जॉनी लीवर की जिंदगी में बेटे जेसी की बीमारी, करियर का मुश्किल दौर और हिंदुस्तान यूनिलीवर की नौकरी ने अहम भूमिका निभाई। जानिए इन घटनाओं ने कैसे बदली उनकी जिंदगी।
मुंबई: हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे हुए हैं जिनका नाम लेते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जॉनी लीवर उन्हीं कलाकारों में से एक हैं। उनके चेहरे के हाव-भाव, आवाज बदलने की कला, अलग-अलग किरदारों की नकल और संवाद बोलने का अंदाज ऐसा रहा कि कई बार फिल्म का मुख्य किरदार भी उनके सामने फीका पड़ जाता था। लेकिन जिस कलाकार ने पर्दे पर लाखों लोगों को हंसाया, उसकी अपनी जिंदगी हमेशा इतनी आसान नहीं रही।
मुंबई की गलियों में पेन बेचने से लेकर स्टेज शो करने और फिर 300 से ज्यादा फिल्मों का हिस्सा बनने तक जॉनी लीवर का सफर भारतीय मनोरंजन जगत की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक है। आर्थिक तंगी के कारण सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले जॉनी ने अपनी नकल करने की प्रतिभा को ही करियर बनाया। आगे चलकर यही हुनर उनकी पहचान बन गया।
14 अगस्त 1957 को जन्मे जॉनी लीवर आज 69 साल के हो गए हैं। उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के उन पहलुओं के बारे में, जो पर्दे पर दिखाई देने वाले उनके मजाकिया अंदाज से बिल्कुल अलग रहे हैं।
जॉनी लीवर का असली नाम क्या है?
जॉनी लीवर का असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है। उनका जन्म 14 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन प्रकाशम जिले के कनिगिरी में एक तेलुगु ईसाई परिवार में हुआ था। हालांकि उनका बचपन मुंबई में बीता और यहीं उन्होंने अपनी कला को पहचान दिलाई।
उनके पिता हिंदुस्तान यूनिलीवर के प्लांट में ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे। परिवार बड़ा था और आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। जॉनी तीन बहनों और दो भाइयों वाले परिवार में सबसे बड़े थे। पैसों की कमी के कारण वह सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इसके बाद कम उम्र में ही उन्हें परिवार की मदद के लिए काम करना पड़ा।
यही वह दौर था जब उनके भीतर की कलाकार प्रतिभा धीरे-धीरे सामने आने लगी।
पेन बेचने से शुरू हुआ संघर्ष
स्कूल छोड़ने के बाद जॉनी ने मुंबई की सड़कों पर पेन बेचने का काम किया। लेकिन वह सिर्फ पेन बेचने वाले बच्चे नहीं थे। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए वह फिल्मी सितारों की नकल करते, डांस करते और लोगों का मनोरंजन करते थे।
मुंबई की चॉल और गलियों में उन्होंने लोगों को देखकर उनके हाव-भाव पकड़ना शुरू किया। फिल्मी सितारों, शिक्षकों और आसपास के लोगों की नकल करने की उनकी आदत धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।
उन्होंने अपने शुरुआती जीवन का एक हिस्सा हैदराबाद के याकुतपुरा में भी बिताया, जहां उन्होंने कॉमेडी और अभिनय की अपनी शैली को और विकसित किया। बाद में यही अनुभव उनके स्टेज परफॉर्मेंस में दिखाई देने लगा।
‘जॉनी लीवर’ कैसे पड़ा नाम?
