सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विशेष सीबीआई अदालतों में वर्षों से लंबित मामलों, न्यायाधीशों की कमी और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर दिया जोर
नई दिल्ली: राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान टीडीपी सांसद चिंतकायला विजय ने विशेष सीबीआई अदालतों में न्यायिक देरी और वर्षों से लंबित मामलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। वाईएसआरसीपी सांसदों के लगातार व्यवधान के बावजूद उन्होंने दृढ़ता से अपना पक्ष रखते हुए सदन से अपील की कि न्यायिक सुधारों के साथ-साथ विशेष सीबीआई अदालतों में लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बहस के दौरान विजय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से जुड़े सुधार निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विशेष सीबीआई अदालतों की कार्यप्रणाली पर भी समान रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि इन अदालतों की स्थापना भ्रष्टाचार और अन्य जटिल आपराधिक मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, त्वरित न्याय देने के बजाय इन अदालतों में कई मामले वर्षों से लंबित पड़े हैं और न्याय मिलने में लगातार देरी हो रही है।
विजय ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ लंबित 31 मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये अत्यंत महत्वपूर्ण मामले हैं, लेकिन 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी इनमें कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। पहली बार सांसद बने विजय ने यह भी बताया कि इस अवधि के दौरान आठ न्यायाधीश बदले जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि न्यायाधीशों की कमी न्यायिक देरी का एक प्रमुख कारण है।
विजय ने सदन के सामने एक सीधा और महत्वपूर्ण सवाल रखा, “यदि 13 साल बाद भी डिस्चार्ज याचिका पर ही सुनवाई चल रही है, तो मुकदमे की सुनवाई आखिर कब शुरू होगी?” उनके इस सवाल ने न्यायपालिका में रिक्त पदों और प्रक्रियागत देरी के गंभीर प्रभाव को उजागर किया तथा न्यायिक जवाबदेही और समयबद्ध न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।
वाईएसआरसीपी सांसदों के लगातार विरोध और व्यवधान के बावजूद चिंतकायला विजय अपने तर्कों पर अडिग रहे और विशेष सीबीआई अदालतों में सुधार की आवश्यकता को मजबूती से उठाते रहे। समय पर न्याय सुनिश्चित करने और न्यायिक प्रणाली में जवाबदेही की मांग करते हुए युवा टीडीपी नेता ने पारदर्शिता, जवाबदेही और आंध्र प्रदेश की जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उनके हस्तक्षेप ने न्याय व्यवस्था से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है और उम्मीद की जा रही है कि इससे न्यायिक सुधारों तथा त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में चल रही बहस को और मजबूती मिलेगी।



