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डॉ. के. ए. पॉल की पीएम नरेंद्र मोदी से अपील, अमेरिका–इज़राइल–ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट में 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा पर हो सर्वदलीय बैठक

प्रेस वार्ता में कहा—मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य हमलों के बीच वहां रह रहे भारतीयों पर गंभीर खतरा, भारत सरकार से तत्काल कूटनीतिक और राष्ट्रीय पहल की मांग

नई दिल्ली | 5 मार्च, 2026

अमेरिका–इज़राइल–ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच विश्व के लोकप्रिय ईवेंजेलिस्ट और ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक डॉ. के. ए. पॉल ने आज नई दिल्ली के आंध्र भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि मिडिल ईस्ट में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।

डॉ. पॉल ने कहा कि मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ रहे सैन्य टकराव के बीच विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार हो रहे सैन्य हमलों के कारण खाड़ी देशों और मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों में काम कर रहे लाखों भारतीय गंभीर सुरक्षा और मानवीय जोखिम का सामना कर सकते हैं, यदि हालात और बिगड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति में भारत को एकजुट और स्पष्ट राष्ट्रीय रुख अपनाने की जरूरत है। डॉ. पॉल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को साथ लेकर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल रणनीति तय की जा सके।
डॉ. पॉल ने कहा कि भारत को तेजी और निर्णायक तरीके से कदम उठाने चाहिए। इसके तहत संभावित आपात योजनाएं तैयार करना, क्षेत्र के देशों के साथ कूटनीतिक समन्वय मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारतीय नागरिक किसी संकट का शिकार न बनें।

उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर अब वैश्विक यात्रा और अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, उड़ानों के रद्द होने और यात्रा में व्यवधान के कारण दुबई और दोहा जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट केंद्रों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं, जो इस संकट के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।

डॉ. पॉल ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पक्षों से संपर्क कर कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार अमेरिका और इज़राइल के नेताओं ने बातचीत के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं, जबकि ईरान को भी वार्ता की मेज पर लाने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई इसी तरह बढ़ती रही तो संकट और गहरा सकता है, इसलिए सभी पक्षों को संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए।

डॉ. के. ए. पॉल पिछले 37 वर्षों से वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों से जुड़े रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपतियों और इज़राइल के प्रधानमंत्रियों के साथ बातचीत की है और कई बार ईरान के राजकीय अतिथि के रूप में भी वहां गए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 155 से अधिक राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को संघर्ष रोकने और शांति स्थापित करने के प्रयासों में सलाह दे चुके हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि शांति वार्ता के लिए भारत या तुर्की जैसे तटस्थ स्थान को मंच बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर मिलकर काम करें।

प्रेस वार्ता के अंत में डॉ. पॉल ने कहा, “मिडिल ईस्ट में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं। उनकी सुरक्षा हमारी तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत को एकजुट होकर जिम्मेदारी के साथ अपने नागरिकों की रक्षा करनी चाहिए और शांति की दिशा में पहल करनी चाहिए।”

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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