
एकमात्र चश्मदीद की गवाही पर कोर्ट ने लगाई मुहर
नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे
देश की राजधानी दिल्ली के गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास साल 2023 में हुए 12वीं कक्षा के छात्र मोहन की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आरोपी युवक शिव चौधरी को हत्या का दोषी करार दिया है। एडिशनल सेशंस जज अनुज अग्रवाल ने अपने फैसले में साफ कहा कि इस मामले के इकलौते चश्मदीद गवाह की गवाही आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने और गुनाह साबित करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।
चश्मदीद सुमित का वो बयान, जिस पर रहा वो अडिग
अदालत ने इस मामले में मृतक छात्र के दोस्त और घटना के प्रत्यक्षदर्शी सुमित की गवाही को सबसे पुख्ता सबूत माना। लंबी जिरह (Cross-examination) के बाद भी सुमित अपने बयान पर अडिग रहा।
कोर्ट रूम में जज ने क्या कहा?
कोर्ट ने जारी अपने आदेश में कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य यह साबित करने के लिए काफी हैं कि आरोपी शिव चौधरी ने ही मोहन पर चाकू से वार किया था और यह वारदात सोची-समझी साजिश (साझा मंशा) का हिस्सा थी। चश्मदीद सुमित ने साफ बताया है कि एक नाबालिग सह-आरोपी ने पहले शिव के हाथ में चाकू थमाया और फिर शिव ने क्रूरता से मोहन के सीने में चाकू घोंप दिया।”
स्कूल से लौट रहे थे छात्र, रास्ते में घेरकर उतारा मौत के घाट
अभियोजन पक्ष (Prosecution) के मुताबिक, यह पूरा मामला स्कूल के दो छात्र गुटों के बीच पुरानी रंजिश से जुड़ा हुआ था। 30 जनवरी 2023 को 12वीं का छात्र मोहन और उसके दोस्त स्कूल की छुट्टी होने के बाद घर लौट रहे थे।गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास बनी एक पुलिस चौकी के ठीक नजदीक आरोपी शिव चौधरी और उसके गैंग ने मोहन का रास्ता रोक लिया। पहले दोनों गुटों में तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इसी दौरान शिव ने चाकू निकालकर मोहन पर हमला कर दिया, जिससे उसकी जान चली गई।
बाकी गवाह पलटे, लेकिन कोर्ट ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को माना
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि केस के कुछ अन्य गवाह कोर्ट में अभियोजन पक्ष के दावे से पूरी तरह सहमत नहीं दिखे (यानी होस्टाइल हो गए)। इसके बावजूद, जज ने साफ किया कि उन गवाहों के बयानों के कुछ हिस्से भी यह साबित करते हैं कि वारदात के वक्त शिव चौधरी मौके पर मौजूद था, दोनों गुटों में झगड़ा हुआ था और मौके पर चाकू दिया गया था। इसी आधार पर कोर्ट ने शिव चौधरी को हत्या (IPC 302/34) का कसूरवार माना।
