Monday, 03 August 2026
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दिल्ली में भारत टेक्स 2026 का आगाज, 127 देशों ने दर्ज कराई भागीदारी

छह दिवसीय इस आयोजन में 127 देशों की भागीदारी दर्ज की गई है और 6,000 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं; कार्यक्रम का मुख्य फोकस टिकाऊ कपड़ों, हथकरघा उत्पादों और नई तकनीकों पर रहेगा

नई दिल्ली: दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में सोमवार से भारत टेक्स 2026 के चौथे संस्करण का शुभारंभ हुआ। छह दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश और विदेश के कपड़ा निर्माता, निर्यातक, कारीगर, डिजाइनर, उद्योग विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हथकरघा) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय कपड़ा उद्योग को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना, निर्यात को बढ़ावा देना और टिकाऊ उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

इस बार भारत टेक्स में 127 देशों की भागीदारी है और 6,000 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं। यह भारत के सबसे बड़े कपड़ा व्यापार आयोजनों में से एक है। यहां हथकरघा, हस्तशिल्प, रेडीमेड कपड़े, तकनीकी वस्त्र, पर्यावरण के अनुकूल फैब्रिक, कपड़ा मशीनरी और नई तकनीकों से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। साथ ही, यह आयोजन खरीदारों और विक्रेताओं को व्यापार बढ़ाने और नई साझेदारियां बनाने का अवसर भी दे रहा है।

भारत टेक्स 2026 के साथ वीव द फ्यूचर 4.0 (Weave the Future 4.0) कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें लोग पुराने कपड़ों की मरम्मत, उन्हें नए तरीके से इस्तेमाल करने (अपसाइक्लिंग) और रीसाइक्लिंग के तरीके सीख सकते हैं। इस पहल में 100 से अधिक कंपनियां, कारीगर समूह, डिजाइनर और स्टार्टअप हिस्सा ले रहे हैं। यहां कार्यशालाएं, पुराने कपड़े जमा करने के अभियान और बेकार कपड़ों से नए उत्पाद बनाने का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय (नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम) में इंडी हाट 2026 का भी आयोजन हो रहा है। यहां देशभर के बुनकर और कारीगर अपने पारंपरिक उत्पादों और कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। आगंतुक उनसे सीधे बातचीत कर सकते हैं और भारत की समृद्ध कपड़ा परंपरा के बारे में जान सकते हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत के कपड़ा उद्योग को अब पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि उद्योग को ऐसे तरीके अपनाने चाहिए जिनमें पानी और कार्बन उत्सर्जन कम हो तथा पुराने कपड़ों का दोबारा बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

उन्होंने बताया कि भारत में हर व्यक्ति पहले की तुलना में अब लगभग दोगुने कपड़े इस्तेमाल कर रहा है। इसके कारण कपड़ा कचरा भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में हर साल करीब 7.8 लाख टन कपड़ा कचरा निकलता है और इसे नए उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए उद्योग को नई तकनीक और नवाचार अपनाने चाहिए।

गिरिराज सिंह ने कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग की तरक्की का लाभ श्रमिकों तक भी पहुंचना चाहिए और उनकी मासिक आय कम से कम ₹15,000 से ₹20,000 होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत टेक्स तेजी से दुनिया के बड़े कपड़ा आयोजनों में अपनी पहचान बना रहा है और आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक कपड़ा और टिकाऊ उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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