यह कहानी उनके नाम जितनी ही दिलचस्प है। जॉनी के पिता हिंदुस्तान यूनिलीवर में काम करते थे और बाद में जॉनी भी कंपनी से जुड़े। वहां उन्होंने कर्मचारियों के बीच अपनी मिमिक्री और कॉमेडी से लोकप्रियता हासिल करनी शुरू कर दी।
एक कंपनी कार्यक्रम में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों की नकल की। उनकी परफॉर्मेंस इतनी पसंद की गई कि वहां के लोग उन्हें मजाक में ‘जॉनी लीवर’ कहने लगे। यह नाम इतना मशहूर हुआ कि बाद में उन्होंने इसे ही अपना स्टेज और फिल्मी नाम बना लिया।
यानी ‘लीवर’ किसी फिल्म निर्माता या परिवार से मिला नाम नहीं था, बल्कि उनके हिंदुस्तान यूनिलीवर से जुड़े शुरुआती काम और वहां की एक मजेदार घटना से निकला था।
नौकरी छोड़, कॉमेडी को बनाया करियर
जॉनी लीवर ने हिंदुस्तान यूनिलीवर में करीब छह साल काम किया। लेकिन स्टेज शो और कॉमेडी से उन्हें पहचान और पैसे मिलने लगे। आखिरकार 1981 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और मनोरंजन की दुनिया को पूरी तरह अपना लिया।
उन्होंने म्यूजिकल ऑर्केस्ट्रा और स्टेज कार्यक्रमों में कॉमेडी करना शुरू किया। बाद में वह कल्याणजी-आनंदजी के ग्रुप से जुड़े। उनके साथ देश-विदेश में शो किए और उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ती गई।
उस दौर में भारत में आज की तरह स्टैंड-अप कॉमेडी का बड़ा बाजार नहीं था। ऐसे समय में जॉनी लीवर ने मंच पर अकेले खड़े होकर मिमिक्री, अभिनय, संवाद और शारीरिक हाव-भाव को मिलाकर अपनी अलग शैली बनाई। इसी वजह से उन्हें भारत में स्टैंड-अप कॉमेडी के शुरुआती लोकप्रिय चेहरों में गिना जाता है।
1982 में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ भी शो किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात ऐसे लोगों से हुई जिन्होंने उन्हें फिल्मों तक पहुंचने का रास्ता दिया।
फिल्मों में कैसे हुई एंट्री?
जॉनी लीवर को फिल्मों में शुरुआती मौका ‘तुम पर हम कुर्बान’ से मिला। इसके बाद अभिनेता सुनील दत्त ने उनके स्टेज प्रदर्शन में उनकी प्रतिभा देखी और उन्हें ‘दर्द का रिश्ता’ में काम दिया। यह उनके फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण मोड़ था।
इसके बाद उन्होंने ‘जलवा’, ‘तेजाब’, ‘किशन कन्हैया’, ‘हीरो हीरालाल’, ‘कसम’, ‘खिलाड़ी’ जैसी फिल्मों में काम किया। 1986 में ‘होप 86’ जैसे इंडस्ट्री कार्यक्रम में उनकी परफॉर्मेंस ने भी फिल्म जगत के लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद उनके लिए फिल्मों के दरवाजे लगातार खुलते चले गए।
‘बाजीगर’ से बदली पहचान
1990 का दशक जॉनी लीवर के करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर रहा। ‘बाजीगर’ में बाबूलाल के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी को खूब पसंद किया गया। इसके बाद वह सिर्फ ‘कॉमेडी करने वाले अभिनेता’ नहीं रहे, बल्कि बॉलीवुड की लगभग हर बड़ी कॉमेडी फिल्म के पसंदीदा कलाकार बन गए।
‘छोटा छत्री’, ‘अस्लम भाई’ और कई अन्य किरदारों ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया। उनकी खासियत यह थी कि वह छोटे से छोटे किरदार को भी अपनी बॉडी लैंग्वेज, आवाज और चेहरे के हाव-भाव से यादगार बना देते थे।
