गुटखा और तंबाकू वाले पान मसाला पर कर्नाटक में एक साल का प्रतिबंध। जानिए सरकार के इस फैसले की वजह, प्रतिबंध के दायरे में आने वाले उत्पाद और इसे लागू करने की चुनौतियां।
बेंगलुरु: कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाला का कारोबार अब एक साल के लिए बंद रहेगा। राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त कार्यालय ने गुटखा और तंबाकू/निकोटीन युक्त पान मसाला के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरों को देखते हुए जारी किया गया है।
खास बात यह है कि प्रतिबंध सिर्फ उन उत्पादों तक सीमित नहीं है, जिनके पैकेट पर सीधे ‘गुटखा’ या ‘पान मसाला’ लिखा हो। ऐसे अलग-अलग उत्पाद भी इसके दायरे में हैं जिनमें तंबाकू या निकोटीन मौजूद है या जिन्हें इस तरह पैक और बेचा जाता है कि उपभोक्ता उन्हें आपस में मिलाकर इस्तेमाल कर सके। यानी अलग-अलग पाउच में बेचकर प्रतिबंध से बचने की कोशिश पर भी रोक रहेगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में तंबाकू के सेवन, खासकर धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों से होने वाली बीमारियों और मुंह के कैंसर को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम है और देश में धूम्ररहित तंबाकू के रूप में गुटखा, खैनी, तंबाकू वाला पान और जर्दा जैसे उत्पाद बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।
एक साल का प्रतिबंध
कर्नाटक सरकार का यह कदम बुधवार, 12 अगस्त 2026 को चर्चा में आया। हालांकि, संबंधित प्रतिबंध का आधार 15 जून 2026 को जारी अधिसूचना है। यह अधिसूचना कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने जारी की थी और इसमें राज्यभर में एक साल के लिए तंबाकू और/या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला पर रोक लगाई गई है।
प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 की उपधारा (2) के खंड (ए) और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 के विनियम 2.3.4 के तहत लगाया गया है। आदेश कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त कार्यालय से जारी हुआ।
अधिसूचना के मुताबिक, प्रतिबंध अधिसूचना की तारीख से प्रभावी है और एक साल तक पूरे कर्नाटक में लागू रहेगा।
कौन-कौन से पदार्थ रहेंगे प्रतिबंधित?
नए आदेश के तहत सिर्फ गुटखा और पान मसाले की दुकान पर बिक्री रोकने की बात नहीं है। इसके दायरे को काफी व्यापक रखा गया है। इसके तहत तंबाकू और/या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लगाई जा रही है।
इसके अलावा ऐसे दूसरे उत्पाद भी प्रतिबंध के दायरे में हैं जिनमें अंतिम उत्पाद के रूप में तंबाकू या निकोटीन मौजूद है। इन उत्पादों पर नाम या ब्रांड अलग होने से प्रतिबंध खत्म नहीं होगा। आदेश पैकेज्ड और बिना पैकेजिंग वाले उत्पादों पर भी लागू है।
अलग-अलग पाउच में बेचकर नियमों से बचना भी मुश्किल
गुटखा पर प्रतिबंध के बावजूद पहले कई जगहों पर ऐसा तरीका देखा गया है जिसमें तंबाकू और पान मसाला अलग-अलग पैकेट में बेचे जाते हैं और उपभोक्ता दोनों को मिलाकर इस्तेमाल करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी इस तरह की व्यवस्था का उल्लेख हुआ है, जहां तंबाकू वाले उत्पाद और पान मसाला अलग-अलग पैकेट में बेचे जाने की बात सामने आई थी। अदालत ने संबंधित खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन पर जोर दिया था।
कर्नाटक की मौजूदा अधिसूचना में भी ऐसे अलग-अलग उत्पादों को शामिल किया गया है जिन्हें इस तरह पैक या वितरित किया जाता है कि उपभोक्ता उन्हें आसानी से मिलाकर इस्तेमाल कर सकें। इसलिए सिर्फ गुटखे का नाम बदल देना या सामग्री को अलग-अलग पैकेट में रखना प्रतिबंध से बचने का रास्ता नहीं होगा।
सरकार ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
सरकार की ओर से प्रतिबंध का मुख्य आधार सार्वजनिक स्वास्थ्य बताया गया है। तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पादों को लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा जाता रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में करीब 26.7 करोड़ वयस्क, यानी 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा 2016-17 में किसी न किसी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करता था। संगठन के अनुसार, भारत में धूम्ररहित तंबाकू सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले तंबाकू उत्पादों में शामिल है।
तंबाकू का सेवन कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख जोखिम कारक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत में तंबाकू के कारण हर साल लगभग 13.5 लाख मौतों का अनुमान बताता है।
गुटखा शरीर के लिए इतना खतरनाक क्यों है?
