Wednesday, 07 October 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
‘हिंदी सीखो या नौकरी छोड़ दो’: बेंगलुरु में Zomato मैनेजर पर केस, भाषा विवाद ने फिर खड़े किए सवाल RBI Repo Rate: महंगाई के दबाव के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, जानें EMI से लेकर GDP पर क्या होगा इसका असर कम टीडीएस भारत के वीडीए अनुपालन ढांचे को कैसे मजबूत कर सकता है Nobel Prize 2026 Physics: बर्फ में छिपे ‘भूत कणों’ को पकड़ने वाले वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार JBL ने भारत में लॉन्च की नई PartyBox रेंज, AI EasySing Mics के साथ मिलेगा Karaoke का नया अनुभव सौरव गांगुली बने दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच, IPL 2027 से पहले फ्रेंचाइजी ने किया बड़ा बदलाव जेफ्री आर्चर का 86 साल की उम्र में निधन, आखिरी किताब के रिलीज से एक दिन पहले कहा दुनिया को अलविदा Arijit Singh India Tour 2027: रिटायरमेंट के बाद फिर लाइव आएंगे अरिजीत सिंह, 9 शहरों में होगा भव्य कॉन्सर्ट ‘हिंदी सीखो या नौकरी छोड़ दो’: बेंगलुरु में Zomato मैनेजर पर केस, भाषा विवाद ने फिर खड़े किए सवाल RBI Repo Rate: महंगाई के दबाव के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, जानें EMI से लेकर GDP पर क्या होगा इसका असर कम टीडीएस भारत के वीडीए अनुपालन ढांचे को कैसे मजबूत कर सकता है Nobel Prize 2026 Physics: बर्फ में छिपे ‘भूत कणों’ को पकड़ने वाले वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार JBL ने भारत में लॉन्च की नई PartyBox रेंज, AI EasySing Mics के साथ मिलेगा Karaoke का नया अनुभव सौरव गांगुली बने दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच, IPL 2027 से पहले फ्रेंचाइजी ने किया बड़ा बदलाव जेफ्री आर्चर का 86 साल की उम्र में निधन, आखिरी किताब के रिलीज से एक दिन पहले कहा दुनिया को अलविदा Arijit Singh India Tour 2027: रिटायरमेंट के बाद फिर लाइव आएंगे अरिजीत सिंह, 9 शहरों में होगा भव्य कॉन्सर्ट

मोरारी बापू ने हार्वर्ड से भारत के पवित्र ग्रंथों को संरक्षित करने का आग्रह किया, नौ दिवसीय राम कथा का समापन

कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स: मोरारी बापू की राम कथा ‘मानस गुरु प्रसाद’ का रविवार को हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सैंडर्स थिएटर में समापन हुआ। इसके साथ ही नौ दिवसीय इस आयोजन का समापन हुआ, जिसमें रामचरितमानस की परंपरा, भारतीय शास्त्रीय चिंतन और अकादमिक जगत एक मंच पर आए।

समापन अवसर पर बापू ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से आग्रह किया कि वह चारों वेदों, रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण की प्रतियों को संरक्षित कर अपने पास रखे। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय ज्ञान परंपरा के इन आधारभूत ग्रंथों को आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ रखा जा सकेगा।

हार्वर्ड में आयोजित इस राम कथा का उद्देश्य केवल रामचरितमानस से जुड़ी आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपराओं को वैश्विक श्रोताओं तक पहुंचाना नहीं था। इसके जरिए भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपराओं और समकालीन अकादमिक विमर्श के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश भी की गई।

कार्यक्रम के दौरान 19 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती, तुलसी जयंती, के अवसर पर सैंडर्स थिएटर में तुलसी जन्मोत्सव एवं ग्लोबल अवॉर्ड्स समारोह आयोजित किया गया। राम कथा की 16 वर्ष पुरानी परंपरा में यह पहली बार था जब भारत के बाहर तुलसी, व्यास, वाल्मीकि और रत्नावली पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस समारोह में नौ विद्वानों और सांस्कृतिक योगदानकर्ताओं को कुल आठ पुरस्कार प्रदान किए गए। यूसी बर्कले के प्रो. सैली जे. सदरलैंड गोल्डमैन और प्रो. रॉबर्ट पी. गोल्डमैन तथा ओसाका विश्वविद्यालय की प्रो. मडोका फुकुओका को वाल्मीकि पुरस्कार दिया गया। कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रो. जॉन स्ट्रैटन हॉले, डॉ. अश्विन भाई कांतीलाल राजगोर और देवी चित्रलेखा को व्यास पुरस्कार प्रदान किया गया।

यूटी ऑस्टिन के प्रो. रूपर्ट स्नेल और सामुदायिक नेता पीयूष भाई मेहता को तुलसी पुरस्कार मिला। वहीं, हार्वर्ड की प्रो. डायना एल. एक को तुलनात्मक धर्म के क्षेत्र में उनके कार्य के लिए रत्नावली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हार्वर्ड में इस आयोजन को संभव बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

राम कथा में भारत से आए कथाकारों, विद्वानों, संगीतकारों और कलाकारों ने हार्वर्ड के अकादमिक समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर भाग लिया। इसके अलावा, 16 से 18 अगस्त तक तीन दिवसीय विद्वत् वार्ताओं का भी आयोजन किया गया। इनमें जापान, नीदरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से विद्वान और परंपरा के साधक शामिल हुए। उन्होंने भारत की साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया।

बापू ने कहा, “किसी ने मुझसे पूछा कि मैं हार्वर्ड क्यों आया। मैंने कहा, ‘मैं पढ़ने नहीं आया, मैं पढ़ाने नहीं आया; मैं प्रसाद बाँटने आया हूँ।’”

राम कथा के मुख्य आयोजक पावन पोपट OBE ने कहा, “इन नौ दिनों के समापन पर हमारे हृदय कृतज्ञता से भरे हुए हैं। हमने देखा कि विद्वान, श्रद्धालु और व्यापक समुदाय के सदस्य खुलेपन, सीखने और ज्ञान के भाव से एक साथ आए। यह सब सार्वभौमिक मूल्यों – सत्य, प्रेम और करुणा की पृष्ठभूमि में हुआ।”

‘मानस गुरु प्रसाद’ कथा ने भक्ति, विद्वत्ता, संगीत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को एक साथ जोड़ा। इसने ऐसा मंच तैयार किया, जहां अंतरराष्ट्रीय दर्शक भारत की शास्त्रीय परंपराओं से सीधे परिचित हो सके।

हार्वर्ड में आयोजित ये नौ दिन केवल राम कथा के समापन तक सीमित नहीं रहे। इस आयोजन ने रामचरितमानस की परंपरा और वैश्विक अकादमिक समुदाय के बीच एक व्यापक संवाद की शुरुआत की, जबकि बापू की शिक्षाओं के मूल भाव – सत्य, प्रेम और करुणा को केंद्र में बनाए रखा।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।