खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ हवन से शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी की FIR तक पहुंच गया है। जानिए 8 अगस्त से 30 अगस्त तक पूरे मामले में क्या-क्या हुआ।
हल्द्वानी, देहरादून: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तक पहुंच गया है। हल्द्वानी पुलिस ने रविवार, 30 अगस्त की रात राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की।
मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196 और 299 के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(q) के तहत दर्ज किया गया है।
FIR एक शिकायत के आधार पर दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता अमित कुमार ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 29 अगस्त को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान को ‘छुआछूत’ और दलितों के खिलाफ अपराध के रूप में पेश किया, जबकि उनके मुताबिक इस कार्यक्रम का किसी जाति के खिलाफ भेदभाव से संबंध नहीं था। कुमार ने खुद को वाल्मीकि समुदाय से संबंधित बताया है।
यह मामला फिलहाल जांच के स्तर पर है। पुलिस अब शिकायत के आधार पर आरोपों, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
पूरे विवाद की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को हुई कांग्रेस की एक रैली से हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित सभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने उसी मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण हवन’ कराया।
इस अनुष्ठान की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव और दलितों के अपमान से जोड़कर देखा। पार्टी का आरोप था कि खड़गे दलित समुदाय से आते हैं और उनके कार्यक्रम के बाद मैदान का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना छुआछूत की मानसिकता को दर्शाता है।
वहीं आयोजन से जुड़े लोगों ने इस आरोप को खारिज किया। श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरिश चंद्र पांडे ने कहा कि संगठन का BJP या RSS से संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, रैली के दौरान कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे लगाए गए थे और इसी के विरोध में हवन कराया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम में अनुसूचित जाति समुदाय के लोग भी शामिल थे।
खड़गे ने भी उठाया था मुद्दा
मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस घटना पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई और इसे दलित सम्मान से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद उसके आयोजन स्थल को ‘शुद्ध’ करना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता का संकेत है।
यह मुद्दा संसद तक भी पहुंचा। कांग्रेस ने मांग की कि कथित शुद्धिकरण में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए। इसके बाद उत्तराखंड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर प्रदर्शन भी किए।
खड़गे के बाद राहुल गांधी ने भी इस मामले को व्यापक दलित अधिकारों के सवाल से जोड़ दिया।
राहुल गांधी ने 29 अगस्त को क्या कहा?
शनिवार, 29 अगस्त को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने हल्द्वानी की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने कथित शुद्धिकरण को ‘छुआछूत’ का उदाहरण बताया और इसे संविधान के खिलाफ बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि यह मामला सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव का व्यापक उदाहरण है। उन्होंने BJP और RSS की विचारधारा पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर कार्रवाई की मांग करती रहेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री से उन लोगों के खिलाफ SC/ST Act के तहत FIR दर्ज करने की मांग की, जिन्होंने कथित तौर पर शुद्धिकरण किया था। यही बयान बाद में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत का आधार बना।
राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज
हल्द्वानी के जवाहर नगर निवासी अमित कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने खुद को अनुसूचित जाति यानी वाल्मीकि समुदाय का सदस्य बताया है। वह श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से भी जुड़ा है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए धार्मिक अनुष्ठान और सफाई अभियान को ‘छुआछूत’ से जोड़ दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह स्वयं और अन्य अनुसूचित जाति समुदाय के लोग उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
अमित कुमार ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयान से यह धारणा बनी कि कार्यक्रम में शामिल दलित समुदाय के लोग छुआछूत का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, इससे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची और सामाजिक तनाव बढ़ने की स्थिति पैदा हुई।