‘जुदाई’ का अब्बा-डब्बा-जब्बा हो या ‘दुल्हे राजा’, ‘गोलमाल’ और दूसरी फिल्मों के किरदार, जॉनी ने हर बार साबित किया कि कॉमेडी कलाकार का काम केवल कहानी में हंसी जोड़ना नहीं, बल्कि किरदार को अपनी अलग पहचान देना भी है।
300 से ज्यादा फिल्मों का सफर
जॉनी लीवर ने अब तक 300 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया है। वह सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं रहे और उन्होंने दूसरी भारतीय भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया।
उनके करियर की खास बात यह रही कि उन्होंने एक ही तरह के किरदार को बार-बार दोहराने के बजाय अलग-अलग उच्चारण, आवाज, चाल-ढाल और व्यक्तित्व के साथ कई किरदार निभाए।
उनकी कॉमेडी में मिमिक्री का बड़ा योगदान रहा। वह किसी व्यक्ति या किरदार की केवल आवाज की नकल नहीं करते थे, बल्कि उसके चलने, देखने, बोलने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को भी पकड़ लेते थे। यही वजह है कि उनके कई किरदार आज भी दर्शकों की याद में हैं।
फिल्मफेयर में भी दर्ज है नाम
जॉनी लीवर को फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट कॉमेडियन कैटेगरी के लिए 13 बार नामांकन मिला और उन्होंने दो बार यह पुरस्कार जीता। उन्हें ‘दीवाना मस्ताना’ के लिए 1997 और ‘दुल्हे राजा’ के लिए 1998 में सम्मान मिला।
यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदी फिल्मों में लंबे समय तक कॉमेडी कलाकारों को मुख्य सितारों की तुलना में कम महत्व दिया जाता था। जॉनी लीवर ने अपने काम से इस धारणा को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।
दिन में फिल्म, रात में शो
जॉनी लीवर ने अपने हालिया इंटरव्यू में अपने करियर के सबसे व्यस्त दौर को याद करते हुए बताया कि वह एक दिन में कई फिल्मों की शूटिंग किया करते थे। कभी-कभी वह पांच फिल्मों तक की शूटिंग एक ही दिन में करते थे और 14-15 घंटे लगातार काम करना पड़ता था।
उनके मुताबिक 1990 के दशक के अंत और 2000 के आसपास उनका शेड्यूल इतना व्यस्त था कि शूटिंग खत्म होने के बाद सेट पर ही कुछ घंटे सोना पड़ता था और फिर अगले सेट पर पहुंचना होता था। यह लोकप्रियता बाहर से जितनी शानदार दिखती थी, अंदर से उतनी ही थकाने वाली भी थी।
शराब की लत से भी जूझे जॉनी
जॉनी लीवर ने 2025 में अपने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के उस दौर के बारे में खुलकर बात की जब वह शराब की लत से जूझ रहे थे।
उन्होंने बताया कि वह दिन में फिल्मों की शूटिंग और रात में स्टेज शो करते थे। अत्यधिक काम के बीच शराब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई थी। उन्होंने मुंबई के चौपाटी पर सुबह करीब चार बजे तक शराब पीने की बात भी साझा की।
जॉनी के मुताबिक सफलता ने भी उनके जीवन पर असर डाला। एक समय ऐसा आया जब उन्हें लगता था कि लगभग हर फिल्म में उन्हें लिया जा रहा है और लगातार काम के कारण वह खुद को खोते जा रहे थे।
लेकिन उन्होंने बाद में शराब छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि वह 24 साल से शराब नहीं पी रहे हैं और लोगों को भी शराब का सेवन सीमित रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी शराब के नशे में मंच पर परफॉर्म नहीं किया।
क्या जॉनी लीवर डिप्रेशन में भी रहे?
