मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में 14 मई को अपने सरकारी आवास से “भारत शौर्य तिरंगा यात्रा” की शुरुआत की और हाथ में तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय संकट के समय धैर्य और एकता हमारा सबसे बड़ा साथी होते हैं, तब ही हम हर चुनौती से उबरते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि आतंकवाद के खिलाफ जवानों की बहादुरी ने पाकिस्तान के मनोबल को तोड़ा और दुनिया ने वहां के नेताओं एवं सैन्य अफसरों के आतंकियों के जनाजे में शामिल होने का वह कपटी चेहरा देखा।
ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी पर सलामी
मुख्यमंत्री ने बताया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सबूत पेश कर पाकिस्तान को चेतावनी दी, फिर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया। पहले ही दिन सौ से अधिक आतंकियों और उनका समर्थन करने वालों को दंडित कर भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह केवल प्रतिकार नहीं करता, बल्कि छेड़ने वालों को भी नहीं छोड़ता।
तिरंगा: सम्मान और शौर्य का परिचायक
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तिरंगा हमारे देश के आन-मान-शान का प्रतीक है। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल सैनिकों को हमारा सम्मान देना है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और देश की एकता के प्रति आभार व्यक्त करना भी है। सुबह-सुबह भीषण गर्मी के बावजूद जनता की उपस्थिति ने यह दिखाया कि भारतीयों में अपने सैनिकों के प्रति कितनी गहरी श्रद्धा है।
राष्ट्र प्रथम: विकसित भारत का मार्ग
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘राष्ट्र प्रथम’ केच वाक्य को दोहराते हुए कहा कि जब हर नागरिक अपने-अपने क्षेत्र में यह मंत्र अपनाएगा, तब कोई भी विदेशी ताकत भारत को नहीं रोक सकती। उन्होंने पंजाब के आदमपुर में जवानों से मिले प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन की भी प्रशंसा की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद नेता
इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, संगठन महामंत्री धर्मपाल, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, खेल मंत्री गिरीश यादव, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, कई सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और प्रदेश व महानगर अध्यक्षों सहित दर्जनों नेता उपस्थित रहे। आयोजन का संचालन विधान परिषद सदस्य गोविंद नारायण शुक्ल ने किया।
ये भी पढ़ें :- मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई
