भारत में सोने की कीमतों में गिरावट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव बना हुआ है। हाजिर सोना 4,021.04 डॉलर प्रति औंस तक फिसला। जानिए कच्चे तेल, अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों की उम्मीदों का गोल्ड प्राइस पर क्या असर पड़ रहा है।
नई दिल्ली: शुक्रवार, 23 अक्टूबर को भारतीय बाजार में सोना सस्ता हुआ। 24 कैरेट गोल्ड की कीमत ₹190 प्रति ग्राम नीचे आई, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव ₹175 और 18 कैरेट सोने की दर ₹143 प्रति ग्राम घट गई।
इस गिरावट के बीच सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों की नजर अब शहरों के ताजा भाव पर है। हालांकि, घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में कमी के पीछे सिर्फ स्थानीय मांग नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल भी अहम है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में सोना चार महीने से अधिक समय में अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, महंगाई की आशंकाओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने पर दबाव बढ़ाया है।
24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सोने की तीनों प्रमुख श्रेणियों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव ₹190 प्रति ग्राम घटा, जबकि 22 कैरेट सोना ₹175 और 18 कैरेट सोना ₹143 प्रति ग्राम सस्ता हुआ।
| सोने की शुद्धता | 23 अक्टूबर का भाव (प्रति ग्राम) | गिरावट |
| 24 कैरेट | ₹14,248 | ₹190 |
| 22 कैरेट | ₹13,060 | ₹175 |
| 18 कैरेट | ₹10,686 | ₹143 |
शुद्धता के लिहाज से 24 कैरेट सोने में सबसे अधिक सोना होता है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर सोने के सिक्के और बार बनाने में किया जाता है। वहीं, 22 कैरेट सोना आभूषण बनाने के लिए लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें मजबूती बढ़ाने के लिए अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं। 18 कैरेट सोने में सोने का अनुपात इससे कम होता है और इसका उपयोग भी कई तरह के आभूषणों में किया जाता है।
इन दरों के आधार पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,42,480, 22 कैरेट सोने की ₹1,30,600 और 18 कैरेट सोने की ₹1,06,860 होती है। ये कीमतें केवल सोने की दर के आधार पर निकाली गई हैं। आभूषण खरीदने पर मेकिंग चार्ज और लागू कर जुड़ने से अंतिम बिल अधिक हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा भाव की पुष्टि करें।
प्रमुख शहरों में सोने के ताजा भाव
23 अक्टूबर 2026 को देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 24 और 22 कैरेट सोने का भाव कई अन्य शहरों के मुकाबले अधिक रहा। नीचे दी गई दरें प्रति ग्राम के हिसाब से हैं।
| शहर | 24 कैरेट | 22 कैरेट | 18 कैरेट |
| दिल्ली | ₹14,263 | ₹13,075 | ₹10,686 |
| मुंबई | ₹14,248 | ₹13,060 | ₹10,686 |
| चेन्नई | ₹14,248 | ₹13,060 | ₹10,690 |
| कोलकाता | ₹14,248 | ₹13,060 | ₹10,686 |
| बेंगलुरु | ₹14,248 | ₹13,060 | ₹10,686 |
| हैदराबाद | ₹14,248 | ₹13,060 | ₹10,686 |
| पुणे | ₹14,248 | ₹13,060 | ₹10,686 |
| वडोदरा | ₹14,243 | ₹13,065 | ₹10,686 |
| अहमदाबाद | ₹14,243 | ₹13,065 | ₹10,686 |
इन दरों के आधार पर दिल्ली में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,42,630 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,30,750 होगी। वहीं, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,42,480 है।
ध्यान दें कि ये सांकेतिक दरें हैं। स्थानीय बाजार और ज्वेलर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज और लागू कर जुड़ने से अंतिम कीमत भी बढ़ सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर में ताजा भाव की पुष्टि जरूर करें।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
सोने की कीमतों में गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.1 प्रतिशत गिरकर 4,021.04 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था। कारोबार के दौरान कीमत 20 जुलाई के बाद के सबसे निचले स्तर तक पहुंची। सप्ताह के दौरान अब तक सोने में करीब 3.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इस रुझान के चलते बाजार जून के बाद अपनी सबसे खराब साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा था।
अमेरिका में दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में भी गिरावट आई। यह 0.6 प्रतिशत घटकर 4,035.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर कई कारक एक साथ असर डाल रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की चाल, सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला प्रतिफल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें शामिल हैं।
सोना आम तौर पर ऐसे निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है, जिसकी मांग अनिश्चितता के दौर में बढ़ सकती है। लेकिन यह हर परिस्थिति में महंगा ही होगा, ऐसा जरूरी नहीं है। यदि बाजार को लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, तो सोने जैसे ऐसे निवेश पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती।
कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों की चिंता अहम
पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। रिपोर्ट में सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका का भी उल्लेख किया गया।
तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। यदि ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई को लंबे समय तक बनाए रखती हैं, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। बाजार में इसी संभावना को लेकर चिंता है।
अब निवेशकों की नजर 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। इसके अलावा, अमेरिका के व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक के आंकड़े भी अहम होंगे। यह महंगाई का एक प्रमुख पैमाना है, जिस पर फेडरल रिजर्व ध्यान देता है।
कारोबारी अगली बैठक में ब्याज दरों के अपरिवर्तित रहने की उम्मीद कर रहे थे, जबकि दिसंबर में दर बढ़ने की संभावना को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई थी। ऐसी उम्मीदें बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर को प्रभावित कर सकती हैं, जिनका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।
क्या आगे भी सोने की कीमतें गिर सकती हैं?
निकट भविष्य में सोने की कीमतों की दिशा कई संकेतकों पर निर्भर करेगी। सबसे पहले, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़े बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया में घटनाक्रम भी अहम रहेंगे।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में बाजार विश्लेषकों ने 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को अंतरराष्ट्रीय सोने के लिए महत्वपूर्ण बताया। यदि कीमत इस स्तर से नीचे टिकती है, तो यह संकेत हो सकता है कि बाजार महंगाई के बने रहने, ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल और मजबूत डॉलर की संभावना को ज्यादा महत्व दे रहा है। हालांकि, यह बाजार का आकलन है, कीमतों की दिशा की गारंटी नहीं।
भारत में सोने के भाव पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर तथा घरेलू बाजार की स्थितियों का भी असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक बाजार में गिरावट होने पर भी भारतीय बाजार में कीमतों का बदलाव बिल्कुल उसी अनुपात में हो, यह जरूरी नहीं है।
फिलहाल 23 अक्टूबर के आंकड़े सोने की कीमतों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव दिखाते हैं। लेकिन आगे की चाल का अंदाजा लगाने के लिए निवेशकों और खरीदारों को नए बाजार आंकड़ों और आर्थिक संकेतों पर नजर रखनी होगी।
