439 टेस्ट विकेट, 2,343 दिन तक नंबर-1 टेस्ट गेंदबाज और घातक रफ्तार। डेल स्टेन के 43वें जन्मदिन पर पढ़िए उनके शानदार करियर की कहानी।
नई दिल्ली: क्रिकेट इतिहास में कुछ तेज गेंदबाज ऐसे हुए हैं जिनके आंकड़े महान थे, कुछ ऐसे जिनकी रफ्तार ने दुनिया को चौंकाया और कुछ ऐसे जिनकी मौजूदगी मात्र से बल्लेबाज दबाव महसूस करने लगते थे। दक्षिण अफ्रीका के Dale Steyn उन दुर्लभ गेंदबाजों में शामिल हैं जिनमें ये तीनों गुण एक साथ मौजूद थे।
27 जून 1983 को दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल प्रांत (वर्तमान गौतेंग) के फालाबोरवा शहर में जन्मे डेल विलेम स्टेन आज अपना 43वां जन्मदिन मना रहे हैं।
क्रिकेट प्रेमियों के लिए स्टेन सिर्फ एक तेज गेंदबाज नहीं, बल्कि उस दौर की पहचान हैं जब टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजों का भी उतना ही दबदबा था जितना बल्लेबाजों का।
स्टेन की तेज रफ्तार, स्विंग, रिवर्स स्विंग, आक्रामकता और विकेट लेने की भूख ने उन्हें 21वीं सदी के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में शामिल कर दिया। कई विशेषज्ञ उन्हें दक्षिण अफ्रीका का सर्वकालिक महान तेज गेंदबाज मानते हैं।
फालाबोरवा से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का सफर
Dale Steyn का बचपन दक्षिण अफ्रीका के छोटे से शहर फालाबोरवा में बीता। उनके पिता बैरी स्टेन और मां जीनेट स्टेन चाहते थे कि उनका बेटा खेलों में आगे बढ़े। शुरुआती दिनों में स्टेन स्केटबोर्डिंग और अन्य खेलों में भी रुचि रखते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनका झुकाव क्रिकेट की ओर बढ़ गया।
युवा स्तर पर उनकी प्रतिभा जल्द ही पहचान ली गई। दक्षिण अफ्रीका की घरेलू टीमों के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली।
30 अगस्त 2004 को इंग्लैंड के खिलाफ पोर्ट एलिजाबेथ में उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू किया। शुरुआत आसान नहीं रही। पहले टेस्ट में उन्हें सिर्फ एक विकेट मिला और कई आलोचकों ने उनकी क्षमता पर सवाल उठाए।
जब दुनिया ने पहली बार स्टेन गन से हुई परिचित
2007-08 का समय स्टेन के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला और फिर पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबलों में उन्होंने लगातार विकेट चटकाए। उनकी गेंदें 145 से 155 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से आती थीं और आखिरी क्षण में स्विंग करती थीं।
जल्द ही बल्लेबाजों को समझ आ गया कि स्टेन सिर्फ तेज नहीं हैं, बल्कि बेहद कुशल भी हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत फुल लेंथ पर गेंदबाजी करना थी। कई तेज गेंदबाज अतिरिक्त उछाल के भरोसे रहते हैं, लेकिन स्टेन लगातार स्टंप्स पर हमला करते थे।
टेस्ट क्रिकेट में बादशाहत
डेल स्टेन का असली साम्राज्य टेस्ट क्रिकेट था। उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 439 विकेट लिए। इस प्रारूप में उनका गेंदबाजी औसत 22.95 रहा, जो आधुनिक युग के महान तेज गेंदबाजों में सर्वश्रेष्ठ में गिना जाता है।
उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 26 बार पांच विकेट और 5 बार दस विकेट लेने का कारनामा किया।
2018 में जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए 422वां विकेट हासिल किया, तब वे दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए। उन्होंने महान तेज गेंदबाज शॉन पोलॉक का रिकॉर्ड तोड़ा।
