5000-1 की संभावना, सीमित बजट और बिना सुपरस्टार वाली टीम, फिर भी Leicester City ने वह कर दिखाया जिसे फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार कहा जाता है। जानिए पूरी कहानी।
नई दिल्ली: 2 मई 2016 की रात इंग्लैंड के फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार रातों में शामिल हो गई। लंदन के स्टैमफोर्ड ब्रिज में चेल्सी और टॉटनहम हॉट्सपर के बीच मैच चल रहा था, लेकिन उस मुकाबले पर सबसे ज्यादा नजरें Leicester City में थीं। वहां खिलाड़ी, कोच, क्लब अधिकारी और हजारों समर्थक टीवी स्क्रीन के सामने बैठे हुए थे।
जैसे ही मैच 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ, Leicester City के खिलाड़ियों के बीच जश्न शुरू हो गया। किसी ने ट्रॉफी नहीं उठाई थी, कोई फाइनल नहीं खेला गया था, लेकिन फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार पूरा हो चुका था। लीसेस्टर सिटी इंग्लिश प्रीमियर लीग की चैंपियन बन गई थी।
टूर्नामेंट से पहले उड़ा मजाक
यह उपलब्धि इसलिए असाधारण नहीं थी कि क्लब ने खिताब जीता, बल्कि इसलिए कि सीजन शुरू होने से पहले सट्टेबाजों ने उसके चैंपियन बनने की संभावना 5000-1 तय की थी।
इसका मतलब था कि यदि कोई व्यक्ति 1 पाउंड का दांव लगाता और लीसेस्टर चैंपियन बन जाती, तो उसे 5000 पाउंड मिलते। ये ऑड्स इतने असंभव माने जा रहे थे कि कुछ विशेषज्ञों ने मजाक में कहा था कि एल्विस प्रेस्ली के जिंदा मिलने की संभावना भी लीसेस्टर के खिताब जीतने से ज्यादा है।
लेकिन नौ महीनों के भीतर इस छोटे क्लब ने दुनिया की सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग को अपनी सबसे महान कहानी दे दी।
रेलीगेशन से जूझती टीम
2015-16 सीजन की कहानी समझने के लिए एक साल पीछे जाना जरूरी है। 2014-15 में Leicester City ने एक दशक बाद प्रीमियर लीग में वापसी की थी। लेकिन अधिकांश सीजन में वह तालिका के निचले हिस्से में रही। मार्च 2015 तक क्लब रेलीगेशन का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था।
आपको बता दें कि Premier League में रेलीगेशन वह प्रक्रिया है जिसके तहत सीजन के अंत में तालिका में सबसे नीचे रहने वाली तीन टीमों को EFL Championship नाम के एक दूसरे स्तर के डिवीजन में भेज दिया जाता है । एक तरह से इस प्रक्रिया के तहत उन टीमों को एक स्तर नीचे के टूर्नेमेंट खेलकर अपना खेल सुधारना पड़ता है।
कई विशेषज्ञों ने मान लिया था कि लीसेस्टर अगले सीजन में दोबारा दूसरे डिवीजन में खेलने वाली है। लेकिन अप्रैल और मई 2015 में टीम ने शानदार वापसी की। अंतिम नौ मैचों में सात जीत हासिल कर लीसेस्टर ने रेलीगेशन से खुद को बचा लिया और 14वें स्थान पर सीजन समाप्त किया।
हालांकि इस सुधार के बावजूद किसी ने नहीं सोचा था कि अगले ही साल यह टीम चैंपियन बनने की दौड़ में होगी।
विवादों के बीच बदला कोच
सीजन खत्म होने के बाद क्लब ने नाइजेल पियर्सन (Nigel Pearson ) को हटाने का फैसला किया। यह निर्णय कई प्रशंसकों के लिए चौंकाने वाला था क्योंकि उन्हीं की अगुवाई में टीम रेलीगेशन से बची थी।
उनकी जगह जुलाई 2015 में इतालवी कोच क्लाउडियो रानियेरी (Claudio Ranieri) को नियुक्त किया गया। रानियेरी अनुभवी थे, लेकिन उनकी नियुक्ति का स्वागत नहीं हुआ। कुछ महीने पहले ही उन्हें ग्रीस की राष्ट्रीय टीम के कोच पद से हटाया गया था। ग्रीस फ़रो द्वीप समूह जैसी छोटी टीम से हार गई थी और इस कारण उनके नेतृत्व पर सवाल उठ रहे थे।
ब्रिटिश मीडिया और कई फुटबॉल विशेषज्ञों ने इस नियुक्ति का मजाक उड़ाया। कुछ ने इसे प्रीमियर लीग की सबसे खराब नियुक्तियों में से एक तक कह दिया। लेकिन रानियेरी ने आलोचनाओं पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने एक साधारण लेकिन प्रभावी योजना तैयार की।
रानियेरी की रणनीति
रानियेरी जानते थे कि उनकी टीम तकनीकी गुणवत्ता या बजट के मामले में उनकी टीम आर्सेनल (Arsenal) , मैनचेस्टर यूनाइटेड (Manchester United) या चेल्सी (Chelsea) जैसी टीमों की बराबरी नहीं कर सकती। इसलिए उन्होंने अलग रास्ता चुना।