जॉनी लीवर की जिंदगी के इस पहलू को लेकर अक्सर अलग-अलग बातें सामने आती हैं, लेकिन उनके अपने हालिया इंटरव्यू के मुताबिक करियर के मुश्किल दौर में वह डिप्रेशन में नहीं गए।
2000 के बाद उनके पास फिल्मों का काम अचानक कम हो गया था। उन्होंने बताया कि करीब 13 साल तक उनका काम बहुत कम हो गया और इस दौरान उन्होंने मुश्किल से चार-पांच फिल्मों में काम किया। लेकिन उन्होंने कहा कि वह सकारात्मक बने रहे और खुद को डिप्रेशन में नहीं जाने दिया।
इस दौर में उन्होंने किताबें पढ़ीं, मराठी थिएटर देखा और अपने परिवार के साथ समय बिताया।
हालांकि, अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने मानसिक तनाव और कठिन परिस्थितियों की बात जरूर की है। उन्होंने बताया कि संगीत ने उन्हें मुश्किल समय में राहत दी और उन्हें जीवन को नए नजरिए से देखने में मदद की।
बेटे ‘जेसी’ की बीमारी ने बदल दिया जॉनी का नजरिया
जॉनी लीवर की जिंदगी का सबसे कठिन दौर केवल उनके करियर से जुड़ा नहीं था। उनके बेटे जेसी की गंभीर बीमारी ने भी परिवार को गहरे संकट में डाला।
फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में जॉनी ने बताया कि जब उनका बेटा करीब 10 साल का था, तब उसकी गर्दन में ट्यूमर हो गया था। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन बेहद मुश्किल हो सकता है और नस को नुकसान पहुंचने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। परिवार बेटे को इलाज के लिए अमेरिका ले गया, जहां वह ठीक हुआ।
जॉनी ने यह भी बताया है कि इस घटना ने उनके जीवन और आस्था को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्मों से दूरी बनाई और बेटे के साथ रहने तथा प्रार्थना करने पर ध्यान दिया।
उनके लिए यह सिर्फ बेटे की बीमारी का दौर नहीं था, बल्कि जीवन को देखने का नजरिया बदल देने वाला अनुभव भी था।
पत्नी सुजाता ने दिया साथ
जॉनी लीवर की शादी सुजाता लीवर से 1984 में हुई थी। दोनों के दो बच्चे जेमी लीवर (बेटी) और बेटा जेसी। जेमी ने भी अपने पिता की तरह कॉमेडी और मिमिक्री को करियर बनाया है।
जॉनी ने अपने हालिया इंटरव्यू में पत्नी की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। बेटे की बीमारी और उनके करियर के मुश्किल दौर में सुजाता उनके साथ खड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने न सिर्फ उनका बल्कि पूरे परिवार का ख्याल रखा।
यही वजह है कि जॉनी की निजी जिंदगी की कहानी केवल सफलता और स्टारडम की कहानी नहीं, बल्कि परिवार के सहयोग की कहानी भी है।
69 साल की उम्र में भी जारी है सफर
14 अगस्त 2026 को जॉनी लीवर 69 वर्ष के हो गए हैं, लेकिन उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। हाल के वर्षों में भी वह फिल्मों और मनोरंजन से जुड़े रहे हैं। 2025 में वह ‘हाउसफुल 5’ में नजर आए और उनका काम लगातार नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंच रहा है।
एक ऐसे दौर में जब कॉमेडी का तरीका बदल चुका है और स्टैंड-अप, सोशल मीडिया तथा डिजिटल कंटेंट ने मनोरंजन की नई दुनिया बना दी है, जॉनी लीवर की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि अच्छी कॉमिक टाइमिंग की कोई उम्र नहीं होती।
सड़क पर पेन बेचने वाले उस बच्चे से लेकर बॉलीवुड के सबसे पहचाने जाने वाले हास्य कलाकारों में शामिल होने तक जॉनी लीवर ने लंबा रास्ता तय किया है।
आज उनके नाम के साथ सबसे पहले एक हंसी याद आती है। लेकिन उस हंसी के पीछे छिपी कहानी संघर्ष, अनुशासन, परिवार और खुद को बदलने की क्षमता की कहानी है। शायद यही वजह है कि जॉनी लीवर सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस पीढ़ी के कलाकार हैं जिन्होंने कॉमेडी को एक पहचान और सम्मान दिलाया।
