Monday, 22 June 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
Bharat Tiwari Encounter: सिस्टम से लड़ने वाला नायक या कानून को चुनौती देने वाला युवक? जानिए भरत तिवारी की कहानी क्या स्टेबलकॉइन्स बढ़ाएंगे डॉलर का दबदबा? जानिए वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव FIFA World Cup 2026: आज मेसी, एम्बाप्पे और हालैंड पर होगी दुनिया की नजरें! फीफा विश्व कप 2026 में आज चार बड़े मुकाबले ENG vs NZ 2ND Test: 14 हजारी बने जो रूट, क्या अगले टेस्ट मैच में टूटेगा सचिन का बड़ा रिकॉर्ड? इंदिरा आईवीएफ ने व्हाइटफील्ड में शुरू किया पूर्ण विकसित फर्टिलिटी हॉस्पिटल, उन्नत उपचार सेवाएं होंगी उपलब्ध IND A vs SL A Final: फिर आया वैभव सूर्यवंशी का तूफान, 29 गेंदों में बनाए 94 रन, भारत ए ने श्रीलंका ए को 66 रन से हराकर जीती त्रिकोणीय सीरीज राजघाट में ‘रन अगेंस्ट ड्रग एब्यूज’ के 24वें संस्करण का आयोजन, 2000 से ज्यादा लोगों ने नशा मुक्त भारत अभियान का समर्थन किया नीट अभ्यर्थियों से निराश न होने का आग्रह करते हुए डॉ. के.ए. पॉल ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने की मांग की Bharat Tiwari Encounter: सिस्टम से लड़ने वाला नायक या कानून को चुनौती देने वाला युवक? जानिए भरत तिवारी की कहानी क्या स्टेबलकॉइन्स बढ़ाएंगे डॉलर का दबदबा? जानिए वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव FIFA World Cup 2026: आज मेसी, एम्बाप्पे और हालैंड पर होगी दुनिया की नजरें! फीफा विश्व कप 2026 में आज चार बड़े मुकाबले ENG vs NZ 2ND Test: 14 हजारी बने जो रूट, क्या अगले टेस्ट मैच में टूटेगा सचिन का बड़ा रिकॉर्ड? इंदिरा आईवीएफ ने व्हाइटफील्ड में शुरू किया पूर्ण विकसित फर्टिलिटी हॉस्पिटल, उन्नत उपचार सेवाएं होंगी उपलब्ध IND A vs SL A Final: फिर आया वैभव सूर्यवंशी का तूफान, 29 गेंदों में बनाए 94 रन, भारत ए ने श्रीलंका ए को 66 रन से हराकर जीती त्रिकोणीय सीरीज राजघाट में ‘रन अगेंस्ट ड्रग एब्यूज’ के 24वें संस्करण का आयोजन, 2000 से ज्यादा लोगों ने नशा मुक्त भारत अभियान का समर्थन किया नीट अभ्यर्थियों से निराश न होने का आग्रह करते हुए डॉ. के.ए. पॉल ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने की मांग की

भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स की तेज़ बढ़त, पर नियामकीय तस्वीर अब भी साफ नहीं

नई दिल्ली , 26 मार्च 2026

भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीएज़) को लेकर आज एक स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। एक तरफ देश क्रिप्टो अपनाने के मामले में लगातार दुनिया में अग्रणी बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इस क्षेत्र को लेकर नीतिगत स्पष्टता का अभाव भी साफ नजर आता है। यह अंतर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति और व्यवहार के बीच बढ़ती दूरी को भी दिखाता है।

चेनालिसिस की रैंकिंग में लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष स्थान हासिल करना और वेब थ्री तथा पब्लिक ब्लॉकचेन से जुड़े विभिन्न अध्ययनों में भारत का प्रमुख डिजिटल एसेट बाजार के रूप में उभरना इस बात का संकेत है कि देश में इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाया जा चुका है। वीज़ा इंक की एक हालिया स्टडी भी भारत को तुर्की और ब्राज़ील जैसे उभरते बाजारों के साथ क्रिप्टो अपनाने के प्रमुख केंद्रों में रखती है। इसके साथ ही, भारत का बढ़ता डेवलपर बेस—जहां इंजीनियर और संस्थापक वैश्विक ब्लॉकचेन प्रोटोकॉल्स और स्टार्टअप्स में योगदान दे रहे हैं—इस प्रवृत्ति को और मजबूत करता है।

इसके बावजूद, सरकार का दृष्टिकोण अब तक सतर्क और सीमित रहा है। पूंजी नियंत्रण, वित्तीय स्थिरता और भुगतान प्रणाली की सुरक्षा जैसी चिंताएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट्स की प्रकृति पारंपरिक वित्तीय ढांचे से अलग है। यह एक सीमाहीन और इंटरनेट आधारित प्रणाली है, जिसे पुराने नियमों के जरिए पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2013 से ही इस क्षेत्र से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद 2018 में ऐसा प्रतिबंध लगाया गया, जिसने विनियमित वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टो से जुड़ी सेवाएं देने से रोक दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में इस प्रतिबंध को निरस्त कर दिया, लेकिन इसके बाद भी नीतिगत अनिश्चितता बनी रही। इस बीच, सरकार ने टैक्स को एक अंतरिम समाधान के रूप में अपनाया, ताकि सट्टात्मक गतिविधियों पर कुछ नियंत्रण रखा जा सके, जबकि व्यापक नियामकीय चर्चाएं जारी रहीं।

