कुमामोटो में 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने जापान में मचाई। अब तक 13 लोगों की मौत, हजारों प्रभावित और बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियान जारी है।
कुमामोटो/ जापान: जापान में एक बार फिर आए भूकंप की त्रासदी ने पूरे देश को हिला दिया है। दक्षिणी जापान के क्यूशू द्वीप स्थित कुमामोटो प्रांत में मंगलवार (28 जुलाई) को आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी।
भूकंप के बाद इमारतों के ढहने, आग लगने, सड़कें टूटने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आईं। सबसे गंभीर घटनाओं में से एक कुमामोटो के एयॉन मॉल (Aeon Mall) में हुई, जहां भूकंप के बाद एक बड़े विस्फोट ने हालात को और भयावह बना दिया।
भूकंप के बाद शुरू हुए बचाव अभियान में पुलिस, दमकलकर्मी और जापान की Self-Defense Forces जुटी हुई हैं। शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन अगले दिन तक मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। कई लोग घायल हैं और कुछ लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने या लापता होने की आशंका है। जापानी अधिकारियों ने लगातार आफ्टरशॉक्स और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
इस भूकंप ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया है कि जापान जैसे भूकंप-प्रवण देश में आधुनिक तकनीक और मजबूत इमारतों के बावजूद प्राकृतिक आपदाएं कितनी बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
28 जुलाई को कांपी कुमामोटो की धरती
मंगलवार (28 जुलाई) को दक्षिणी जापान के क्यूशू क्षेत्र में आए इस भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण में बताया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.1 थी। कुमामोटो शहर की आबादी करीब 7 लाख है और आसपास का क्षेत्र जापान के महत्वपूर्ण औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों में भी शामिल है।
भूकंप के झटकों के बाद कई इलाकों में लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और कुछ संरचनाएं ढह गईं। सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत एवं बचाव टीमों के लिए कुछ स्थानों तक पहुंचना भी मुश्किल था।
जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी लगातार भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रख रही है। भूकंप के बाद कई छोटे और मध्यम तीव्रता के झटके महसूस किए गए। आधिकारिक रिकॉर्ड में कुमामोटो क्षेत्र में 28 जुलाई को कई आफ्टरशॉक दर्ज किए गए, जिनमें कुछ झटकों की तीव्रता 4 से अधिक थी।
Aeon Mall में विस्फोट ने बढ़ाई चिंता
भूकंप से जुड़ी सबसे गंभीर घटनाओं में से एक Aeon Mall Kumamoto में सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के बाद मॉल के एक हिस्से में बड़ा विस्फोट हुआ और संरचना को भारी नुकसान पहुंचा। शुरुआती जानकारी में आशंका जताई गई कि यह घटना गैस लीक से जुड़ी हो सकती है, हालांकि घटना के कारणों की जांच जारी है।
भूकंप के दौरान मॉल में मौजूद लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। बचाव दल ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ लोगों को चोटें आईं और कुछ की हालत गंभीर बताई गई। मॉल में मौजूद कुछ कर्मचारियों के लापता होने की भी आशंका जताई जा रही है, जिसके बाद से खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
इस घटना ने खास चिंता इसलिए भी बढ़ाई क्योंकि Aeon Mall को 2016 के विनाशकारी कुमामोटो भूकंप के बाद लंबे पुनर्निर्माण और सुरक्षा सुधारों के पश्चात हाल ही में फिर से खोला गया था। इस तरह यह स्थान कुमामोटो के पुनर्निर्माण और सामान्य जीवन की वापसी का प्रतीक बन गया था। लेकिन 28 जुलाई के भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया।
मौतों का आंकड़ा बढ़ा, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
भूकंप के बाद शुरुआती घंटों में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। एक व्यक्ति की मौत इमारत ढहने की घटना में हुई, जबकि मॉल में हुई घटना के बाद भी लोगों के हताहत होने की खबर सामने आई। ताजा जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। जापान सरकार ने पुलिस और दमकल विभाग के साथ Self-Defense Forces के हजारों जवानों को भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 4,500 सैन्यकर्मी बचाव कार्यों में जुटे हैं।
बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती आफ्टरशॉक का खतरा है। किसी बड़े भूकंप के बाद कमजोर हो चुकी इमारतें दोबारा आने वाले झटकों में गिर सकती हैं। इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है।
2.6 लाख लोगों को रेस्क्यू किया गया
भूकंप के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 2.6 लाख लोगों को निकासी या राहत व्यवस्था के दायरे में लाया गया। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा है।
भूकंप प्रभावित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। हजारों घरों में बिजली चली गई और कई जगहों पर परिवहन व्यवस्था बाधित हुई। रेल सेवाएं रोक दी गईं और कुछ स्थानों पर सड़कें टूटने के कारण यातायात प्रभावित हुआ।
जापान में गर्मी का मौसम होने के कारण राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए हीटस्ट्रोक का खतरा भी एक अतिरिक्त चिंता बन गया है। ऐसे में प्रशासन को भूकंप से बचाव के साथ-साथ लोगों को पर्याप्त पानी, चिकित्सा सुविधा और गर्मी से राहत उपलब्ध कराने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने की लोगों से सतर्क रहने की अपील