439 विकेट के साथ उन्होंने अपना टेस्ट करियर समाप्त किया।
सीमित ओवरों में भी रहा दबदबा
हालांकि स्टेन की पहचान टेस्ट क्रिकेट से बनी, लेकिन वनडे और टी20 में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। उन्होंने 125 वनडे मैचों में कुल 196 विकेट लिए। वनडे में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 39 रन देकर 6 विकेट रहा।
इसके अलावा 47 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने 64 विकेट हासिल किए। उनकी तेज यॉर्कर और डेथ ओवरों की गेंदबाजी ने उन्हें सीमित ओवरों में भी बेहद प्रभावी बना दिया।
वह स्पैल जिसे आज भी याद करते हैं प्रशंसक
क्रिकेट इतिहास के महान गेंदबाजी प्रदर्शनों की चर्चा हो और Dale Steyn का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है।
2008 में मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके 10 विकेट और 2010 में नागपुर टेस्ट में भारत के खिलाफ उनकी घातक गेंदबाजी आज भी याद की जाती है।
लेकिन कई विशेषज्ञ 2013 में जोहान्सबर्ग में भारत के खिलाफ उनके स्पैल को विशेष मानते हैं, जब उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। उनकी गेंदबाजी सिर्फ विकेट लेने तक सीमित नहीं थी। वह बल्लेबाजों पर मानसिक दबाव भी बनाते थे।
दहाड़ जो बनी स्टेन की पहचान
Dale Steyn की सबसे प्रसिद्ध छवि क्या है?
किसी बल्लेबाज को आउट करने के बाद हवा में मुक्का लहराते हुए उनकी जोरदार दहाड़। यह सिर्फ जश्न नहीं था, बल्कि विरोधी टीम के लिए चेतावनी भी होती थी।
उनकी आक्रामक बॉडी लैंग्वेज कई बार चर्चा का विषय बनी। कुछ आलोचकों ने इसे जरूरत से ज्यादा आक्रामक बताया, लेकिन प्रशंसकों के लिए यही स्टेन की पहचान थी। उनकी दहाड़ क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार सेलिब्रेशन में गिनी जाती है।
डेल स्टेन और ICC के रिकॉर्ड
Dale Steyn के नाम आईसीसी इतिहास में सबसे अधिक 2,343 दिनों तक नंबर 1 टेस्ट गेंदबाज रहने का सर्वकालिक रिकॉर्ड दर्ज है, जो उनके बेजोड़ दबदबे को दर्शाता है। टेस्ट क्रिकेट में उनका यह प्रभुत्व कई शानदार मील के पत्थरों से भरा हुआ है।
वह साल 2008 से 2014 के बीच रिकॉर्ड 263 हफ्तों तक शीर्ष स्थान पर काबिज रहे, जिसके साथ ही उन्होंने मुथैया मुरलीधरन के 214 हफ्तों के रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया। स्टेन ने लगातार छह वर्षों तक दुनिया के नंबर 1 गेंदबाज के रूप में अपनी बादशाहत कायम रखी।
अपने इस शानदार सफर के दौरान उन्होंने 909 अंकों की सर्वोच्च रेटिंग हासिल की, जो उन्हें इतिहास के सबसे घातक गेंदबाजों की कतार में खड़ा करती है। उनकी यह सफलता बेहद प्रेरणादायक है क्योंकि साल 2005 में वह रैंकिग में 74वें स्थान पर थे, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने साल 2009 से 2014 तक शीर्ष स्थान पर लगातार कब्जा जमाए रखा।
आक्रामकता और विवाद
स्टेन का करियर विवादों से पूरी तरह मुक्त नहीं रहा। मैदान पर उनकी आक्रामकता कई बार विपक्षी बल्लेबाजों के साथ तीखी नोकझोंक का कारण बनी।
ऑस्ट्रेलिया, भारत और इंग्लैंड के बल्लेबाजों के साथ उनकी कई चर्चित स्लेजिंग घटनाएं सामने आईं।
