Saturday, 29 August 2026
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नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बीच Infosys के CEO ‘लक्‍स गोपीसेट्टी’ लापता, कंपनी ने परिवार से साधा संपर्क

नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच Infosys Public Services के CEO लक्स गोपीसेट्टी लापता हो गए हैं। कंपनी ने संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी तलाश शुरू की है।

काठमांडू/ नई दिल्ली: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इसी बीच Infosys Public Services के प्रमुख और CEO लक्ष्मण राव ‘लक्‍स’ गोपीसेट्टी के लापता होने की खबर सामने आई है।

इंफोसिस द्वारा शुक्रवार, 28 अगस्त को सामने आई जानकारी में इस बात की पुष्टि हुई है कि नेपाल की यात्रा के दौरान बाढ़ की चपेट में आने के बाद ‘लक्‍स’ गोपीसेट्टी के साथ उनका संपर्क टूट चुका है। कंपनी ने कहा है कि वह संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी स्थिति का पता लगाने और उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

कंपनी के मुताबिक, गोपीसेट्टी नेपाल में निजी यात्रा पर गए थे। बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इंफोसिस ने कहा कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता गोपीसेट्टी की सुरक्षा और कुशलता सुनिश्चित करना है। कंपनी उनके परिवार के लगातार संपर्क में है और उन्हें हर जरूरी सहायता उपलब्ध करा रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। बचाव अभियान चौथे दिन भी जारी है, लेकिन खराब मौसम, मलबे और कई इलाकों में संपर्क टूटने के कारण राहत एवं खोज अभियान को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इंफोसिस ने क्या कहा?

Infosys ने अपने बयान में कहा कि उमके कर्मचारी लक्स गोपीसेट्टी, जो निजी क्षमता में इस क्षेत्र की यात्रा कर रहे थे, वर्तमान में संपर्क में नहीं हैं। कंपनी ने कहा कि वह संबंधित एजेंसियों के साथ जानकारी जुटाने और उनसे संपर्क स्थापित करने के लिए काम कर रही है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह गोपीसेट्टी के परिवार के साथ लगातार संपर्क में है और इस कठिन समय में परिवार को आवश्यक सहयोग दे रही है। इंफोसिस ने नेपाल में हुई जान-माल की भारी क्षति पर भी दुख जताया है।

कौन हैं लक्स गोपीसेट्टी?

लक्स गोपीसेट्टी Infosys Public Services के President और CEO हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के साथ काम करती है।

इंफोसिस के अनुसार, गोपीसेट्टी सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों को रणनीति, तकनीक, संचालन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। वह कंपनी की रणनीति और उसके क्रियान्वयन की निगरानी भी करते हैं।

वर्तमान पद संभालने से पहले वे इंफोसिस में Global Vice President और Business Applications and Digital Workspace Services के प्रमुख रह चुके हैं। इस भूमिका में उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशिया में कारोबार के विस्तार पर काम किया था।

कंपनी में शामिल होने से पहले उनका लंबा कॉरपोरेट अनुभव रहा है। वह Accenture में Managing Director रह चुके हैं, जहां उन्होंने North America में Health and Public Services कारोबार के एक हिस्से का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने BearingPoint, IBM, PwC और HCL जैसी कंपनियों में भी काम किया है।

नेपाल में कैसे आई इतनी बड़ी तबाही?

नेपाल में बुधवार को आई फ्लैश फ्लड ने देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों में भारी तबाही मचाई। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रसुवा, नुवाकोट और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। नेपाल-चीन सीमा के आसपास के पहाड़ी इलाकों में बाढ़ ने सड़कों, पुलों, बस्तियों और जलविद्युत परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया।

प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, आपदा की शुरुआत ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने से हुई। इससे भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया और नदी के प्रवाह को प्रभावित किया। इसके बाद पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे बसे इलाकों की ओर पहुंचा।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने भी इस घटना से जुड़े भूकंपीय संकेतों के आधार पर ग्लेशियर के ढहने की ओर इशारा किया था। हालांकि वैज्ञानिक अभी भी सैटेलाइट और जमीन से मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं, इसलिए आपदा के पूरे क्रम और इसके सटीक कारणों को लेकर जांच जारी है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि हिमालय में बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों और ऊंचाई वाले इलाकों में इस तरह की घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि मौजूदा बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के बीच सीधे संबंध पर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।

अब तक 626 लोगों की मौत

नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, शनिवार तक बाढ़ से 626 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 2,426 लोग अभी भी लापता बताए गए हैं। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। वहीं चीन की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा से भारी नुकसान हुआ है।

