पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद इमरान खान को 48 घंटे के भीतर अस्पताल ले जाने का आदेश दिया है। मेडिकल बोर्ड उनकी सेहत की निगरानी करेगा और परिवार से मुलाकात भी होगी।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान को लेकर मंगलवार, 18 अगस्त को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि जेल में बंद इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने उनके स्वास्थ्य की जांच और इलाज के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन के भी निर्देश दिए है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है जब इमरान खान की सेहत को लेकर उनके परिवार, वकीलों और पीटीआई की ओर से लगातार चिंता जताई जा रही थी। उनके स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्टों में रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और तनाव जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया था। अदालत ने उनके इलाज में विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल करने और परिवार से मुलाकात की सुविधा देने के निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को इमरान खान की अस्पताल में इलाज कराने की मांग पर सुनवाई की। अदालत ने उन्हें 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें कम से कम 16 सितंबर तक अस्पताल में रखा जाना है, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।

अदालत ने इमरान खान की सेहत की निगरानी के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने को भी कहा है। इस बोर्ड में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ इमरान खान के निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान और उनकी बहन डॉ. उजमा खान को भी शामिल किया जाएगा। इससे उनके परिवार और निजी डॉक्टरों को उनकी चिकित्सा स्थिति की जानकारी रखने का अवसर मिलेगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अस्पताल में इलाज के दौरान इमरान खान के परिवार को उनसे मिलने की अनुमति दी जाए। उनके विदेश में रहने वाले बेटों से फोन पर बात करने की सुविधा भी दी जाएगी।
क्यों पड़ी इमरान खान को अस्पताल भेजने की जरूरत?
इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार सवाल उठ रहे थे। उनकी पार्टी और परिवार का कहना था कि जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत खराब हुई है और उन्हें जेल के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज की जरूरत है।
अदियाला जेल के अधीक्षक ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया गया कि 10 अगस्त को एक कार्डियक बोर्ड ने उनकी जांच की थी। रिपोर्ट में रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और परिवार से सीमित संपर्क के कारण चिंता या तनाव का जिक्र किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की ओर से पेश अधिकारी से स्वास्थ्य रिपोर्ट को लेकर सवाल किए। अल जजीरा के अनुसार, अदालत ने कहा कि इमरान खान की नाड़ी और हृदय की स्थिति सामान्य नहीं थी और उनके कुछ महत्वपूर्ण अंगों पर भी असर पड़ना शुरू हो गया था।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से पहले यह कहा जाता रहा है कि इमरान खान को जेल में उपलब्ध बेहतर चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और उनकी स्थिति ऐसी नहीं है जैसी पीटीआई की ओर से बताई जा रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी कहा था कि इमरान को उपलब्ध सबसे अच्छी चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।
आंखों की रोशनी को लेकर भी चिंता
इमरान खान की सेहत को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उनकी आंखों की स्थिति को लेकर हुई है। उनके बेटों और वकीलों ने पहले दावा किया था कि जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है। पीटीआई लगातार उनकी आंखों और सामान्य स्वास्थ्य की स्वतंत्र डॉक्टरों से जांच कराने की मांग करती रही है।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में चिंता, दिल की धड़कन से जुड़ी परेशानी और उच्च रक्तचाप जैसे मुद्दे सामने आए हैं। अल्वी ने इमरान को अस्पताल ले जाकर स्वतंत्र डॉक्टरों की निगरानी में इलाज कराने की मांग की थी।
हालांकि, इमरान खान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके वकीलों और परिवार को मेडिकल रिपोर्ट मीडिया के साथ साझा नहीं करने और इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देने के निर्देश जारी किये हैं।
अस्पताल में परिवार से मिल सकेंगे इमरान
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इमरान खान को परिवार से मिलने की अनुमति देना है। रिपोर्टों के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के दौरान उनके परिवार को उनसे मिलने की सुविधा दी जाएगी। अदालत ने उनके बेटों से फोन पर बातचीत की भी अनुमति दी है।
इमरान खान के बेटे सुलेमान खान और कासिम खान विदेश में रहते हैं। परिवार की ओर से लंबे समय से शिकायत की जा रही थी कि उन्हें इमरान के स्वास्थ्य की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पा रही है। उनके बेटों के अनुसार परिवार, वकीलों और डॉक्टरों को लंबे समय से इमरान खान से मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी।
अदालत ने इस मामले में परिवार से नियमित मुलाकात का रास्ता भी खोला है। इससे इमरान खान और उनके परिवार के बीच संपर्क बढ़ने की उम्मीद है।
अस्पताल में कितने दिन रहेंगे इमरान खान?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा और फिलहाल उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने की बात सामने आई है। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होनी है।

