एंटी-रैगिंग समिति के सदस्य राकेश सिंह ने छात्रों से घटनाओं की रिपोर्ट करने, साथियों का सम्मान करने और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की अपील की
नई दिल्ली: सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) ने बुधवार को प्रथम वर्ष के मेडिकल और नर्सिंग छात्रों के लिए एंटी-रैगिंग कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और एंटी-रैगिंग समिति के सदस्य राकेश कुमार सिंह ने छात्रों को संबोधित किया। उनके साथ सफदरजंग अस्पताल एवं वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना भी मौजूद रहीं।
सिंह ने नए दाखिला लेने वाले छात्रों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से आपसी सम्मान बनाए रखने और रैगिंग या किसी भी तरह के उत्पीड़न की घटना सामने आने पर बिना किसी झिझक के संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देने की अपील की। उन्होंने छात्रों से अपने साथियों का सहयोग करने और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाने में योगदान देने को भी कहा।
कार्यक्रम के दौरान सिंह ने छात्रों के साथ बातचीत की और अनुशासन, जिम्मेदार व्यवहार तथा सीनियर और जूनियर छात्रों के बीच स्वस्थ संबंधों के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर किसी छात्र को रैगिंग से जुड़ी किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो उसे बिना देरी किए संस्थान के निर्धारित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।
डॉ. गीतिका खन्ना ने भी छात्रों को संबोधित किया और कहा कि संस्थान मेडिकल और नर्सिंग छात्रों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एंटी-रैगिंग समिति यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत काम करती है। समिति का उद्देश्य रैगिंग को रोकना, छात्रों के बीच इसके खिलाफ जागरूकता पैदा करना, शिकायतों का समाधान करना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। समिति में स्थानीय मीडिया, प्रशासन, कानूनी क्षेत्र, पुलिस, गैर-सरकारी संगठनों और अभिभावकों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
संस्थान ने हाल ही में स्थानीय मीडिया के प्रतिनिधि के तौर पर सिंह को समिति के सदस्य के रूप में दोबारा नामित किया है। उन्होंने छात्र सुरक्षा, कल्याण और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल को बढ़ावा देने वाली पहलों में सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज हजारों मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं और चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


