Friday, 19 June 2026
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NEET परीक्षा से पहले टेलीग्राम बैन क्यों? केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में दिया जवाब-इस ऐप पर चुटकियों में लीक हो सकती है जानकारी, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

केंद्र की दलील-एक अकाउंट से बनते हैं 40 रोबोटिक बॉट्स, ब्लॉक करने के बाद भी यूजर को पकड़ना नामुमकिन

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

नीट-यूजी 2026 (NEET-UG) की दोबारा परीक्षा से ठीक पहले सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थाई प्रतिबंध (Temporary Ban) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा घमासान छिड़ गया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपने इस कड़े फैसले का जोरदार बचाव किया। केंद्र ने अदालत में दो टूक कहा कि टेलीग्राम का ढांचा ऐसा है, जिसका इस्तेमाल पेपर लीक जैसी जानकारियों को बेहद कम समय में देश भर में फैलाने के लिए किया जा सकता है। दोनों पक्षों की मैराथन दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

क्या है पूरा विवाद?

देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए 3 मई को नीट-यूजी परीक्षा आयोजित हुई थी। प्रश्नपत्र लीक (Paper Leak) के गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने 12 मई को इस परीक्षा को रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। अब आगामी 21 जून को यह परीक्षा दोबारा होने जा रही है। सरकार ने सुरक्षा के मद्देनजर परीक्षा से पहले टेलीग्राम ऐप पर रोक लगा दी, जिसके खिलाफ टेलीग्राम कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सॉलिसिटर जनरल ने बताया क्यों खतरनाक है टेलीग्राम का ‘बॉट इंफ्रास्ट्रक्चर’

हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच के जस्टिस तेजस करिया के सामने केंद्र का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने टेलीग्राम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार को दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन टेलीग्राम का मामला बिल्कुल अलग और खतरनाक है। टेलीग्राम पर एक सिंगल यूजर अकाउंट से 40 तक ‘बॉट्स’ (स्वचालित मशीनें) बनाए जा सकते हैं। ये बॉट्स बिना किसी मानवीय दखल के खुद ब खुद अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं और बहुत जटिल नेटवर्क तैयार कर लेते हैं। सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यह ऐप पूरी तरह ‘क्लाउड’ पर काम करता है। अगर इस पर कोई गैरकानूनी काम या पेपर लीक जैसी चीजें की जाएं, तो ऐप ब्लॉक होने के बाद भी देश की जांच एजेंसियां असली अपराधी (End User) तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने तर्क दिया कि खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, टेलीग्राम के इसी सीक्रेट ढांचे के कारण इसका इस्तेमाल अक्सर संदिग्ध और आतंकवादी गतिविधियों के लिए भी किया जाता है, जिससे कानून व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को भारी चुनौती मिलती है।

कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश

अदालत में टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने दलीलें पेश कीं, जबकि केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मोर्चा संभाला। जस्टिस तेजस करिया ने दोनों पक्षों की तीखी बहस सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों को राहत देते हुए शाम 7 बजे तक अपनी बची हुई लिखित दलीलें (Written Submissions) कोर्ट में दाखिल करने का समय दिया। इससे पहले बुधवार को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर टेलीग्राम की इस चुनौती याचिका पर तुरंत जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे।

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Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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