वर्तमान में टैक्स की धारा 393(1) के तहत ₹10,000 से अधिक के लेन-देन पर 1 प्रतिशत टीडीएस और लाभ पर 30 प्रतिशत टैक्स, जिसमें हानि समायोजन की अनुमति नहीं है—लागू है। इसका उद्देश्य लेन-देन की ट्रेसबिलिटी बढ़ाना और राजस्व निगरानी को मजबूत करना था, लेकिन इसके परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं रहे और स्थिति जटिल बनी रही।

उद्योग के अनुमानों के अनुसार, जुलाई 2022 से दिसंबर 2023 के बीच भारतीय उपयोगकर्ताओं ने ₹1.03 ट्रिलियन से अधिक का ट्रेड ऑफशोर या गैर-अनुपालन प्लेटफॉर्म्स पर किया, जबकि इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही घरेलू एक्सचेंजों पर रहा। इस बदलाव के कारण हजारों करोड़ रुपये के संभावित टैक्स राजस्व का नुकसान हुआ। यह रुझान 2025 तक और तेज़ हो गया, जहां ऑफशोर ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने के साथ-साथ अपूर्ण टीडीएस देनदारियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं का विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर जाना इस बात को भी दिखाता है कि वहां न तो प्रभावी निगरानी संभव है और न ही टैक्स संग्रह सुनिश्चित हो पाता है। सरकार द्वारा दिसंबर 2023 में विदेशी एक्सचेंजों के यूआरएल ब्लॉक करने जैसे कदम भी लंबे समय में प्रभावी नहीं रहे। तकनीकी उपायों—जैसे वीपीएन, मिरर साइट्स और वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स—के जरिए उपयोगकर्ता इन प्रतिबंधों को पार कर लेते हैं। कई मामलों में, ब्लॉक किए गए प्लेटफॉर्म्स पर वेब ट्रैफिक बाद में फिर बढ़ गया, जो यह दिखाता है कि वैश्विक डिजिटल बाजारों को केवल प्रतिबंधों के जरिए नियंत्रित करना व्यावहारिक नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी यही संकेत देते हैं कि समाधान प्रतिबंधों में नहीं, बल्कि संतुलित और जोखिम आधारित नियामकीय ढांचे में है। आईएमएफ, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड और एफएटीएफ जैसी संस्थाएं इस दिशा में समन्वित और व्यापक ढांचे की वकालत करती हैं। इन ढांचों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घरेलू रूप से विनियमित वर्चुअल एसेट सेवा प्रदाता (वीएएसपी) होते हैं, जो अनुपालन सुनिश्चित करने, लेन-देन की दृश्यता बढ़ाने और नियामकों को उद्योग से जोड़ने का काम करते हैं।

हालांकि, जब उपयोगकर्ता ऑफशोर और गैर-अनुपालन प्लेटफॉर्म्स की ओर जाते हैं, तो सरकार की जोखिम प्रबंधन क्षमता—जैसे उपभोक्ता संरक्षण और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम—कम हो जाती है, और संभावित टैक्स राजस्व का भी नुकसान होता है।

इस संदर्भ में भारत के घरेलू प्लेटफॉर्म्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। संचालन संबंधी चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने नियामकीय अपेक्षाओं के अनुरूप ढलने की इच्छा दिखाई है। भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा निगरानी ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण के खिलाफ उपायों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत की है।

हालिया सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया से बाजार की बढ़ती परिपक्वता भी सामने आई है—जहां एक्सचेंजों ने साइबर सुरक्षा मजबूत की, आकस्मिक भंडार बनाए और उद्योग स्तर पर जोखिम प्रबंधन में सहयोग बढ़ाया। इसके अलावा, ये प्लेटफॉर्म रोजगार, निवेश और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

आज भारत के सामने चुनौती यह नहीं है कि वीडीएज़ को स्वीकार किया जाए या नहीं—यह चरण अब पार हो चुका है। असली सवाल यह है कि क्या देश इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र के लिए एक संतुलित, स्पष्ट और व्यावहारिक नीति ढांचा तैयार कर पाएगा।

भारत का वीडीए इकोसिस्टम एक ऐसे अधूरे संतुलन को दर्शाता है, जहां पूर्ण विकसित नियामकीय ढांचे के बिना टैक्स लागू है। यदि यह अंतर जारी रहता है, तो न केवल नियामकीय नियंत्रण कमजोर होगा, बल्कि संभावित आर्थिक अवसर भी सीमित हो सकते हैं। ऐसे में जरूरत है कि अस्थायी उपायों से आगे बढ़कर एक सुसंगत और व्यापक विधायी ढांचा तैयार किया जाए, जो स्थिरता, नवाचार और पारदर्शिता—तीनों को साथ लेकर चले, और तेजी से विकसित हो रहे इस बाजार में नियामकीय नियंत्रण को भी मजबूत करे।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।