रामानंद सागर की रामायण में लक्ष्मण बने सुनील लहरी ने नए संस्करण में रवि दुबे के अभिनय की सराहना की है। जानिए ‘रामायण पार्ट 1’ में रवि दुबे ने लक्ष्मण के किरदार को किस तरह निभाया है।
मुंबई: रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ 5 नवंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस पौराणिक फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से उत्सुकता थी।
इसकी भव्यता, बड़े बजट, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी टीम और चर्चित कलाकारों ने रिलीज से पहले ही इसे साल की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया था।
फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में हैं। फिल्म को दो भागों में बनाने की योजना है।
रिलीज के साथ ही फिल्म को लेकर समीक्षकों, फिल्मी हस्तियों और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या नितेश तिवारी की यह महत्वाकांक्षी फिल्म रामायण जैसे महाकाव्य को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से पेश कर पाई है?
कैसी है फिल्म की कहानी?
‘रामायण: पार्ट 1’ की कहानी भारतीय महाकाव्य रामायण पर आधारित है। फिल्म का आधार महर्षि वाल्मीकि की रामायण है, हालांकि इसके कथानक में तुलसीदास की रामचरितमानस सहित रामकथा के अन्य प्रचलित स्रोतों का भी संदर्भ लिया गया है।
फिल्म में भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों, संघर्षों और रावण के साथ अच्छाई तथा बुराई के टकराव को बड़े सिनेमाई पैमाने पर दिखाने की कोशिश की गई है।
निर्देशक नितेश तिवारी और पटकथा लेखक श्रीधर राघवन ने इस परिचित कथा को आधुनिक तकनीक और भव्य फिल्म निर्माण के जरिए प्रस्तुत किया है। चूंकि रामायण की कहानी देश के अधिकांश दर्शकों को पहले से पता है, इसलिए फिल्म के सामने चुनौती केवल घटनाओं को दोहराने की नहीं, बल्कि उन प्रसंगों को नए सिनेमाई अनुभव के साथ पेश करने की भी है।
भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर
फिल्म की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक भगवान राम का किरदार निभाना था। रणबीर कपूर के लिए यह भूमिका उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण किरदारों में शामिल है। राम के चरित्र में संयम, मर्यादा, करुणा और दृढ़ता जैसे गुणों को एक साथ दिखाना आसान नहीं है। फिल्म में रणबीर ने इस भूमिका को गंभीरता के साथ निभाने की कोशिश की है।
रणबीर का अभिनय ईमानदार नजर आता है और वह राम के किरदार के अनुरूप संयमित ऊर्जा दिखाते हैं। हालांकि, फिल्म में राम के व्यक्तित्व की कुछ अपेक्षित गहराई और प्रभाव पूरी तरह उभर नहीं पाते। उनका शुरुआती अभिनय को कुछ हद तक दबा हुआ जान पड़ता है, लेकिन आगे चलकर किरदार में सहज भी देखी जा सकती है।
रावण के रूप में यश की छाप
फिल्म में यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। KGF जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाने वाले यश के लिए यह किरदार एक बिल्कुल अलग चुनौती है। रावण केवल एक शक्तिशाली खलनायक नहीं, बल्कि रामायण की कथा का एक जटिल और प्रभावशाली पात्र भी है। फिल्म में उसके अहंकार, शक्ति और प्रतिशोध के पक्ष को उभारने की कोशिश की गई है।
फिल्म में यश का अभिनय उनके अब तक के किरदारों से अलग प्रतीत होता है। यश रावण की विनाशकारी शक्ति और आक्रामक व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारने के लिए पूरी ताकत लगाते नजर आते हैं। रणबीर के संयमित अभिनय के मुकाबले यश का अंदाज अधिक तीव्र और प्रभावशाली दिखाई देता है। दोनों कलाकारों की अलग-अलग अभिनय शैली फिल्म के केंद्रीय संघर्ष को मजबूत बनाती है।
रावण से जुड़े कुछ दृश्य, खासकर उसके युद्ध और शक्ति प्रदर्शन वाले प्रसंग, बड़े पैमाने पर फिल्माए गए हैं। हालांकि, समीक्षकों का एक वर्ग मानता है कि रावण के चरित्र को और अधिक परतों के साथ दिखाया जा सकता था।
साई पल्लवी और रवि दुबे का अभिनय
साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आ रही हैं। सीता का किरदार फिल्म की भावनात्मक धुरी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस भूमिका में गरिमा, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास के बीच संतुलन बनाना जरूरी था। साई उन कलाकारों में शामिल हुई हैं जो पौराणिक किरदारों को मानवीय भावनाओं के साथ पेश करने में सफल रहे हैं।
रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं। लक्ष्मण का किरदार राम के प्रति समर्पण, साहस और भाई के साथ उनके संबंधों के कारण महत्वपूर्ण है। फिल्म में रवि दुबे के अभिनय को लेकर भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं।
रामानंद सागर की रामायण में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने भी नए संस्करण में रवि दुबे के काम की सराहना की है। उन्होंने उनके अभिनय में किरदार के अनुरूप मासूमियत और तीव्रता होने की बात कही।
इसके अलावा फिल्म में कई जाने-पहचाने कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं। रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा, लारा दत्ता कैकेयी, अरुण गोविल और विवेक ओबेरॉय भी फिल्म का हिस्सा हैं। अनूपम खेर ने जटायु के किरदार को आवाज दी है। सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं, हालांकि उनका किरदार मुख्य रूप से दूसरे भाग में दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। फिल्म में आदिनाथ कोठारे, कुणाल कपूर और काजल अग्रवाल सहित अन्य कलाकार भी शामिल हैं।
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फिल्म का विजुअल अनुभव
