उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी जननीति भारत लॉन्च कर दी है। उन्होंने जनता की भागीदारी और जवाबदेह शासन को पार्टी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत करते हुए गुरुवार, 15 अक्टूबर को नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ (Jan Neeti Bharat) लॉन्च की। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी।
मित्तल ने अपनी राजनीतिक पहल को जनता की भागीदारी, पारदर्शी शासन और सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में लोगों की भूमिका केवल चुनाव के दिन वोट डालने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सरकार के कामकाज और नीतियां तय करने की प्रक्रिया में भी उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।
लगभग आठ मिनट के वीडियो संदेश के जरिए पार्टी की घोषणा करते हुए मित्तल ने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है, बल्कि जनता की बात सुनने की इच्छाशक्ति की कमी है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाने की बात कही, जिसमें नागरिक अपनी जरूरतों और समस्याओं के आधार पर नीतियों को प्रभावित कर सकें और चुनी हुई सरकार से उसके पूरे कार्यकाल के दौरान जवाब मांग सकें।
क्या है जननीति भारत का उद्देश्य?
दिव्या मित्तल ने पार्टी की घोषणा करते हुए शासन व्यवस्था में जनता की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि सरकार के फैसले लोगों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर होने चाहिए। उनके मुताबिक, किसी गांव, कस्बे या शहर की समस्याओं को सबसे अच्छी तरह वहां रहने वाले लोग समझते हैं। इसलिए नीतियां तैयार करते समय उनके अनुभवों को महत्व देना जरूरी है।
मित्तल ने अपने संदेश में कहा कि राजनीति में आमतौर पर जनता चुनाव के दौरान अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनती है, लेकिन इसके बाद सरकारी फैसलों में उसकी सीधी भागीदारी सीमित रह जाती है। जननीति भारत के जरिए वह इस व्यवस्था को बदलना चाहती हैं। उनकी योजना के मुताबिक, सरकार को पांच साल के कार्यकाल के दौरान लगातार जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए।
उन्होंने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को इस विचार के साथ पेश किया कि शासन जनता पर हावी होने के बजाय उसकी जरूरतों के अनुरूप चलना चाहिए। इसका मतलब केवल चुनावी वादे करना नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं के क्रियान्वयन में भी लोगों को जानकारी और प्रतिक्रिया देने का अवसर उपलब्ध कराना है।
जनता की जरूरतों के आधार पर बनेंगी नीतियां
मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में जननीति भारत की तीन प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। पहली प्राथमिकता नीतियां तैयार करने की प्रक्रिया में जनता को केंद्र में रखना है। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना होता है, इसलिए उन समस्याओं की पहचान और समाधान तय करने में नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
उन्होंने परिवारों, किसानों और छोटे कारोबारियों के रोजमर्रा के अनुभवों का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को अपनी जरूरतों और मुश्किलों की गहरी समझ होती है। किसान फसल की कटाई से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझते हैं। इसी तरह, छोटे व्यापारी अपने कारोबार से जुड़ी समस्याओं और सरकारी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक दिक्कतों के बारे में सीधे बता सकते हैं।
जाति, धर्म और सामाजिक पहचान से ऊपर जरूरतों को प्राथमिकता
जननीति भारत की दूसरी प्रमुख प्राथमिकता सरकारी फैसलों को लोगों की जरूरतों के आधार पर लेने से जुड़ी है। मित्तल ने कहा कि निर्णय लेते समय जाति, धर्म या सामाजिक हैसियत के बजाय जनता की समस्याओं और सार्वजनिक हित को महत्व मिलना चाहिए।
उन्होंने एक सड़क के मार्ग में बदलाव का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी फैसले से सीमित लोगों को लाभ मिल सकता है और उसका असर सैकड़ों परिवारों पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, बुनियादी ढांचे से जुड़े ऐसे निर्णयों में प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने और विकल्पों पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए।
मित्तल ने इस विचार को समझाने के लिए नक्शे का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि जननीति की अवधारणा में किसी सड़क, सार्वजनिक सुविधा या दूसरी परियोजना से जुड़े निर्णयों में लोगों की भागीदारी होनी चाहिए। यानी किसी इलाके के विकास की योजना केवल कार्यालयों में तैयार न हो, बल्कि स्थानीय जरूरतों और नागरिकों के सुझावों को भी उसमें जगह मिले।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए मोबाइल ऐप का प्रस्ताव
मित्तल ने महिलाओं की सुरक्षा को भी अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने एक मोबाइल एप्लिकेशन तैयार करने का विचार रखा, जिसके जरिए महिलाएं उन स्थानों की पहचान कर सकेंगी जहां उन्हें असुरक्षित महसूस होता है।