हालांकि उन्हें कभी बड़े अनुशासनात्मक विवादों में नहीं घिरना पड़ा। अधिकांश क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी आक्रामकता खेल की प्रतिस्पर्धात्मक भावना का हिस्सा थी।
चोटों ने रोका शानदार करियर
यदि कोई चीज स्टेन को 500 टेस्ट विकेट तक पहुंचने से रोक सकी, तो वह थीं लगातार चोटें। 2015 के बाद उनके शरीर ने उनका साथ देना कम कर दिया।
कंधे, हैमस्ट्रिंग और पैर की चोटों ने उनके करियर को प्रभावित किया।
2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ टेस्ट में लगी कंधे की गंभीर चोट ने उन्हें लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रखा। इसके बाद वे बार-बार वापसी करते रहे, लेकिन पुरानी लय हासिल करना आसान नहीं था।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चोटें न होतीं तो स्टेन 500 टेस्ट विकेट का आंकड़ा बड़ी आसानी से पार कर जाते।
संन्यास का फैसला
अगस्त 2019 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनका शरीर अब लगातार पांच दिन के क्रिकेट की मांगों को पूरा नहीं कर पा रहा था। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक टी20 लीग क्रिकेट खेलना जारी रखा।
अंततः 31 अगस्त 2021 को डेल स्टेन ने अंतरराष्ट्रीय और पेशेवर क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। इसके साथ ही क्रिकेट के एक शानदार अध्याय का अंत हुआ।
IPL और दुनिया भर की लीगों में लोकप्रियता
स्टेन ने इंडियन प्रीमियर लीग में भी अपनी छाप छोड़ी। वे मुख्य रूप से रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेले।
आईपीएल में उनकी गति और विकेट लेने की क्षमता ने उन्हें प्रशंसकों का पसंदीदा बना दिया। उन्होंने अपने करियर में 95 आईपीएल मैच खेले और 97 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनका इकोनॉमी रेट 6.92 और गेंदबाजी औसत 25.86 का रहा। उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 3/8 था।
दुनिया भर की टी20 लीगों में भी उन्हें काफी सम्मान मिला।
मैदान के बाहर की जिंदगी
क्रिकेट के बाहर Dale Steyn मोटरसाइकिलों और एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीन रहे हैं। वे वन्यजीव संरक्षण और सामाजिक कार्यों से जुड़े अभियानों का भी समर्थन करते रहे हैं।
दक्षिण अफ्रीका में बच्चों और युवा खिलाड़ियों के विकास से जुड़ी कई पहलों में उनकी भागीदारी रही है। हालांकि वे कई अन्य सुपरस्टार खिलाड़ियों की तरह अपनी परोपकारी गतिविधियों का प्रचार कम ही करते हैं।
स्टेन की विरासत
आज जब Dale Steyn 43 वर्ष के हो चुके हैं, तो उनके रिकॉर्ड, उपलब्धियां और आंकड़े निश्चित रूप से शानदार लगते हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी विरासत आंकड़ों से कहीं बड़ी है।
उन्होंने एक पूरी पीढ़ी को तेज गेंदबाजी का नया अर्थ समझाया। उन्होंने दिखाया कि आधुनिक क्रिकेट में भी गेंदबाज मैच के सबसे बड़े सितारे हो सकते हैं।
439 टेस्ट विकेट, 196 वनडे विकेट, 64 टी20 अंतरराष्ट्रीय विकेट और अनगिनत यादगार स्पैल उनकी महानता की गवाही देते हैं।
लेकिन क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में डेल स्टेन हमेशा उस तेज गेंदबाज के रूप में याद किए जाएंगे जिसकी दहाड़ विकेट गिरने के बाद स्टेडियम में गूंजती थी और जिसके सामने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज भी पूरी सावधानी के साथ क्रीज पर उतरते थे।
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