गुटखा एक तरह का धूम्ररहित तंबाकू उत्पाद है। इसमें आम तौर पर तंबाकू के साथ सुपारी, मसाले, चूना और अन्य सामग्री शामिल होती है। इसमें मौजूद निकोटीन लत पैदा कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, गुटखे में निकोटीन और कई ऐसे रसायन होते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। इसके सेवन को होंठ, मुंह, जीभ, गले और भोजन नली के कैंसर से जोड़ा गया है।
भारत में चिंता सिर्फ तंबाकू तक सीमित नहीं है। तंबाकू वाले कई चबाने योग्य उत्पादों में सुपारी यानी अरेका नट भी शामिल होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े एक तकनीकी दस्तावेज के अनुसार, अरेका नट खुद भी कैंसरकारी मानी जाती है और इसके सेवन को ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस जैसी गंभीर स्थिति से जोड़ा गया है।
मुंह के कैंसर का खतरा
धूम्ररहित तंबाकू का सबसे गंभीर असर मुंह और उसके आसपास के हिस्सों पर पड़ सकता है। इसके लंबे समय तक सेवन से मुंह में सफेद या लाल धब्बे, मसूड़ों की समस्याएं और अन्य असामान्य बदलाव हो सकते हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान जर्नल में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार, धूम्ररहित तंबाकू के सेवन का संबंध मुंह के कैंसर, ल्यूकोप्लाकिया, एरिथ्रोप्लाकिया और ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस जैसी स्थितियों से है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े भारत के एक तकनीकी दस्तावेज में भी धूम्ररहित तंबाकू से जुड़ी कई पूर्व-कैंसर स्थितियों और मुंह के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों का उल्लेख है। यानी कर्नाटक का मौजूदा फैसला सिर्फ सड़क या सार्वजनिक जगहों पर गुटखे के दाग रोकने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा भी है।
कर्नाटक सरकार पहले भी दे चुकी थी चेतावनी
कर्नाटक में गुटखा और पान मसाला को लेकर सरकार की सख्ती अचानक शुरू नहीं हुई।
जून 2026 में वर्तमान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पान मसाला, गुटखा, सुपारी और तंबाकू उत्पादों में कथित तौर पर नशीले पदार्थ मिलाए जाने की शिकायतों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि अगर जांच में ऐसे पदार्थ पाए गए तो सरकार राज्य में इन उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने सहित कड़ा कदम उठा सकती है।
शिवकुमार ने यह बात बेंगलुरु में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 31वें स्थापना दिवस और ‘ड्रग-फ्री इंडिया कॉन्क्लेव’ के दौरान कही थी। उस समय उन्होंने दावा किया था कि कुछ उत्पादों में नशीले पदार्थ मिलाकर उन्हें उपभोक्ताओं को ‘ड्रग जैसा असर’ देने के लिए तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके करीब डेढ़ महीने बाद राज्य में तंबाकू और निकोटीन वाले गुटखा-पान मसाला पर एक साल का व्यापक प्रतिबंध सामने आया।
क्या प्रतिबंध लागू कराना बड़ी चुनौती होगी?
किसी भी तंबाकू प्रतिबंध की सफलता सिर्फ अधिसूचना जारी करने से तय नहीं होती। असली चुनौती उसके जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की होती है।
कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में दुकानों, गोदामों, परिवहन नेटवर्क और वितरण चैनलों की निगरानी जरूरी होगी। खासकर उन उत्पादों पर नजर रखनी होगी जो अलग नाम या अलग पैकेजिंग के जरिए प्रतिबंधित सामग्री की बिक्री जारी रखने की कोशिश कर सकते हैं।
अवैध बिक्री के खिलाफ कार्रवाई, बाजार निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की निगरानी इस आदेश के प्रभाव को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कारोबार पर भी पड़ेगा असर
एक साल का प्रतिबंध सिर्फ उपभोक्ताओं को प्रभावित नहीं करेगा। गुटखा और तंबाकू वाले पान मसाला के निर्माण, थोक वितरण, परिवहन और खुदरा बिक्री से जुड़े कारोबार पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।
हालांकि, सरकार के आदेश का उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसलिए अगले कुछ महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंध के बाद बाजार में अवैध आपूर्ति कितनी होती है और प्रशासन उसे रोकने में कितना सफल रहता है।
क्या एक साल बाद फिर से हट सकता है प्रतिबंध?
कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाला पर लगाया गया प्रतिबंध स्थायी नहीं, बल्कि एक साल के लिए है। सरकारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध अधिसूचना जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक लागू रहेगा। इसका मतलब है कि तय अवधि पूरी होने के बाद प्रतिबंध अपने आप स्थायी रूप से जारी नहीं रहेगा।
हालांकि, एक साल बाद सरकार और संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण हालात की समीक्षा कर सकते हैं। यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य, तंबाकू सेवन और प्रतिबंध के प्रभाव को देखते हुए जरूरी समझा गया, तो सरकार इसे आगे भी बढ़ा सकती है। वहीं, यदि प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने का फैसला नहीं लिया जाता, तो संबंधित उत्पादों की बिक्री और वितरण को लेकर स्थिति बदल सकती है।
कर्नाटक के फैसले का बड़ा संदेश
कर्नाटक का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत के कई हिस्सों में तंबाकू और निकोटीन वाले चबाने योग्य उत्पादों के खिलाफ सख्ती जारी है। अलग-अलग राज्यों ने अपने-अपने आदेशों के जरिए ऐसे उत्पादों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई है। केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में भी कई राज्यों द्वारा गुटखा और तंबाकू/निकोटीन वाले पान मसाला के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख मिलता है।
सरकार का नया आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें निर्माण से लेकर बिक्री और परिवहन तक पूरी सप्लाई चेन को प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है। साथ ही अलग-अलग पैकेट में बेचकर उपभोक्ता से उत्पाद मिलवाने जैसी व्यवस्था को भी रोकने की कोशिश की गई है।
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