उनकी रणनीति मजबूत रक्षा, तेज काउंटर-अटैक और टीम अनुशासन पर आधारित थी। जब विपक्षी टीम गेंद अपने पास रखती थी, लीसेस्टर धैर्य से इंतजार करता था। जैसे ही गेंद वापस मिलती, टीम बिजली की गति से हमला करती।
यह शैली देखने में साधारण लगती थी, लेकिन पूरे सीजन में बेहद प्रभावी साबित हुई।
बिना सुपरस्टार वाली टीम
Leicester City की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उसके खिलाड़ी खुद को साबित करने के लिए भूखे थे।
गोलकीपर कास्पर श्माइकल महान डेनिश गोलकीपर पीटर श्माइकल के बेटे थे, लेकिन अभी तक अपने पिता जैसी पहचान नहीं बना पाए थे। कप्तान वेस मॉर्गन और रॉबर्ट हुथ को यूरोप के सबसे बड़े डिफेंडरों में नहीं गिना जाता था।
मिडफील्ड में डैनी ड्रिंकवाटर को मैनचेस्टर यूनाइटेड ने कभी अपने भविष्य का हिस्सा नहीं माना था। रियाद महरेज़ फ्रांस के दूसरे स्तर की लीग से आए थे।
एक फैक्ट्री वर्कर जो बना लीसेस्टर का सुपरस्टार
यदि Leicester City की कहानी का कोई चेहरा चुना जाए तो वह जेमी वार्डी होंगे। कुछ साल पहले तक वार्डी इंग्लैंड की नॉन-लीग फुटबॉल में खेल रहे थे। वह दिन में नौकरी करते थे और शाम को फुटबॉल खेलते।
2012 में लीसेस्टर ने उन्हें रिकॉर्ड फीस देकर खरीदा था, लेकिन शुरुआत में उनका प्रदर्शन बहुत प्रभावशाली नहीं था। 2015-16 सीजन ने उनकी जिंदगी बदल दी।
वार्डी ने लगातार 11 प्रीमियर लीग मैचों में गोल करके मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व स्ट्राइकर रूड वान निस्टेलरॉय का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पूरे इंग्लैंड में अब लोग लीसेस्टर की चर्चा करने लगे थे। सीजन के अंत तक वार्डी 24 गोल कर चुके थे और लीग के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में शामिल हो गए थे।
रियाद महरेज़ का प्रभाव
यदि वार्डी लीसेस्टर की गति थे, तो रियाद महरेज़ उसकी कल्पनाशीलता। इस अल्जीरियाई विंगर ने पूरे सीजन में विपक्षी डिफेंडरों को परेशान किया। उनकी ड्रिब्लिंग, बॉल कंट्रोल और निर्णायक पास लीसेस्टर के आक्रमण का सबसे बड़ा हथियार बन गए।
उन्होंने 17 गोल और 11 असिस्ट दर्ज किए। सीजन के अंत में उन्हें PFA Players’ Player of the Year चुना गया। वह यह सम्मान जीतने वाले पहले अफ्रीकी खिलाड़ी बने।
एन‘गोलो कांते का जादू
आज एन’गोलो कांते को आधुनिक फुटबॉल के महानतम मिडफील्डरों में गिना जाता है, लेकिन 2015 में उनका नाम बहुत कम लोग जानते थे।
फ्रांस के छोटे क्लब काएन से आए कांते ने पूरे सीजन में असाधारण प्रदर्शन किया। ऐसा लगता था जैसे मैदान पर एक नहीं बल्कि दो कांते खेल रहे हों।
वह गेंद छीनते थे, आक्रमण शुरू करते थे, रक्षा में मदद करते थे और पूरे मैदान में लगातार दौड़ते रहते थे। कई विश्लेषकों का मानना है कि लीसेस्टर की सफलता के पीछे सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी कांते ही थे।
बड़े क्लबों का संघर्ष
लीसेस्टर की सफलता के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण था। 2015-16 में इंग्लैंड के पारंपरिक दिग्गज क्लब अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं थे।
डिफेंडिंग चैंपियन चेल्सी का सीजन बेहद खराब रहा। जोस मोरिन्हो को बीच सीजन में पद छोड़ना पड़ा। साथ ही मैनचेस्टर यूनाइटेड निरंतरता हासिल नहीं कर पाया।
लिवरपूल अपने नए कोच युर्गेन क्लॉप के साथ बदलाव के दौर से गुजर रहा था। मैनचेस्टर सिटी का ध्यान यूरोपीय प्रतियोगिताओं पर भी था। इसके अलावा आर्सेनल ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर अंक भी गंवाए थे।
इन परिस्थितियों का फायदा लीसेस्टर ने उठाया, लेकिन केवल परिस्थितियां ही पर्याप्त नहीं थीं। टीम को जीतने के लिए लगातार प्रदर्शन भी करना पड़ा।
क्रिसमस तक भी किसी ने विश्वास नहीं किया
दिसंबर 2015 तक लीसेस्टर तालिका के शीर्ष पर पहुंच चुका था। फिर भी अधिकांश विशेषज्ञों का मानना था कि नया साल आते-आते टीम नीचे खिसक जाएगी। जनवरी और फरवरी में भी यही भविष्यवाणी दोहराई जाती रही।
लेकिन हर सप्ताह Leicester City जीतती रही। धीरे-धीरे सवाल भी बदलने लगे। अब लोग यह नहीं पूछ रहे थे कि टीम कब गिरेगी, बल्कि यह पूछ रहे थे कि क्या सचमुच वह चैंपियन बन सकती है?