राहुल गांधी पर कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 तथा SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धारा 3(1)(q) लगाई गई है।
1) BNS की धारा 196
धारा 196 ऐसे कृत्यों से संबंधित है जिनसे विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी बढ़ने की आशंका हो या सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो। इसमें धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय आदि के आधार पर समूहों के बीच तनाव पैदा करने वाले कृत्य शामिल हो सकते हैं।
पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर इस धारा को FIR में शामिल किया है।
2) BNS की धारा 299
यह धारा किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों से संबंधित है। पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर इसे भी FIR में शामिल किया है।
3) SC/ST Act की धारा 3(1)(q)
FIR में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(q) भी लगाई गई है। यह प्रावधान किसी सार्वजनिक सेवक को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के खिलाफ कार्रवाई करवाने के उद्देश्य से झूठी या निराधार सूचना देने से संबंधित है।
BJP का राहुल गांधी पर पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों के बाद BJP ने कांग्रेस पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है और शुद्धिकरण कार्यक्रम कराने वाले लोग BJP कार्यकर्ता नहीं थे।
केंद्रीय राज्य मंत्री और उत्तराखंड BJP के वरिष्ठ नेता अजय टम्टा ने भी राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान BJP का नहीं है और वहां धार्मिक कार्यक्रम नियमित रूप से होते हैं।
टम्टा के मुताबिक, कांग्रेस की सभा के बाद मैदान में काफी कचरा रह गया था और सफाई का काम एक धार्मिक संगठन ने कराया। उनका दावा था कि ऐसे आयोजनों के बाद रामलीला मैदान की सफाई और धार्मिक अनुष्ठान पहले भी होते रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से उत्तराखंड को बदनाम नहीं करने की अपील की।
संगठन का किसी भी राजनीतिक संबंध से इनकार
श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने भी BJP और RSS से किसी तरह के संबंध से इनकार किया है। संगठन के अध्यक्ष गिरिश चंद्र पांडे के अनुसार, हवन का उद्देश्य कथित तौर पर कांग्रेस की रैली में लगाए गए नारों और खड़गे के पहले के राजनीतिक बयान के विरोध से जुड़ा था।
पांडे ने दावा किया कि संगठन की स्थापना कुछ महीने पहले हुई थी और इसका उद्देश्य धार्मिक एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हवन में अनुसूचित जाति समुदाय के लोग शामिल थे।
‘शुद्धिकरण’ शब्द को लेकर इतना विवाद क्यों?
इस मामले ने ‘शुद्धिकरण’ शब्द के सामाजिक और ऐतिहासिक अर्थ पर भी बहस छेड़ दी है।
इतिहास में ‘शुद्धि’ शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग संदर्भों में हुआ है। आर्य समाज ने 19वीं और 20वीं सदी में ‘शुद्धि’ आंदोलन को प्रमुखता दी थी। इसका मूल संदर्भ धार्मिक पुनर्प्रवेश और धर्मांतरण से जुड़ा था। समय के साथ इस शब्द के अर्थ और राजनीतिक इस्तेमाल में बदलाव आया।
हल्द्वानी मामले में कांग्रेस ने ‘शुद्धिकरण’ को जातिगत शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा से जोड़ा, जबकि आयोजन करने वालों का कहना है कि यह धार्मिक अनुष्ठान और सफाई से जुड़ा कार्यक्रम था।
यही अंतर इस विवाद को केवल राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाता है।
क्या यह मामला सिर्फ खड़गे तक सीमित है?
राहुल गांधी ने अपने बयान में इसे खड़गे से आगे का मुद्दा बताया। उनका तर्क था कि अगर देश के एक बड़े राजनीतिक दल के अध्यक्ष और दलित नेता के कार्यक्रम के बाद ऐसी घटना होती है तो आम दलित नागरिकों के साथ होने वाले भेदभाव की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने स्कूलों और गांवों में होने वाले कथित जातिगत भेदभाव के उदाहरण भी दिए और कहा कि संविधान छुआछूत को गैरकानूनी घोषित करता है।
इससे मामला कांग्रेस बनाम BJP की राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ जाति और सामाजिक समानता की बहस से भी जुड़ गया है।
खड़गे विवाद से राहुल गांधी की FIR तक पहुंचा मामला
हल्द्वानी का यह विवाद अब एक राजनीतिक बयान से कहीं बड़ा हो चुका है। 8 अगस्त को खड़गे की रैली, उसके बाद रामलीला मैदान में हुआ कथित शुद्धिकरण हवन, कांग्रेस की आपत्ति, BJP का बचाव, खड़गे की कार्रवाई की मांग और फिर राहुल गांधी की 29 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस – इन घटनाओं ने मामले को लगातार आगे बढ़ाया।
अब 30 अगस्त की रात राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।
एक तरफ कांग्रेस इसे दलित सम्मान, संविधान और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई के रूप में पेश कर रही है। दूसरी तरफ BJP और आयोजन से जुड़े लोग इसे धार्मिक कार्यक्रम और सफाई की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं और राहुल गांधी पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगा रहे हैं।
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