रहीं।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।