सऊदी अरब के पास ड्रोन हमले की घटना क्षेत्रीय तनाव के बीच सामने आई है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में बढ़ती सैन्य गतिविधियां समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
रियाद/मक्का: सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का को लेकर मंगलवार, 15 सितंबर की शाम सामने आई एक सुरक्षा घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, देश की वायु रक्षा प्रणाली ने यमन के हूती समूह की ओर से लॉन्च किए गए एक ड्रोन को मक्का के दक्षिण में उस समय रोककर नष्ट कर दिया, जब वह शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था।
इसके बाद मक्का समेत देश के कई इलाकों में संभावित खतरे को लेकर सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए। सऊदी अधिकारियों ने मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा को ‘रेड लाइन’ बताया है।
इस घटना की खास बात यह है कि हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान मक्का में पहली बार संभावित हवाई हमले को लेकर आपात चेतावनी जारी की गई। सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने मक्का के अलावा जेद्दा, ताइफ और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी संभावित खतरे की चेतावनी जारी की थी। हालांकि, ये चेतावनियां थोड़े समय बाद हटा दी गईं और अधिकारियों ने बताया कि तत्काल खतरा टल गया है।
शाम 6:50 बजे ड्रोन को किया गया इंटरसेप्ट
सऊदी नेतृत्व वाले यमन गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार, 15 सितंबर की शाम करीब 6:50 बजे रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्सेज ने एक शत्रुतापूर्ण ड्रोन को मक्का के दक्षिण में इंटरसेप्ट कर नष्ट किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन को उस समय मार गिराया गया, जब वह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था।
अल-मलिकी ने इसे मक्का को निशाना बनाने की कोशिश बताया और कहा कि यह 2017 के बाद ऐसी दूसरी घटना है। उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और वहां आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए ‘रेड लाइन’ है तथा भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सऊदी अधिकारियों के बयान के मुताबिक, ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। इसका मतलब यह है कि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार ड्रोन मक्का शहर या ग्रैंड मस्जिद के ऊपर नहीं पहुंचा था।
मक्का में पहली बार एयर रेड अलर्ट
मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां ग्रैंड मस्जिद में काबा स्थित है। दुनिया भर से लाखों मुस्लिम हर साल हज और उमरा के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में किसी संभावित हवाई हमले की चेतावनी का जारी होना सामान्य सुरक्षा अलर्ट से अलग महत्व रखता है।
रिपोर्टों के अनुसार, हालिया संघर्ष के दौरान मक्का के लिए इस तरह का अलर्ट अभूतपूर्व था। इससे पहले सऊदी अरब के अन्य इलाकों में हूती हमलों के खतरे को लेकर चेतावनियां जारी की जाती रही थीं, लेकिन इस बार मक्का भी उस सुरक्षा दायरे में आ गया।
मंगलवार को जारी चेतावनियां केवल मक्का तक सीमित नहीं थीं। जेद्दा, ताइफ, जाजान, अबहा, यानबू और अल-उला समेत कई इलाकों को भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट किया गया था।
हूतियों ने किया इनकार
सऊदी अरब के दावे के कुछ घंटों बाद हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने की बात से इनकार कर दिया। हूती राजनीतिक ब्यूरो से जुड़े अधिकारी हाजेम अल-असद ने सऊदी दावे को खारिज करते हुए कहा कि मक्का को निशाना बनाने की बात गलत है। हूती पक्ष का कहना है कि सऊदी अरब का आरोप नया नहीं है और वह पहले भी इस तरह के आरोप लगा चुका है।
इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी में दो अलग-अलग दावे सामने आते हैं। सऊदी अरब का कहना है कि मक्का की ओर आने वाले हूती ड्रोन को रोका गया, जबकि हूती पक्ष मक्का को निशाना बनाने से इनकार करता है
ये भी पढ़ें :- भारत-ताजिकिस्तान रोड एक्सपीडिशन को दुशांबे में हरी झंडी, संबंध मजबूत करने पर जोर
पहले भी मक्का की ओर आया था बैलिस्टिक मिसाइल
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता ने मौजूदा घटना को मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश बताया है। उनके मुताबिक इससे पहले 27 जुलाई 2017 को हूतियों की ओर से एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई थी, जिसे सऊदी रक्षा बलों ने रोक दिया था। सऊदी अधिकारियों ने उस समय भी दावा किया था कि मिसाइल मक्का की दिशा में आ रही थी।
हालांकि 2017 की घटना के संबंध में भी हूती पक्ष ने उस समय मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया था। इसलिए मौजूदा घटना को समझते समय यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि सऊदी अधिकारी इसे मक्का पर दूसरा प्रयास बता रहे हैं, जबकि लक्ष्य को लेकर हूती पक्ष अलग दावा करता है।