अगस्त 2023 में जेल जाने के बाद यह पहली बार होगा जब इमरान खान इतने लंबे समय के लिए जेल परिसर से बाहर रहेंगे।
पहले भी उठ चुकी थी अस्पताल भेजने की मांग
इमरान खान को अस्पताल भेजने की मांग अचानक नहीं उठी है। उनके परिवार और पार्टी ने पिछले कई महीनों से उन्हें शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने की मांग की थी।
मार्च 2026 में इस मामले में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने भी मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया था। अदालत ने इमरान की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए डॉक्टरों को शामिल करने को कहा था।
इसके बाद इमरान खान ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जुलाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ओर से दायर चैंबर अपील स्वीकार कर मामले को जल्द सुनवाई के लिए पीठ के सामने रखने का आदेश दिया था। इस याचिका में शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में इलाज, निजी डॉक्टरों और परिवार से मिलने की अनुमति की मांग की गई थी।
अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान खान
इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिर गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और उन्हें अलग-अलग मामलों में सजा भी सुनाई गई।
इमरान खान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोप लगाते हैं कि उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए कानूनी मामलों का इस्तेमाल किया गया। सरकार और संबंधित संस्थाएं इन आरोपों को खारिज करती रही हैं।

उनके खिलाफ राज्य उपहार यानी तोशाखाना से जुड़े मामलों, अवैध विवाह और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों सहित कई मुकदमे चले हैं। कुछ मामलों में उनकी सजा निलंबित या पलटी भी गई है, जबकि कुछ मामलों में अपीलें अभी लंबित हैं।
फैसले के बाद पीटीआई ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पीटीआई ने फैसले का स्वागत किया है। पार्टी का कहना है कि इमरान खान को काफी पहले ही स्वतंत्र और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज मिल जाना चाहिए था।
पीटीआई नेता जुल्फी बुखारी ने कहा कि जेल की चिकित्सा सुविधा स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच का विकल्प नहीं हो सकती। पार्टी लंबे समय से इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने और उनके निजी डॉक्टरों को इलाज में शामिल करने की मांग कर रही थी।
हालांकि, पीटीआई ने अपने समर्थकों से अस्पताल के बाहर भीड़ न लगाने की अपील की है। पार्टी ने कहा है कि अस्पताल के आसपास शांत माहौल बनाए रखना जरूरी है, ताकि इमरान खान का इलाज प्रभावित न हो और दूसरे मरीजों को भी परेशानी न हो।
क्या इससे पाकिस्तान की राजनीति पर पड़ेगा असर?
इमरान खान सिर्फ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि देश की राजनीति में अब भी बेहद प्रभावशाली नेता हैं। जेल में रहने के बावजूद उनकी पार्टी का बड़ा समर्थक आधार बना हुआ है।
उनकी अस्पताल में शिफ्टिंग ऐसे समय हुई है जब पीटीआई और पाकिस्तान सरकार के बीच राजनीतिक बातचीत को लेकर भी तनाव बना हुआ है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई ने 27 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार उसकी मांगों पर आगे नहीं बढ़ती तो प्रदर्शन की तैयारी जारी रहेगी।
कुछ राजनीतिक विश्लेषक सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को सरकार और पीटीआई के बीच तनाव कम करने की संभावित शुरुआत के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अस्पताल में भर्ती होने से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बातचीत वास्तव में आगे बढ़ेगी।
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