Friday, 14 August 2026
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स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में बम धमकियों से मचा हड़कंप, हाई कोर्ट और IGI एयरपोर्ट समेत कई जगहों पर अलर्ट

दिल्ली में 15 अगस्त से पहले कई महत्वपूर्ण स्थानों को बम धमकी वाले ईमेल मिलने से सुरक्षा बढ़ा दी गई। हाई कोर्ट और IGI एयरपोर्ट समेत कई जगहों पर जांच की गई।

नई दिल्ली: देश 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है और इसी बीच राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 14 अगस्त को कई महत्वपूर्ण स्थानों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया।

दिल्ली हाई कोर्ट, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (IGI) के टर्मिनल-3 और दिल्ली कैंट स्थित SDM कार्यालय समेत कई स्थानों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए। इसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संबंधित परिसरों की जांच शुरू कर दी। शुरुआती तलाशी में किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की जानकारी नहीं है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर दिल्ली में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। लाल किले पर प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम होने के कारण राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कई स्तरों पर सुरक्षा जांच चल रही है। ऐसे में एक ही दिन में कई महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाकर भेजे गए धमकी भरे संदेशों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

किन-किन जगहों को मिली धमकी?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के अलावा कम से कम छह अन्य स्थानों को धमकी मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें जामनगर हाउस, झंडेवालान बिल्डिंग, साकेत स्थित एक कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय, IGI एयरपोर्ट का टर्मिनल-3 और दिल्ली कैंट का SDM कार्यालय शामिल हैं।

धमकी वाले ईमेल का विषय “Blast Delhi High Court @2:11 PM” था। ईमेल में दिल्ली के कई स्थानों को निशाना बनाने की बात कही गई थी और संदेश कथित तौर पर खालिस्तान के नाम से भेजा गया था। हालांकि, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि किसी संगठन की ओर से भेजे जाने का दावा अपने आप में उस संगठन की वास्तविक संलिप्तता साबित नहीं करता। इसकी पुष्टि जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही हो सकती है।

शुरुआती जांच में किसी स्थान से विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु बरामद होने की सूचना नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि धमकी को तुरंत नजरअंदाज किया गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ऐसे हर संदेश को गंभीरता से लेकर परिसर की तलाशी लेना जरूरी होता है।

दिल्ली हाई कोर्ट को ईमेल से मिली धमकी

इस घटनाक्रम का सबसे प्रमुख हिस्सा दिल्ली हाई कोर्ट को मिली धमकी है। 14 अगस्त की सुबह हाई कोर्ट को ईमेल के जरिए बम धमकी मिली, जिसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने दिल्ली पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट परिसर में जांच शुरू की।

दिल्ली हाई कोर्ट के जॉइंट सेक्रेटरी अधिवक्ता कुणाल ने शुरुआती स्थिति के बारे में बताया कि धमकी फर्जी प्रतीत हो रही है और परिसर में स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि बम स्क्वॉड और प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स पूरे परिसर की जांच कर रहे थे।

इस तरह की स्थिति में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां केवल उस जगह की जांच नहीं करतीं जहां संभावित खतरे की जानकारी मिली हो, बल्कि आसपास के क्षेत्रों, प्रवेश-निकास बिंदुओं और संभावित संवेदनशील हिस्सों की भी जांच करती हैं।

IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 को भी बनाया निशाना

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, खासकर टर्मिनल-3, राजधानी के सबसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों में शामिल है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्री आते-जाते हैं। इसलिए एयरपोर्ट को मिलने वाली किसी भी सुरक्षा चेतावनी पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।

14 अगस्त को IGI के टर्मिनल-3 को भी धमकी मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

एयरपोर्ट जैसी जगह पर बम की धमकी मिलने का असर केवल सुरक्षा जांच तक सीमित नहीं रहता। यात्रियों की आवाजाही, प्रवेश व्यवस्था, सामान की जांच और सुरक्षा घेरे को भी अतिरिक्त सतर्कता के साथ संचालित करना पड़ता है। हालांकि, उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना के कारण IGI एयरपोर्ट पर व्यापक परिचालन बाधित होने की पुष्टि नहीं हुई है।

धमकी के बाद की प्रतिक्रिया

धमकी मिलने के बाद संबंधित स्थानों पर सुरक्षा बलों और बम निरोधक टीमों को भेजा गया। फायर टेंडर और सुरक्षा टीमें भी संबंधित स्थानों पर तैनात की गईं और तलाशी अभियान शुरू किया गया। शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

ऐसे मामलों में बम डिस्पोजल स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। प्रशिक्षित खोजी कुत्ते संदिग्ध विस्फोटक या अन्य खतरनाक सामग्री की पहचान में मदद करते हैं, जबकि बम निरोधक विशेषज्ञ संदिग्ध वस्तु मिलने की स्थिति में उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया अपनाते हैं।

इस मामले में अभी तक किसी विस्फोटक के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे बम धमकी का मामला कहा जाना चाहिए, न कि वास्तविक बम मिलने या विस्फोट की घटना।

क्या यह धमकी फर्जी है?

