NEET प्रदर्शनकारियों की FIR पर केंद्र का बड़ा कदम। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले रद्द करने की मांग की। जानिए 2,700 FIR का मुद्दा, CJP की प्रतिक्रिया और आगे क्या होगा।
नई दिल्ली: NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार ने सोमवार, 31 अगस्त को बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है। यह कदम उन छात्रों और युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में NEET विवाद को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
केंद्र का यह कदम ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार आरोप लगा रही थी कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने का अपना आश्वासन पूरा नहीं किया। CJP नेताओं ने इसे सरकार की ओर से किया गया वादा बताया था और इसके क्रियान्वयन में देरी पर सवाल उठाए थे। अब केंद्र के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति बताया है।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में है। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों और उनके परिवारों के बीच लंबे समय तक असंतोष रहा। बाद में यह मुद्दा अदालत तक पहुंचा और देश के कई हिस्सों में छात्रों तथा युवा संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुआ। इन प्रदर्शनों का एक प्रमुख चेहरा CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और संगठन के प्रवक्ता सौरव दास सहित अन्य युवा नेता रहे। इनके अलावा इस पूरे प्रदर्शन में इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भी अहम भूमिका रही।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी विवाद पैदा हुआ। प्रदर्शन से जुड़े कुछ मामलों में पुलिस ने FIR दर्ज की थीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों और युवाओं को आपराधिक मामलों में फंसाया गया। दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन की ओर से दर्ज मामलों में कानून-व्यवस्था से जुड़े आरोपों को आधार बनाया गया था।
यही FIR बाद में केंद्र और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की?
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार, आवेदन में NEET विवाद से जुड़े विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों का मुद्दा उठाया गया है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि FIR वापस लेने का मुद्दा लंबे समय से CJP और सरकार के बीच बातचीत में शामिल था। अब केंद्र ने खुद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ाना चाहती है।
पहले केंद्र का रुख क्या था?
यहां इस मामले का एक अहम पहलू सामने आता है। अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने स्पष्ट किया था कि सभी FIR को बिना किसी अपवाद के वापस नहीं लिया जाएगा।
3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि गंभीर और जघन्य आपराधिक मामलों में आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली जाएंगी। उस समय करीब 2,700 FIR का उल्लेख सामने आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि राज्य सरकारें उन प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन ऐसे लोग जिन पर पहले से गंभीर और जघन्य अपराधों के मामले हैं, उनके मामलों को उसी तरह नहीं देखा जा सकता।
CJP की प्रतिक्रिया
केंद्र के नए कदम पर CJP नेताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। संगठन लंबे समय से FIR वापस लेने की मांग कर रहा था।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार के इस फैसले का सम्मान करते हुए अपने एक्स हैंडल पर शशि थरूर की किताब, ‘अंबेडकर: ए लाईफ’ को हाथों में रखे अपनी एक तस्वीर साझा की है।
CJP का कहना है कि FIR का मुद्दा केवल कानूनी कार्रवाई का मामला नहीं है, बल्कि यह उन छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है जिन्होंने NEET से संबंधित अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया था।
संगठन ने पहले आरोप लगाया था कि सरकार ने युवाओं से किए गए वादों को लागू करने में देरी की है। 24 अगस्त को CJP की बैठक के दौरान संगठन ने एक बार फिर FIR, मृतक NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई से सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए थे।
जंतर-मंतर का प्रदर्शन क्यों बना विवाद?
NEET विवाद से जुड़ा जंतर-मंतर आंदोलन सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कथित झड़प और पुलिस कार्रवाई के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। इन आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक हाई-पावर्ड कमेटी की प्रक्रिया भी सामने आई।
24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति को प्रदर्शन के दौरान महिलाओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया था।
क्या सभी FIR रद्द की जाएंगी?
यहां सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल यही है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से FIR रद्द करने का अनुरोध किया है। अब अदालत आवेदन और संबंधित रिकॉर्ड पर विचार करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन मामलों में राहत मिलेगी और किन मामलों को अलग रखा जाएगा।
विशेष रूप से गंभीर आपराधिक मामलों में पहले ही अंतर किया जा चुका है। इसलिए ‘सभी प्रदर्शनकारियों की FIR खत्म’ होने वाली पुष्टि तथ्यात्मक रूप से भ्रामक हो सकती है।
FIR का मुद्दा आंदोलन के लिए इतना अहम क्यों?
किसी छात्र या युवा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना उसके भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है। सरकारी नौकरी, उच्च शिक्षा या विदेश में पढ़ाई जैसे अवसरों के दौरान पुलिस वेरिफिकेशन और कानूनी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसी वजह से प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण FIR दर्ज हुई है, तो उसे खत्म किया जाना चाहिए।
दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। अगर किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या गंभीर अपराध हुए हैं, तो ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई बनती है।
5 सितंबर को CJP का आंदोलन
दिलचस्प बात यह है कि केंद्र के ताजा कदम से पहले CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान किया था।
संगठन के अनुसार, यह मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित है। CJP ने आरोप लगाया कि सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं के सामने रखे आश्वासनों को पूरी तरह लागू नहीं किया। मार्च में मृतक NEET अभ्यर्थियों के परिवारों और कथित पुलिस ज्यादती से प्रभावित लोगों के शामिल होने की बात कही गई है।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्तावित मार्च में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुख्य रूप से सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस घटनाक्रम के बाद केंद्र का FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
क्या इससे आंदोलन खत्म हो जाएगा?
अभी यह कहना मुश्किल है। FIR का मुद्दा CJP की प्रमुख मांगों में से एक था। अगर सुप्रीम कोर्ट केंद्र के आवेदन पर सकारात्मक फैसला देता है, तो इससे आंदोलनकारियों को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिल सकती है।
लेकिन CJP अब केवल NEET परीक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं है। संगठन मृतक अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए मुआवजा, पुलिस कार्रवाई की जांच, छात्रों को भविष्य में प्रताड़ित न करने की गारंटी और सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे भी उठा रहा है।
इसलिए FIR का मुद्दा सुलझने के बावजूद संगठन की अन्य मांगों पर आंदोलन जारी रह सकता है।
FIR से आगे की कहानी
केंद्र का सुप्रीम कोर्ट जाना NEET आंदोलन के लिए निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। जिन छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर राहत की मांग की थी, उनके लिए यह कदम उम्मीद बढ़ाने वाला है।
लेकिन अभी अंतिम फैसला बाकी है। केंद्र ने केवल अदालत के सामने FIR रद्द करने का अनुरोध किया है। जब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर आदेश नहीं देता, तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि सभी मामले खत्म हो गए हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं के अधिकार और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
NEET विवाद से शुरू हुआ आंदोलन अब परीक्षा से कहीं आगे निकल चुका है। यह छात्रों के अधिकार, सरकारी शिक्षा व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही और युवाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा बन गया है। केंद्र का ताजा कदम इस लंबे विवाद को शांत करने की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है, लेकिन इसकी असली परीक्षा अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले और सरकार द्वारा अपने बाकी आश्वासनों को लागू करने में होगी।
ये भी पढ़ें :- केरल के इस्लामिक विद्वान कांतापुरम का विवादित बयान, ‘महिलाएं घर में रहें, सार्वजनिक मंचों पर आने से होगी बड़ी तबाही’




