Thursday, 08 October 2026
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिकी यात्रा से पहले डॉ. के. ए. पॉल ने धर्मों के बीच समानता का आह्वान किया

डॉ. के. ए. पॉल ने मोहन भागवत से शांति, लोकतंत्र और सभी धर्मों के समान अधिकारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराने की अपील की

नई दिल्ली/वॉशिंगटन डी.सी.: अमेरिका स्थित ईसाई धर्मप्रचारक, मानवतावादी और शांति समर्थक डॉ. के. ए. पॉल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का आह्वान किया है।

डॉ. पॉल ने कहा कि वह भागवत को अमेरिका आने से रोकने के किसी भी प्रयास के पक्ष में नहीं हैं। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता और समान व्यवहार के सिद्धांत धर्म या विचारधारा के आधार पर अलग नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में ईसाइयों, मुसलमानों, हिंदुओं और सिखों के धार्मिक अधिकारों की वकालत करने वालों को अमेरिका आने वाले लोगों के अधिकारों के लिए भी समान दृष्टिकोण रखना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि भागवत की अमेरिकी यात्रा रोकने की मांग धार्मिक स्वतंत्रता और शांति की व्यापक भावना के अनुरूप नहीं है। मणिपुर में ईसाई समुदाय की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक समुदायों के अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी जरूरी है।

डॉ. पॉल ने भागवत से न्यूयॉर्क में प्रस्तावित संबोधन के दौरान ईसाइयों और अन्य धार्मिक समुदायों को यह भरोसा दिलाने की अपील की कि भारत लोकतंत्र, समानता और सभी नागरिकों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने हिंसा की निंदा करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि मणिपुर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने कहा कि ऐसा संदेश विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाने और शांति को मजबूत करने में मदद कर सकता है। उन्होंने धार्मिक मतभेदों के बावजूद संवाद, आपसी सम्मान और समझ को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।

डॉ. पॉल अंतरराष्ट्रीय शांति पहलों से जुड़े रहे हैं और सात प्रमुख धर्मों के धार्मिक नेताओं को साथ लाने वाले कार्यक्रमों में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने लोगों से शांति, सद्भाव और भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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