Sunday, 11 October 2026
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अमेरिकी सीनेटर टिम शीही ने डॉ. के. ए. पॉल का समर्थन, FCRA पर मोदी सरकार से अपील

वॉशिंगटन डी.सी.: अमेरिकी सीनेटर टिम शीही (आर-एमटी) ने मानवतावादी और वैश्विक शांति समर्थक डॉ. के. ए. पॉल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 में बदलाव की अपील की है। दोनों ने सरकार से उन प्रावधानों को हटाने का आग्रह किया है, जिनसे धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े चर्च, अनाथालय, स्कूल, अस्पताल और धर्मार्थ संस्थानों की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण या जब्ती का खतरा पैदा हो सकता है।

डॉ. के. ए. पॉल ने प्रस्तावित नामित प्राधिकरण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एफसीआरए पंजीकरण रद्द होने या समाप्त होने की स्थिति में यह प्राधिकरण विदेशी अंशदान से प्राप्त संपत्तियों और उनसे जुड़ी अन्य परिसंपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले सकता है। पॉल के अनुसार, इससे कई पीढ़ियों से गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा कर रहे संस्थानों पर असर पड़ सकता है।

पॉल ने दावा किया कि इन संस्थानों की संयुक्त संपत्तियों का मूल्य खरबों डॉलर तक हो सकता है। उन्होंने मोदी सरकार से प्रावधान हटाने की अपील करते हुए कहा कि ईसाई धर्मार्थ संस्थानों और उनकी संपत्तियों की रक्षा की जानी चाहिए।

टिम शीही ने डॉ. के. ए. पॉल की अपील का किया समर्थन

अमेरिकी सीनेटर टिम शीही ने डॉ. के. ए. पॉल की अपील का समर्थन करते हुए कहा, “हम 100 प्रतिशत आपके साथ हैं।” उन्होंने कहा कि स्पीकर जॉनसन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी डॉ. पॉल का सम्मान करते हैं।

शीही ने ईसाइयों, मिशनरियों और चर्चों की सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन समुदायों, मिशनरियों और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

अमेरिकी नेताओं ने FCRA कानून पर जताई चिंता

इस मुद्दे पर अमेरिका के अन्य राजनीतिक नेताओं का भी ध्यान गया है। कांग्रेस सदस्य रिले मूर ने प्रस्तावित FCRA संशोधन कानून को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसके संभावित प्रभाव को “ईसाइयों पर स्पष्ट हमला” बताया।

धार्मिक स्वतंत्रता के लिए डॉ. पॉल के प्रयासों की सराहना

वॉशिंगटन स्थित अपने कार्यालय में डॉ. के. ए. पॉल के साथ बैठक के दौरान टिम शीही ने उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने गरीबों की मदद, सुसमाचार के प्रचार, व्यावहारिक मूल्यों को बढ़ावा देने और दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पॉल के प्रयासों की प्रशंसा की।

शीही ने कहा कि डॉ. पॉल “स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं” और दुनियाभर में आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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भारत के संप्रभु अधिकार को पॉल और शीही ने माना

डॉ. के. ए. पॉल और अमेरिकी सीनेटर टिम शीही ने भारत के विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के संप्रभु अधिकार को स्वीकार किया। हालांकि, पॉल ने कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से लाखों डॉलर स्कूलों, अनाथालयों और दया-गृहों के निर्माण में दान किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन नहीं कराया।

FCRA निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग

पॉल और शीही ने सरकार से विदेशी फंडिंग की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से ईसाई और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की संपत्तियों, संस्थानों और मिशनरी गतिविधियों को खतरा नहीं होना चाहिए।

डॉ. पॉल के अनुसार, ऐसी विदेशी धनराशि धर्मार्थ कार्यों के लिए निर्धारित होती है और उसका इस्तेमाल सरकार के लिए नहीं किया जाता।

धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर

पॉल ने दावा किया कि दुनिया के करीब 200 देशों में मुस्लिम और ईसाई आबादी मौजूद है और इन देशों में नई सरकार के प्रति भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी ईसाई और मुस्लिम समुदायों से संबंधित है।

डॉ. पॉल के सामाजिक कार्यों का जिक्र

डॉ. के. ए. पॉल ने ग्लोबल पीस इनिशिएटिव समेत कई संगठनों की स्थापना की है। वह भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में गरीब और कमजोर वर्गों की सेवा करने वाले सात आस्था-आधारित संस्थानों के समर्थन में आवाज उठाते रहे हैं। अमेरिकी राजनीतिक नेताओं के साथ भी उनके संबंध रहे हैं।

FCRA संशोधन पर अमेरिका में बढ़ी चर्चा

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका में प्रस्तावित FCRA संशोधनों पर द्विदलीय राजनीतिक स्तर पर चर्चा बढ़ रही है। पॉल और शीही ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था-आधारित संस्थानों की सुरक्षा भारत-अमेरिका के मजबूत जन-से-जन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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