देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच लू के मामले सामने आ रहे हैं। जानिए किन 7 तरह के मरीजों पर Heatwave का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। तेज धूप, बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं के कारण लू (Heatwave) का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। आम लोगों के लिए भीषण गर्मी परेशानी का कारण बन सकती है, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जिनके लिए लू जानलेवा साबित हो सकती है। खासतौर पर बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को गर्मी के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक गर्मी में शरीर अपने तापमान को नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस करता है। जब शरीर अत्यधिक गर्म हो जाता है और पसीने के जरिए तापमान कम नहीं कर पाता, तो हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी बन सकता है।
गर्मियों में लू से बचाव के लिए हर व्यक्ति को सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन कुछ मरीज ऐसे होते हैं जिन पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ सकता है।
1. बुजुर्ग मरीज (Elderly Patients)
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की गर्मी को नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। बुजुर्ग लोगों में पसीना कम निकलना, शरीर में पानी की कमी जल्दी होना और तापमान में बदलाव को सहन करने की क्षमता कम होना आम बात है।
अगर कोई बुजुर्ग व्यक्ति पहले से किसी बीमारी जैसे ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या कमजोरी से परेशान है तो लू का असर और गंभीर हो सकता है।
ऐसे लोगों को:
- दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए
- हल्के और ढीले कपड़े पहनने चाहिए
- शरीर में कमजोरी, चक्कर या अत्यधिक थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
2. दिल के मरीज (Heart Patients)
हृदय रोग (Heart Disease) से पीड़ित मरीजों के लिए तेज गर्मी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। गर्म मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
गर्मी में शरीर से पसीने के जरिए पानी और नमक की कमी हो सकती है, जिससे ब्लड प्रेशर और हृदय की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
दिल के मरीजों में लू के दौरान:
- सांस लेने में परेशानी
- सीने में दर्द
- अधिक कमजोरी
- चक्कर आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
ऐसे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाई लेते रहना चाहिए और गर्मी में शरीर को ज्यादा तनाव देने से बचना चाहिए।
3. डायबिटीज के मरीज (Diabetic Patients)
मधुमेह (Diabetes) के मरीजों में गर्मी के दौरान डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का खतरा ज्यादा रहता है। Blood Sugar के स्तर में अचानक बदलाव परेशानी पैदा कर सकती है। ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes) की भी कमी हो सकती है।
डायबिटीज मरीजों को:
- नियमित रूप से ब्लड शुगर जांचते रहना चाहिए
- ज्यादा देर तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए
- पानी की पर्याप्त मात्रा लेनी चाहिए
- तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए
गर्मी के मौसम में पैरों और त्वचा की देखभाल करना भी जरूरी है क्योंकि डायबिटीज में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
4. किडनी के मरीज (Kidney Patients)
किडनी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। जिन लोगों को किडनी से जुड़ी बीमारी होती है, उनके लिए ज्यादा गर्मी और डिहाइड्रेशन समस्या बढ़ा सकता है।
पानी की कमी से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हालांकि किडनी के कुछ मरीजों को डॉक्टर पानी की मात्रा सीमित करने की सलाह देते हैं, इसलिए ऐसे मरीजों को अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
इन लोगों को:
- तेज गर्मी में बाहर निकलने से बचना चाहिए
- शरीर में पानी की कमी के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए
- कमजोरी या पेशाब में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
5. छोटे बच्चे (Small Children)
छोटे बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता। इसलिए गर्मी का असर उन पर जल्दी हो सकता है।
बच्चों में लू के लक्षण:
- ज्यादा रोना या चिड़चिड़ापन
- कमजोरी
- सुस्ती
- शरीर गर्म होना हो सकते हैं।
माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे धूप में ज्यादा देर तक न खेलें। उन्हें समय-समय पर पानी और तरल पदार्थ देते रहना चाहिए।
बच्चों को बंद कार या गर्म कमरे में बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि तापमान तेजी से बढ़ सकता है।
6. गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women)
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं और गर्मी का असर ज्यादा महसूस हो सकता है। लू और डिहाइड्रेशन गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। ज्यादा गर्मी में थकान, चक्कर और कमजोरी की समस्या हो सकती है।
गर्भवती महिलाओं को:
- धूप में जाने से बचना चाहिए
- पर्याप्त पानी पीना चाहिए
- आराम करना चाहिए
- शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को डॉक्टर को बताना चाहिए
7. सांस की बीमारी वाले मरीज (Respiratory Patients)
अस्थमा, COPD या अन्य सांस संबंधी बीमारियों वाले मरीजों पर गर्मी और प्रदूषण का असर ज्यादा हो सकता है। गर्म हवा और धूल के कारण सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे मरीजों को खासकर गर्म और सूखे मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें अपनी दवाएं समय पर लेनी चाहिए और ज्यादा गर्म वातावरण से बचना चाहिए।
लू लगने के सामान्य लक्षण क्या हैं?
लू लगने पर शरीर कुछ संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे कि –
- तेज सिर दर्द
- चक्कर आना
- अत्यधिक कमजोरी
- तेज बुखार जैसा महसूस होना
- उल्टी या जी मिचलाना
- भ्रम की स्थिति
- बेहोशी
हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को तुरंत ठंडी जगह ले जाना चाहिए और चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
लू से बचने के आसान तरीके
गर्मी के मौसम में कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर लू के खतरे को कम किया जा सकता है:
- सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप से बचें
- हल्के रंग और ढीले कपड़े पहनें
- पर्याप्त पानी पिएं
- बाहर जाते समय सिर ढकें
- धूप में ज्यादा मेहनत वाले काम करने से बचें
- ORS जैसे इलेक्ट्रोलाइट घोल का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करें
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