शुरुआती जांच के आधार पर अधिकारियों की ओर से धमकी को फर्जी या ‘होएक्स’ बताए जाने की बात सामने आई है। दिल्ली हाई कोर्ट से जुड़े अधिकारी ने भी इसे फर्जी प्रतीत होने की बात कही है।

लेकिन किसी धमकी को फर्जी घोषित करने का अंतिम आधार जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होता है। पुलिस को यह पता लगाना होता है कि ईमेल कहां से भेजा गया, किस सिस्टम या इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल हुआ, संदेश भेजने वाले की पहचान क्या है और क्या इसके पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका थी।

इसलिए जब तक जांच पूरी नहीं होती, धमकी को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले बढ़ी चिंता

इस घटना का समय इसे और संवेदनशील बना देता है। 15 अगस्त को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे। इस राष्ट्रीय समारोह को देखते हुए दिल्ली में पहले से ही सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया गया है।

लाल किला और उसके आसपास का इलाका हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस से पहले हाई सिक्योरिटी जोन में बदल जाता है। इस साल भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। दिल्ली में यातायात प्रतिबंध, निगरानी, जांच और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है।

ऐसे समय में हाई कोर्ट, एयरपोर्ट और सरकारी कार्यालयों जैसे अलग-अलग स्थानों को एक साथ निशाना बनाकर धमकी मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अतिरिक्त चुनौती है।

लाल किले को भी पहले मिल चुकी है धमकी

यह पहली बार नहीं है जब स्वतंत्रता दिवस के आसपास दिल्ली के प्रमुख स्थान को बम धमकी मिली हो। जुलाई 2026 में भी लाल किले को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। उस समय धमकी मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को फोन के जरिए मिली थी। सूचना दिल्ली पुलिस को भेजी गई और नॉर्थ दिल्ली पुलिस ने लाल किले की व्यापक तलाशी ली। जांच के बाद उस कॉल को होएक्स पाया गया था।

यह पिछली घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लाल किला स्वतंत्रता दिवस समारोह का मुख्य स्थल है और उसकी सुरक्षा को लेकर किसी भी खतरे को बेहद गंभीरता से लिया जाता है।

पहले भी मिल चुके हैं ऐसे होएक्स

राजधानी में पिछले कुछ वर्षों में बम धमकी के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनकी जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिला। स्कूलों, अस्पतालों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों को ईमेल या फोन के जरिए धमकियां मिलती रही हैं।

2026 में भी दिल्ली के कई स्कूलों को ईमेल के जरिए बम धमकियां मिली थीं। इसी तरह फरवरी 2026 में दिल्ली सचिवालय, दिल्ली विधानसभा, लाल किला और कुछ स्कूलों को भी धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे। तलाशी के बाद उन धमकियों को होएक्स पाया गया था।

इन घटनाओं से एक गंभीर समस्या सामने आती है। भले ही धमकी फर्जी निकले, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को हर बार वास्तविक खतरे की तरह प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। इसका कारण यह है कि शुरुआत में यह पता लगाना संभव नहीं होता कि संदेश भेजने वाला केवल डर पैदा करना चाहता है या वास्तव में किसी हमले की तैयारी कर रहा है।

होएक्स धमकियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती

बम धमकी का सबसे बड़ा प्रभाव केवल संभावित विस्फोट का खतरा नहीं है। ऐसी सूचना मिलने के बाद पुलिस, फायर सर्विस, बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और अन्य एजेंसियों को तत्काल सक्रिय होना पड़ता है।

अगर किसी एयरपोर्ट को धमकी मिले तो यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता बन जाती है। किसी अदालत को धमकी मिले तो कर्मचारियों, वकीलों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ती है। सरकारी कार्यालयों में भी कर्मचारियों और आगंतुकों की आवाजाही को नियंत्रित करना पड़ सकता है।

यानी फर्जी धमकी भी प्रशासन के लिए वास्तविक संसाधन और समय की मांग पैदा करती है। इसके अलावा ऐसी घटनाओं से आम लोगों में डर और अफवाहों का माहौल बन सकता है।

किस दिशा में जांच?

अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल यह होगा कि धमकी वाला ईमेल किसने भेजा। इसके लिए साइबर जांच महत्वपूर्ण होगी। ईमेल के तकनीकी विवरण, सर्वर रिकॉर्ड, आईपी से जुड़ी जानकारी और अन्य डिजिटल संकेतों की जांच की जा सकती है।

हालांकि, ईमेल भेजने वाले की वास्तविक लोकेशन पता करना हमेशा आसान नहीं होता। कई मामलों में अपराधी VPN, प्रॉक्सी सर्वर या दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके अपनी पहचान और स्थान छिपाने की कोशिश करते हैं।

2026 में दिल्ली और अन्य स्थानों पर सामने आए होएक्स बम धमकी मामलों में भी जांच एजेंसियों के सामने डिजिटल पहचान और स्रोत का पता लगाने की चुनौती रही है।

धमकी में खालिस्तान का नाम?

इस मामले की रिपोर्टिंग में एक और संवेदनशील पहलू सामने आया है। खबरों के मुताबिक धमकी वाला संदेश कथित तौर पर खालिस्तान के नाम से भेजा गया था।

हालांकि पत्रकारिता के लिहाज से यहां सावधानी बेहद जरूरी है। किसी ईमेल में किसी संगठन या विचारधारा का नाम लिखे होने से यह साबित नहीं होता कि वह संदेश वास्तव में उसी संगठन ने भेजा है। इसकी पुष्टि तकनीकी जांच और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है।

इसलिए फिलहाल इसे केवल धमकी वाले ईमेल में किए गए दावे के रूप में देखना उचित है।

स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?

दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस के लिए सुरक्षा पहले से ही कई स्तरों पर तैयार की गई है। लाल किले के आसपास सुरक्षा घेरा, निगरानी, यातायात नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त जांच की जा रही है।

14 अगस्त की धमकियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां निश्चित रूप से संवेदनशील स्थानों पर सतर्कता और बढ़ा सकती हैं। लेकिन अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को कोई तत्काल खतरा है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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