Saturday, 03 October 2026
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ऐतिहासिक केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक कथागान का आरंभ

रामचरित मानस जंगम विश्व विद्यालय है

एक-एक ऋषि एक-एक युनिवर्सिटी है

नई दिल्ली।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक ऐतिहासिक घटना आकार लेती हुई, जब निमित्त मात्र यजमान लोर्ड डॉलर पोपट की ओर से छोटा बच्चा रुद्र ने सबका स्वागत किया और वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक सिखने वाले छात्रों की ओर से रामचरितमानस और गुरु स्तुति और रामचरितमानस का पहला श्लोक का सिंफनी पर गान हुआ। प्रिंस चार्ल्स की ओर से कथा के लिए शुभेच्छा संदेश और जीसस कॉलेज युनिवर्सिटी ऑफ़ कैंब्रिज के वाइस चांसलर की ओर से सेनेटा एले ने शुभेच्छा संदेश पढा।

बिश्वनाथ मम नाथ पुरारि,
त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारि,
भगत बछल प्रभु कृपा निधाना,
बिश्वबास प्रगटे भगवान।

इन दो बीज पंक्तियां से कथा आरंभ करते हुए बापू ने कहा त्रिभुवन गुरु महादेव के असीम कृपा से विश्व के कुछ प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में से एक,यशस्वी विश्वविद्यालय के प्रांगण में रामकथा को केंद्र में रखकर इकट्ठे हुए हैं। जहां सरोजिनी नायडू, पंडित नेहरू जी, राजीव गांधी, मनमोहन सिंह जी आदि बहुत से प्रसिद्ध लोगों ने अभ्यास किया है। आज ब्रिटिश पार्लियामेंट मेंबर की ओर से किंग चार्ल्स थर्ड बंकिंगहाम पेलेस से बापू का स्वागत किया गया। आर्च बिशप केंटबेरा से डीयर मोरारी बापू का वोर्म वेलकम किया और बापू ने कहा कि मानस स्वयं विश्वविद्यालय है। इसीलिए यह कथा का नामकरण किया है।

विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी में कई फैकल्टी,विभाग होते हैं। मानस एक जंगम यूनिवर्सिटी है। इसमें सात विभाग है। बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक। सातों कांड में विशिष्ट कुलपति बैठे हैं। जिसकी तुलना हम किसी से नहीं कर सकते। सब अपने आप में अनूठे, अनोखे, विरले अद्वितीय है। रूमी ने एक वाक्य कहा की एक बुद्ध पुरुष के पास कोई पांच मिनट परम श्रद्धा लेकर बैठे तो विश्वविद्यालय ना दे सके उतना बुद्घपुरुष प्रदान करता है।। रूमी ने तो पांच मिनट निश्चित किए। रामचरितमानस के कुलपति गोस्वामी जी पांच मिनट नहीं-एक घड़ी, एक घड़ी निकालना भी लोग असमर्थ है तो- आधि घड़ी और आधि में पुनि आध, तुलसी संगत साध की कटे कोटि अपराध! विश्वविद्यालय अपराध मिटाने के लिए होने चाहिए सांप्रत समय में विश्वविद्यालय अपराधों के अड्डे भी बन जाते हैं। यहां लंबा कोर्स नहीं, बहुत सब्जेक्ट भी नहीं। केवल एक विश्वास।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था की कई माइनों में विश्वविद्यालय है मगर देश का एक-एक ऋषि एक-एक यूनिवर्सिटी है। आज तो सब्जेक्ट बहुत बढ़ गए हैं और यह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सबसे ज्यादा नोबेल प्राइज विजेता अभ्यास करके निकले हैं। हम सात और चार मिलाकर ११ विश्वविद्यालय रामचरितमानस में है। एक है वशिष्ठ विश्वविद्यालय- जहां साक्षात परमात्मा ज्ञान प्राप्ति के लिए गए। दूसरा है- विश्वामित्र विश्वविद्यालय जहां बल और तेजस्विता बढे ऐसी पढ़ाई होती है। तीसरा है महर्षि गौतम, फिर वाल्मीकि, अगस्त्य, याज्ञ वल्क्य और एक निकट लगता है-कागभुसुंडि। यह सात कुलपति विराजमान है। चार परम विश्वविद्यालय: कैलाश-जहां शिव बैठे हैं। प्रयाग, निलगिरी और चौथे तुलसीदास जी। सांप्रत समय में शिक्षा दीक्षा की जरूरत नहीं रामचरितमानस सब समाधान प्रदान करता है।

हमारी भूमि पर भी नालंदा तक्षशिला है, वो खंडहर कहता है कि कितने महान विश्वविद्यालय थे। विश्वविद्यालय उसे कहते हैं जिसमें वैश्विक विधाओं का आदान-प्रदान होता हो। रामचरितमानस वैराग्य का विश्वविद्यालय ज्ञान और विज्ञान का भी विश्वविद्यालय है। यहां कैंब्रिज में पढ़ाई जाने वाले विभाग देखे। बहुत से है और रामचरितमानस के चौपाई दोहे सोरठा में भी संकेत मुझे दिखते हैं, तो मानस को दूसरी दृष्टि से देखने का अवसर मुझे भी मिला है। सद ग्रंथ महिमा को कहते हुए बापू ने कहा कि सद्गुरु सद ग्रंथ भी है और सद्गुरु भी है।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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