सऊदी अरब पर बढ़ते हमले
मक्का की घटना ऐसे समय हुई है जब सऊदी अरब के कई हिस्सों में हूती हमलों का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, 14 सितंबर को खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ के नागरिक इलाकों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। इन हमलों में 13 नागरिकों के घायल होने और सात मकानों तथा दो वाहनों को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली।
इसके बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में कई चेतावनियां जारी कीं। अधिकारियों ने नागरिकों से स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा। सऊदी गठबंधन ने कहा कि वह देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करेगा।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले के हमलों में भी बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। पिछले सप्ताह हुए एक हमले में 70 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले से भी बढ़ी चिंता
सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों का असर केवल सैन्य और नागरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन भी हालिया ड्रोन हमलों की चपेट में आई है।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने 12 सितंबर को कहा था कि रियाद और मदीना क्षेत्रों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को इराक से लॉन्च किए गए कई ड्रोन से निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमले में लोग घायल हुए और कुछ नुकसान हुआ। रियाद ने कहा कि उसने तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया और इराकी सरकार को अपनी तरफ से हमले रोकने के लिए कदम उठाने का अवसर दिया है। साथ ही सऊदी अरब ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा।
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को पश्चिमी तट से जोड़ती है। क्षेत्र में तेल परिवहन और समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ने के कारण इस पर हुए हमले का अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालिया घटनाक्रमों के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब भी बने अहम मोर्चे
मौजूदा तनाव को केवल सऊदी अरब और हूतियों के बीच टकराव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यमन के हूती समूह का लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास प्रभाव क्षेत्र क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हूती समूह ने यमन के लाल सागर तट के कुछ हिस्सों पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही, तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। सऊदी अरब के लिए स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण उसके पारंपरिक तेल निर्यात मार्गों पर पहले से दबाव बना हुआ है।
मुस्लिम देशों और संगठनों की प्रतिक्रिया
मक्का के पास ड्रोन को रोकने की खबर सामने आने के बाद मुस्लिम देशों और संगठनों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने मक्का और मदीना क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले हमलों की निंदा की और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई।
मुस्लिम समूहों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि मक्का और मदीना जैसे धार्मिक स्थलों को क्षेत्रीय संघर्ष की चपेट में आने से कैसे बचाया जाए। हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी दावे से इनकार किया है, लेकिन ड्रोन और मिसाइल हमलों की बढ़ती संख्या ने इन पवित्र शहरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
क्षेत्रीय तनाव का बढ़ता दायरा
मक्का के पास ड्रोन को रोकने की घटना ने सऊदी अरब के सामने सुरक्षा चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में ड्रोन और मिसाइल हमले, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला और अब मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट किए जाने की घटना क्षेत्रीय तनाव के बढ़ते दायरे को दिखाती है।
हालांकि, मक्का को जानबूझकर निशाना बनाया गया था या ड्रोन का कोई दूसरा लक्ष्य था, इस पर सऊदी अरब और हूती पक्ष के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए फिलहाल सबसे पुष्ट तथ्य यह है कि 15 सितंबर की शाम सऊदी वायु रक्षा ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले नष्ट किया और इसके बाद मक्का समेत कई इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यमन, सऊदी अरब और व्यापक पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सऊदी सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता मक्का और मदीना समेत महत्वपूर्ण धार्मिक एवं नागरिक स्थलों की सुरक्षा बनाए रखना होगी, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर हमलों और उनके जवाब में होने वाली सैन्य कार्रवाई से तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।