‘रामायण: पार्ट 1’ की सबसे ज्यादा चर्चा इसके विशाल स्तर और विजुअल इफेक्ट्स को लेकर हो रही है। फिल्म में पौराणिक दुनिया को तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटर जनित इमेजरी (CGI) और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है। युद्ध के दृश्य, विशालकाय जीव, दिव्य अस्त्र और काल्पनिक संसार को पर्दे पर उतारने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी टीम ने काम किया है।
फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स की जिम्मेदारी नमित मल्होत्रा के नेतृत्व वाले DNEG स्टूडियो से जुड़ी है। यह स्टूडियो अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में अपने तकनीकी काम के लिए जाना जाता है। फिल्म के विजुअल्स और तकनीकी भव्यता फिल्म के सबसे मजबूत पक्ष के रूप में उजागर हुए हैं। लगातार बड़े और प्रभावशाली दृश्य दिखाने की कोशिश कई बार कहानी की गति और भावनात्मक जुड़ाव कमजोर भी लगे हैं।
हंस जिमर और एआर रहमान का संगीत
फिल्म के संगीत की एक खास बात यह है कि इसके लिए जर्मन संगीतकार हंस जिमर और एआर रहमान ने पहली बार साथ काम किया है। हंस जिमर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपने बड़े ऑर्केस्ट्रल बैकग्राउंड स्कोर के लिए पहचाने जाते हैं, जबकि एआर रहमान भारतीय फिल्मों में अपने अलग संगीत और धुनों के लिए मशहूर हैं।
दोनों संगीतकारों की साझेदारी से फिल्म के संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर का विस्तार देने की कोशिश की गई है। खासकर युद्ध और एक्शन दृश्यों में बैकग्राउंड स्कोर को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। हंस जिमर का संगीत कई बड़े एक्शन दृश्यों के प्रभाव को और बढ़ाता है।
फिल्म के गीतों के बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर के जरिए पौराणिक कथा के भावनात्मक और आध्यात्मिक पक्ष को उभारने का प्रयास किया गया है।
निर्देशन और पटकथा की चुनौती
‘दंगल’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके नितेश तिवारी ने इस बार एक बड़े पौराणिक महाकाव्य को पर्दे पर उतारने की जिम्मेदारी संभाली है। फिल्म की पटकथा उन्होंने श्रीधर राघवन के साथ मिलकर लिखी है। रामायण जैसी व्यापक कथा को सीमित सिनेमाई समय में प्रस्तुत करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। फिल्म को दो भागों में बांटने का फैसला इसी बड़े कथानक को विस्तार देने की कोशिश का हिस्सा है।
हालांकि, पटकथा को लेकर कुछ कमियां भी नजर आती हैं। फिल्म में कई दृश्य अपने आप में प्रभावशाली हैं, लेकिन वे हमेशा एक सहज और जुड़ी हुई कहानी का हिस्सा महसूस नहीं होते। कुछ प्रसंगों में दृश्य वैभव इतना अधिक हो जाता है कि पात्रों के मनोभाव और कथा के दार्शनिक पक्ष पीछे छूट जाते हैं।
यही फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती भी है। रामायण केवल युद्ध और चमत्कारों की कहानी नहीं है। इसमें रिश्ते, त्याग, मर्यादा, कर्तव्य, धर्म और मानवीय संघर्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। इन भावनात्मक परतों को प्रभावी ढंग से सामने लाना किसी भी रूपांतरण के लिए जरूरी है।
कितनी है फिल्म की लागत और कब आएगा दूसरा भाग?
‘रामायण’ को भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। दोनों भागों का कुल बजट करीब 4,000 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, पहले भाग की लागत को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े सामने आए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में पहले भाग का बजट लगभग 1,600 करोड़ रुपये बताया गया है। इसलिए दोनों भागों के संयुक्त बजट और पहले भाग की लागत को अलग-अलग समझना जरूरी है।
फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय वितरण की जिम्मेदारी सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट संभाल रही है। फिल्म को भारत के साथ दुनियाभर के बाजारों में बड़े स्तर पर रिलीज किया गया है।
पहले भाग के बाद दर्शकों को कहानी के अगले हिस्से के लिए इंतजार करना होगा। इंडिया टुडे की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरा भाग अब दिवाली 2028 के आसपास रिलीज करने की योजना है। पहले इसकी रिलीज 2027 के लिए प्रस्तावित बताई जा रही थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाया गया है। निर्माता नमित मल्होत्रा ने भविष्य में कहानी को तीन भागों तक विस्तार देने की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया है।
रामायण पार्ट 1 देखें या नहीं?
शुरुआती समीक्षाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि ‘रामायण: पार्ट 1’ बड़े पर्दे पर भव्य पौराणिक अनुभव देने की कोशिश करती है। इसके विजुअल इफेक्ट्स, एक्शन सीक्वेंस, कलाकारों की मौजूदगी और संगीत इसे थिएटर में देखने लायक बनाते हैं। रणबीर कपूर और यश के बीच राम-रावण का टकराव फिल्म का प्रमुख आकर्षण है। साई पल्लवी और रवि दुबे ने भी अपने किरदारों में संवेदनशीलता लाने का प्रयास किया है।
दूसरी ओर, कहानी की गति, किरदारों की गहराई और भावनात्मक जुड़ाव के मामले में फिल्म हर जगह समान रूप से प्रभावशाली नहीं बन पाती। जो दर्शक रामायण की कथा को नए तकनीकी अंदाज में बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म एक दिलचस्प अनुभव हो सकती है। लेकिन जो दर्शक पात्रों के मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक पक्ष को अधिक विस्तार से देखना चाहते हैं, उन्हें कुछ हिस्सों में कमी महसूस हो सकती है।