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भूकंप के बाद लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आफ्टरशॉक की संभावनाओं को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा।
जापान सरकार और स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल मलबे में फंसे लोगों को बचाना, घायलों को चिकित्सा सहायता देना और प्रभावित इलाकों में आवश्यक सेवाएं बहाल करना है। राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ सरकार नुकसान का विस्तृत आकलन भी कर रही है।
बिजली और परिवहन व्यवस्था प्रभावित
भूकंप के कारण कुमामोटो और आसपास के इलाकों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। बिजली आपूर्ति बाधित हुई, सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर प्रशासन को यातायात रोकना पड़ा ताकि क्षतिग्रस्त संरचनाओं और सड़कों की जांच की जा सके।
आपदा के दौरान अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ा। कई घायल लोगों को उपचार की जरूरत पड़ी, जबकि बिजली आपूर्ति में बाधा के कारण कुछ स्वास्थ्य केंद्रों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं के साथ काम करना पड़ा।
भूकंप के बाद संचार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था पर भी असर पड़ा, जिससे राहत सामग्री और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की चुनौती बढ़ी।
जापान के उद्योग ठप
कुमामोटो क्षेत्र सिर्फ आवासीय और पर्यटन क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह जापान के महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी उभर रहा है। हाल के वर्षों में यहां कई बड़ी कंपनियों ने निवेश किया है।
भूकंप के बाद कई औद्योगिक इकाइयों ने सुरक्षा जांच के लिए अपने परिचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया। Toyota, Honda, Sony, TSMC, Renesas और Tokyo Electron जैसी कंपनियों की क्षेत्रीय गतिविधियां प्रभावित हुईं या सुरक्षा निरीक्षण के कारण अस्थायी रूप से रोकी गईं। इससे यह चिंता भी बढ़ी कि भूकंप का असर जापान की ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

क्यूशू क्षेत्र वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल उत्पादन श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए अगर उत्पादन और परिवहन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकता।
कुमामोटो में भूकंप की वजह
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप-प्रवण देशों में से एक है। इसका मुख्य कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। जापान Pacific Ring of Fire क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि होती रहती है।
कुमामोटो क्षेत्र भी सक्रिय भूगर्भीय संरचनाओं और फॉल्ट लाइनों के प्रभाव वाले क्षेत्र में आता है। यही कारण है कि यहां पहले भी बड़े भूकंप आ चुके हैं।
कुमामोटो में सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक अप्रैल 2016 का भूकंप था। उस समय 7.3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था और 270 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इस आपदा ने क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को दुनिया के सामने ला दिया था।
2026 का भूकंप ऐसे समय आया है जब कुमामोटो ने एक दशक पहले की आपदा के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण किया था। यही वजह है कि मौजूदा भूकंप से हुई तबाही ने स्थानीय लोगों के बीच चिंता और डर को फिर से बढ़ा दिया है।
जापान के लिए बढ़ती चुनौती
कुमामोटो में तत्काल चुनौती मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और घायलों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाना है। इसके बाद सरकार को क्षतिग्रस्त इमारतों का सर्वेक्षण, बिजली और परिवहन व्यवस्था की बहाली तथा लोगों को उनके घरों में सुरक्षित वापसी की व्यवस्था करनी होगी।
सबसे महत्वपूर्ण चिंता अभी भी आफ्टरशॉक को लेकर है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि बड़े भूकंप के बाद आने वाले झटके कमजोर संरचनाओं को और नुकसान पहुंचा सकते हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।

इसके साथ ही, सरकार के सामने यह चुनौती भी है कि वह प्रभावित लोगों को लंबे समय तक राहत और पुनर्वास सहायता कैसे उपलब्ध कराए। जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए अस्थायी आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधा जरूरी होगी।
एक बार फिर सामने आया जापान का आपदा प्रबंधन मॉडल
कुमामोटो भूकंप ने एक बार फिर जापान की आपदा प्रबंधन प्रणाली की परीक्षा ली है। एक तरफ 7.1 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई, वहीं दूसरी ओर जापान की प्रशिक्षित आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।
लेकिन इस आपदा ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि कोई भी देश प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। मजबूत इमारतें और आधुनिक तकनीक जान-माल के नुकसान को कम कर सकती हैं, लेकिन बड़े भूकंप के बाद बचाव, पुनर्वास और बुनियादी सेवाओं की बहाली हमेशा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
फिलहाल कुमामोटो में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं और प्रभावित इलाकों में जरूरी सेवाएं बहाल करने की कोशिश कर रही हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका के बीच पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया जा सके। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि इस विनाशकारी भूकंप का वास्तविक मानवीय और आर्थिक नुकसान कितना बड़ा है।
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