Thursday, 16 July 2026
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Environmental Performance Index 2026: 177 देशों में भारत 176वें स्थान पर, जानिए क्यों पिछड़ा देश का पर्यावरण प्रदर्शन?

भारत की EPI 2026 रैंकिंग ने पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 177 देशों में 176वें स्थान पर रहे भारत के प्रदर्शन, चुनौतियों और भविष्य की राह को विस्तार से समझें।

नई दिल्ली: एक तरफ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण के मोर्चे पर एक नई वैश्विक रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में जारी Environmental Performance Index (EPI) 2026 में भारत को 177 देशों में 176वां स्थान मिला है। यानी पर्यावरणीय प्रदर्शन के मामले में भारत दुनिया के सबसे निचले पायदान पर मौजूद देशों में शामिल है। भारत से नीचे सिर्फ लाओस (Laos) है, जिसने 177वीं रैंक हासिल की है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल EPI स्कोर 100 में से 22.46 अंक रहा। वहीं शीर्ष स्थान पर मौजूद एस्टोनिया (Estonia) ने 74.79 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जैव विविधता के नुकसान और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

हालांकि EPI रैंकिंग को लेकर भारत जैसे विकासशील देशों में लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सूचकांक पर्यावरणीय स्थिति को समझने का एक जरिया हैं, लेकिन इन्हें देश की आर्थिक परिस्थितियों, जनसंख्या और विकास की जरूरतों के संदर्भ में भी देखना चाहिए।

क्या है Environmental Performance Index (EPI)?

Environmental Performance Index (EPI) दुनिया के देशों के पर्यावरणीय प्रदर्शन को मापने वाला एक प्रमुख वैश्विक सूचकांक है। इसे Yale Center for Environmental Law & Policy और Columbia University के Center for International Earth Science Information Network (CIESIN) के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया जाता है।

EPI 2026 में दुनिया के 177 देशों का मूल्यांकन किया गया है। इसमें देशों को पर्यावरण से जुड़े 47 अलग-अलग संकेतकों (Indicators) के आधार पर रैंक किया गया है। इन संकेतकों को तीन बड़े नीति क्षेत्रों में बांटा गया है:

  • पर्यावरणीय स्वास्थ्य (Environmental Health)
  • पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती (Ecosystem Vitality)
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता Climate Change Performance

इनमें वायु गुणवत्ता, जल प्रबंधन, कचरा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, वन संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु नीतियों जैसे विषय शामिल हैं।

भारत की 176वीं रैंक के पीछे क्या कारण हैं?

भारत की खराब रैंक के पीछे कई पर्यावरणीय चुनौतियां जिम्मेदार मानी गई हैं। रिपोर्ट में खासतौर पर वायु प्रदूषण, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और पारिस्थितिकी संरक्षण से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख कारण बताया गया है।

1. वायु प्रदूषण बना सबसे बड़ा संकट

भारत के पर्यावरणीय प्रदर्शन को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा मुद्दा खराब वायु गुणवत्ता है।

EPI 2026 के अनुसार भारत का Air Quality स्कोर काफी कमजोर रहा और इस क्षेत्र में भारत 175वें स्थान पर रहा। खासकर PM2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।

दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई बड़े शहर हर साल प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां और पराली जलाने जैसी घटनाएं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय से वायु प्रदूषण को दुनिया भर में समय से पहले होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में गिनता रहा है।

2. कोयले पर निर्भर ऊर्जा व्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। हालांकि भारत ने सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में तेजी से विस्तार किया है, लेकिन बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता अभी भी काफी अधिक है।

EPI 2026 में जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रदर्शन में भारत को अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति मिली, लेकिन कुल पर्यावरणीय प्रदर्शन में जीवाश्म ईंधन आधारित विकास मॉडल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना होगा।

3. जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव

भारत दुनिया के सबसे जैव विविधता वाले देशों में शामिल है। यहां हिमालय, पश्चिमी घाट, मैंग्रोव क्षेत्र और कई महत्वपूर्ण वन क्षेत्र मौजूद हैं।

लेकिन तेजी से बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार, सड़क और खनन परियोजनाओं के कारण कई प्राकृतिक क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है।

EPI 2026 में भारत का Ecosystem Vitality प्रदर्शन भी कमजोर रहा, जिससे संकेत मिलता है कि प्राकृतिक आवासों और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में अभी काफी सुधार की जरूरत है।

4. विकास बनाम पर्यावरण की चुनौती

भारत वर्तमान में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, उद्योगों का विस्तार और शहरीकरण देश के विकास के लिए जरूरी हैं।

लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास की इस रफ्तार को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में भारत को “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” यानी ऐसा विकास मॉडल अपनाना होगा जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