प्रस्ताव के मुताबिक, महिलाएं ऐप पर ऐसे स्थानों की जानकारी दर्ज कर सकेंगी। जिन इलाकों से अधिक शिकायतें या रिपोर्ट सामने आएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा उपायों के लिए चुना जा सकेगा। इनमें स्ट्रीट लाइट लगाना और सीसीटीवी कैमरे स्थापित करना जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं के अनुभवों के आधार पर उन जगहों की पहचान करना है जहां सुरक्षा के इंतजाम कमजोर हो सकते हैं। मित्तल ने संकेत दिया कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई किसी घटना के बाद शुरू होने के बजाय पहले से उपलब्ध जानकारी और शिकायतों के आधार पर की जानी चाहिए।
हालांकि, यह फिलहाल एक प्रस्ताव है। इसके लिए ऐप विकसित करने, शिकायतों की जांच करने, महिलाओं की निजी जानकारी सुरक्षित रखने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत होगी।
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता पर जोर
पार्टी की तीसरी प्रमुख प्राथमिकता सरकारी कामकाज को पारदर्शी बनाना और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करने में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है। मित्तल ने प्रस्ताव रखा कि गांवों और स्थानीय निकायों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी लोगों को मोबाइल फोन पर उपलब्ध होनी चाहिए।
उनके विचार के मुताबिक, किसी इलाके में सड़क, नाली, हैंडपंप या अन्य सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा काम कहां हो रहा है, उसकी स्थिति क्या है, कितना काम पूरा हुआ है और उसे पूरा करने की समयसीमा क्या है, इसकी जानकारी नागरिकों को मिलनी चाहिए। संबंधित काम के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान भी स्पष्ट होनी चाहिए।
मित्तल ने इस व्यवस्था को स्कूलों और अस्पतालों तक विस्तारित करने की बात कही। उनके मुताबिक, लोग यह जानकारी दे सकें कि स्कूलों में जरूरी किताबें उपलब्ध हैं या नहीं, अस्पतालों में दवाएं मिल रही हैं या नहीं और मरीजों को डॉक्टरों की सेवाएं मिल पा रही हैं या नहीं।
मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की तैयारी
जननीति भारत की घोषणा के साथ दिव्या मित्तल की संभावित चुनावी सीट को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी और चुनावी रणनीति से जुड़ी औपचारिक जानकारी पार्टी की ओर से विस्तार से सामने आना बाकी है।
मिर्जापुर मित्तल के प्रशासनिक करियर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वह यहां जिलाधिकारी के पद पर काम कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने देवरिया और संत कबीर नगर जैसे जिलों में भी जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में मिर्जापुर से उनका पुराना प्रशासनिक जुड़ाव उनकी राजनीतिक शुरुआत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के लिए अपने पुराने कार्यक्षेत्र से चुनावी राजनीति में उतरना एक अलग तरह की चुनौती भी पेश करता है। प्रशासन में काम करने का अनुभव स्थानीय समस्याओं, सरकारी योजनाओं और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को समझने में मदद कर सकता है। लेकिन चुनाव में सफलता के लिए स्थानीय मतदाताओं का समर्थन, संगठन की मजबूती, चुनावी मुद्दों की स्पष्टता और लगातार जनसंपर्क भी अहम होंगे।
ये भी पढ़ें :- Jailer 2 Review: ‘रिटायर्ड जेलर’ के रूप में लौटे रजनीकांत! जानिए अनिरुद्ध के बैकग्राउंड स्कोर और दमदार एक्शन जीत पाए दर्शकों का दिल?
आईएएस से राजनीति तक का सफर
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को लगभग 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद सिविल सेवा छोड़ दी थी। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके सेवा छोड़ने के लिए इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद 29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की और अब 15 अक्टूबर को अपनी पार्टी का औपचारिक ऐलान कर दिया।

मित्तल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग और प्रबंधन से जुड़ी है। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली से बीटेक और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु से प्रबंधन की पढ़ाई की। सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने लंदन में काम भी किया था। आईएएस में चयन से पहले उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए भी हुआ था।
प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में काम किया और विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। अब वह अपने प्रशासनिक अनुभव को राजनीतिक क्षेत्र में इस्तेमाल करना चाहती हैं।
सपा और कांग्रेस ने भी दिखाई थी दिलचस्पी
दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित कुछ राजनीतिक दलों की ओर से उनके लिए संभावनाओं के संकेत दिए गए थे।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर पार्टी के हरे और लाल रंग वाले गमछे का उल्लेख किया था। इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में सपा की संभावित दिलचस्पी के रूप में देखा गया, हालांकि किसी औपचारिक टिकट या गठबंधन की घोषणा नहीं हुई थी।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा था कि यदि मित्तल चुनाव लड़ना और समाज के लिए काम करना चाहें, तो पार्टी इस संभावना पर विचार कर सकती है। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) सहित कुछ अन्य दलों ने भी उनके राजनीति में प्रवेश का स्वागत किया था।
इसके बावजूद मित्तल ने किसी मौजूदा पार्टी में शामिल होने के बजाय अपना स्वतंत्र राजनीतिक संगठन बनाने का रास्ता चुना। यह फैसला उनकी राजनीतिक पहचान और पार्टी की विचारधारा को अपने तरीके से विकसित करने का अवसर देता है।