नेपाल के आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चितवन से सबसे ज्यादा 233 शव बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व से 158, नुवाकोट से 51, गोरखा से 48, नवलपरासी पश्चिम से 47, धादिङ से 45, तनहुँ से 31 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं।

बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि सड़क और पुलों के बड़े हिस्से को भी बहा दिया। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है। इससे बचाव दलों के लिए प्रभावित स्थानों तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है।

320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर

नेपाल की इस आपदा में भारतीय नागरिक भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया था कि 320 भारतीय नागरिक अब भी संपर्क में नहीं हैं, जबकि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं।

MEA के मुताबिक, चीन की तरफ फंसे कई भारतीयों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है। 153 भारतीय नागरिकों के नेपाल पहुंचने की जानकारी भी दी गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत नेपाल को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से नेपाल के रास्ते काठमांडू पहुंचे भारतीय नागरिकों को भी निकालने की प्रक्रिया जारी है। कुछ भारतीयों को नेपाल से भारत वापस लाया जा चुका है।

इस पूरी स्थिति के बीच लक्स गोपीसेट्टी का संपर्क से बाहर होना भारतीयों के लिए चलाए जा रहे व्यापक खोज एवं बचाव प्रयासों का हिस्सा बन गया है। हालांकि उनके मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह बाढ़ से सीधे प्रभावित किस स्थान पर थे या आखिरी बार उनसे कब और कहां संपर्क हुआ था।

बचाव अभियान में बड़ी चुनौतियां

नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान लगातार चल रहा है, लेकिन परिस्थितियां आसान नहीं हैं। कई इलाकों में चार से पांच फीट तक मलबा जमा है। कुछ जगहों पर हेलीकॉप्टर उतारने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। खराब मौसम के कारण हवाई बचाव अभियान भी कई बार रोकना पड़ा।

नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा बल लगातार मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। रसुवा स्थित Upper Trishuli-1 Hydropower Project भी खोज अभियान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अधिकारियों को आशंका है कि वहां एक सुरंग में 100 से अधिक लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।

बाढ़ के बाद हिमालयी क्षेत्र में एक नई झील बनने से भी खतरा बढ़ गया था। अधिकारियों को आशंका थी कि अगर इस झील का पानी अचानक नीचे की ओर बहता है तो एक और फ्लैश फ्लड आ सकती है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बाद में झील का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से करीब 10 मीटर नीचे आया, जिससे तत्काल खतरा कुछ कम हुआ। फिर भी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

93 हजार से ज्यादा लोगों को तत्काल मदद की जरूरत

International Red Cross के शुरुआती आकलन के अनुसार, नेपाल में कम से कम 93,000 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है।

UNICEF ने कहा है कि करीब 17,000 बच्चों को मानवीय सहायता की तत्काल जरूरत है। बाढ़ ने स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचाया है। कम से कम 18 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 20 अन्य को नुकसान पहुंचा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार छह स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हुए हैं और आठ स्वास्थ्यकर्मी भी लापता बताए गए हैं।

इससे साफ है कि नेपाल के सामने चुनौती केवल लोगों को मलबे से निकालने तक सीमित नहीं है। बचाए गए लोगों के लिए भोजन, साफ पानी, चिकित्सा सुविधा, अस्थायी आश्रय और संचार व्यवस्था बहाल करना भी बड़ी प्राथमिकता है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

भारत ने नेपाल को राहत और बचाव के लिए सहायता देने की पेशकश की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत राहत सामग्री के साथ एक और विमान भेजने की तैयारी में था। इसके अलावा सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष बचाव दल भेजने की भी जानकारी दी गई है। भारत ने प्रभावित इलाकों में संपर्क बहाल करने में मदद के लिए एक पोर्टेबल प्री-फैब्रिकेटेड ब्रिज भी नेपाल भेजा है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में आवाजाही बहाल करने में मदद करना है जहां बाढ़ ने पुल और सड़कें नष्ट कर दी हैं।

इस बीच नेपाल सरकार ने भी राहत और पुनर्वास के लिए कदम तेज किए हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने आपदा राहत कोष में एक महीने का वेतन देने का फैसला किया है। सरकार प्रभावित परिवारों के लिए राहत और पुनर्वास पैकेज तैयार करने पर भी काम कर रही है।

फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाने और लापता लोगों का पता लगाने की है। इसी व्यापक खोज अभियान के बीच Infosys Public Services के CEO Lax Gopisetty की तलाश भी जारी है।

ये भी पढ़ें :- वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अब अमेरिका का नियंत्रण, ट्रंप ने बताया ‘दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील’

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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