भारत की कुछ सकारात्मक पहल भी

हालांकि EPI में भारत की रैंक चिंताजनक है, लेकिन देश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई कदम उठाए हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि
  • अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) की पहल
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
  • सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करने के प्रयास
  • जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा योजनाएं

EPI रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई देशों ने पर्यावरण सुधार में प्रगति की है, लेकिन वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अभी भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।

EPI 2026 में दुनिया के टॉप 5 देश

1. एस्टोनिया (Estonia)

एस्टोनिया ने Environmental Performance Index (EPI) 2026 में दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है। देश का स्कोर 74.79 रहा। एस्टोनिया ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में शानदार प्रदर्शन किया है।

यहां पर्यावरण संरक्षण को सरकारी नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। देश ने जैव विविधता संरक्षण, वन प्रबंधन और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाए हैं। कम प्रदूषण स्तर और पर्यावरणीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने एस्टोनिया को दुनिया का सबसे बेहतर पर्यावरण प्रदर्शन करने वाला देश बनाया है।

2. लक्जमबर्ग (Luxembourg)

लक्जमबर्ग ने EPI 2026 में 74.24 के स्कोर के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। छोटे क्षेत्रफल और कम आबादी के बावजूद देश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। लक्जमबर्ग ने स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग पर विशेष ध्यान दिया है।

सरकार ने पर्यावरण अनुकूल परिवहन, कार्बन उत्सर्जन में कमी और हरित नीतियों को बढ़ावा दिया है। बेहतर पर्यावरण कानूनों और प्रभावी योजनाओं के कारण देश वैश्विक स्तर पर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल हुआ है।

लक्जमबर्ग का मॉडल दिखाता है कि छोटे देश भी मजबूत नीतियों के जरिए पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

3. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom)

यूनाइटेड किंगडम ने EPI 2026 में 71.51 स्कोर हासिल करते हुए तीसरी रैंक प्राप्त की है। देश ने कार्बन उत्सर्जन कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई प्रभावी नीतियां लागू की हैं।

ब्रिटेन ने कोयले पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर जोर दिया है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण कानूनों, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता बचाने के प्रयासों ने भी इसकी रैंकिंग को मजबूत किया है।

सरकार और निजी क्षेत्र दोनों मिलकर हरित तकनीक और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के कारण ब्रिटेन दुनिया के शीर्ष पर्यावरण प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल है।

4. फिनलैंड (Finland)

71.04 के स्कोर के साथ फिनलैंड ने EPI 2026 में चौथा स्थान हासिल किया है। यह देश अपने घने जंगलों, मजबूत वन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण नीतियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।

फिनलैंड ने स्वच्छ ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। यहां जंगलों और जैव विविधता की सुरक्षा को काफी महत्व दिया जाता है।

देश ने प्रदूषण कम करने और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने में अच्छा प्रदर्शन किया है। फिनलैंड का विकास मॉडल आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर आधारित है, जो इसे दुनिया के शीर्ष पर्यावरणीय प्रदर्शन वाले देशों में शामिल करता है।

5. नीदरलैंड्स (Netherlands)

70.49 के स्कोर के साथ नीदरलैंड्स ने EPI 2026 में पांचवां स्थान हासिल किया है। देश जल प्रबंधन, पर्यावरणीय योजनाओं और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में अपनी मजबूत नीतियों के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से नीचे स्थित होने के कारण नीदरलैंड्स ने बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को विकसित किया है।

देश ने नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास पर भी ध्यान दिया है। सरकार की प्रभावी योजनाओं और पर्यावरणीय जागरूकता के कारण नीदरलैंड्स ने वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इसका मॉडल दिखाता है कि प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत नीतियों और तकनीक के जरिए पर्यावरण संरक्षण संभव है।

क्या EPI रैंकिंग पर सवाल उठते हैं?

EPI एक वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण रिपोर्ट है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली को लेकर कुछ देशों ने सवाल उठाए हैं।

भारत सरकार पहले भी EPI की रैंकिंग पर आपत्ति जता चुकी है। सरकार का तर्क रहा है कि कुछ मानक भारत जैसे बड़े विकासशील देश की जटिल परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं दर्शाते।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी इंडेक्स को समझते समय उसकी पद्धति और डेटा स्रोतों को ध्यान में रखना जरूरी है। हालांकि, पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर जमीनी वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आगे भारत के लिए क्या चुनौती है?

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह आर्थिक विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ कैसे संतुलित करता है।

इसके लिए जरूरी होगा:

  • प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना
  • स्वच्छ ऊर्जा में निवेश बढ़ाना
  • जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों की रक्षा करना
  • शहरों में बेहतर कचरा प्रबंधन लागू करना
  • जल संरक्षण पर अधिक ध्यान देना

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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