मार्च और अप्रैल के दबाव भरे महीने
मार्च 2016 में Leicester City की बढ़त मजबूत होने लगी। लेकिन इसके साथ टीम पर दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा था।खिलाड़ियों के पास खिताब जीतने का अनुभव नहीं था। क्लब ने कभी प्रीमियर लीग नहीं जीती थी।
इस मौके पर रानियेरी ने टीम को शांत रखा। उन्होंने खिलाड़ियों को मीडिया शोर से दूर रखा और मैच-दर-मैच सोचने की सलाह दी।
टीम ने लगातार महत्वपूर्ण जीत हासिल की। कई मुकाबले केवल 1-0 से जीते गए, लेकिन यही जीत अंत में निर्णायक साबित हुईं।
वह रात जिसने इतिहास रचा
1 मई 2016 को लीसेस्टर ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ 1-1 ड्रॉ खेला। अब टॉटनहम को खिताबी दौड़ बनाए रखने के लिए अगले दिन चेल्सी को हराना जरूरी था।
2 मई को स्टैमफोर्ड ब्रिज में टॉटनहम 2-0 की बढ़त पर पहुंच गया। ऐसा लग रहा था कि Leicester City को अभी इंतजार करना पड़ेगा।
लेकिन चेल्सी ने शानदार वापसी की। गैरी काहिल और फिर एडेन हैज़र्ड के गोलों ने मैच 2-2 से बराबर कर दिया। अंतिम सीटी बजते ही लीसेस्टर सिटी आधिकारिक रूप से प्रीमियर लीग चैंपियन बन गई।
आंकड़े जो इस चमत्कार को समझाते हैं
टीम ने पूरे सीजन में कुल 38 मुकाबले खेले, जिसमें शानदार खेल दिखाते हुए 23 मैचों में जीत हासिल की और 12 मैच ड्रॉ रहे। पूरी प्रतियोगिता के दौरान टीम को सिर्फ 3 मैचों में हार झेलनी पड़ी, जिससे उन्होंने 81 अंकों के साथ शीर्ष पर रहकर सीजन समाप्त किया।
इस खिताबी सफर में खिलाड़ियों का प्रदर्शन लाजवाब रहा। स्टार खिलाड़ी जेमी वार्डी ने कुल 24 गोल दागे, जबकि रियाद महरेज़ ने 17 गोल करने के साथ ही 11 असिस्ट भी किए।
गोलकीपिंग में कास्पर श्माइकल ने कई महत्वपूर्ण क्लीन शीट रखकर टीम को मजबूत सहारा दिया। वहीं मिडफील्ड में एन’गोलो कांते लीग के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में शामिल रहे। इन सभी खिलाड़ियों को कुशलता से मार्गदर्शित करने वाले क्लाउडियो रानियेरी को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ कोच घोषित किया गया।
क्यों माना जाता है खेल इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर?
खेलों में कई चौंकाने वाले परिणाम हुए हैं। ग्रीस ने यूरो 2004 जीता, अमेरिका ने 1980 के ओलंपिक में सोवियत संघ को हराया, लेकिन लीसेस्टर की कहानी इससे अलग है।
यह एक मैच का चमत्कार नहीं था। यह 38 मैचों तक चली संघर्ष और अपमान की परीक्षा थी।
नौ महीने तक टीम ने दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी लीग में शीर्ष स्थान बनाए रखा। यही कारण है कि इसे अक्सर आधुनिक खेल इतिहास का सबसे बड़ा अंडरडॉग ट्रायम्फ कहा जाता है।
एक दशक बाद भी लोगों की याद में शामिल
2015-16 का Leicester City अभियान केवल फुटबॉल की कहानी नहीं है। यह उम्मीद, विश्वास और सामूहिक प्रयास की कहानी है।
इसने साबित किया कि बड़े बजट, महंगे खिलाड़ी और विशाल इतिहास हमेशा जीत की गारंटी नहीं होते। कभी-कभी एक छोटा क्लब, एक कम आंका गया कोच और कुछ ऐसे खिलाड़ी जिन्हें दुनिया ने नकार दिया हो, मिलकर इतिहास बदल सकते हैं।
5000-1 की संभावना के साथ शुरू हुआ वह सफर आखिरकार प्रीमियर लीग ट्रॉफी पर जाकर समाप्त हुआ। और शायद यही वजह है कि आज भी लीसेस्टर सिटी की 2015-16 की कहानी केवल फुटबॉल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि खेलों में असंभव को संभव बनाने की सबसे महान मिसालों में गिनी जाती है।
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