क्रिकेट जगत ने अपना सबसे महान ऑलराउंडर खो दिया। 89 वर्ष की उम्र में सर गैरी सोबर्स का निधन हो गया। जानिए उनके रिकॉर्ड, उपलब्धियां और वह विरासत, जिसने विश्व क्रिकेट की एक मजबूत नींव रखी।
ब्रिजटाउन, बारबाडोस: क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिन्हें आंकड़ों से नहीं, बल्कि उनके प्रभाव से याद किया जाता है। सर गारफील्ड सेंट ऑबर्न “गैरी” सोबर्स ऐसा ही एक नाम थे।
शुक्रवार (17 जुलाई) को बारबाडोस में 89 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ क्रिकेट ने केवल एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि उस युग को अलविदा कहा, जिसने इस खेल को नई पहचान दी। उनके निधन की खबर सामने आते ही दुनिया भर के क्रिकेट बोर्डों, खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
लगभग दो दशकों तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर राज करने वाले सोबर्स को आज भी इतिहास का सबसे महान ऑलराउंडर माना जाता है।
दुनिया ने महान बल्लेबाज देखे, घातक गेंदबाज देखे और बेहतरीन फील्डर भी देखे, लेकिन एक ऐसा खिलाड़ी, जो इन तीनों भूमिकाओं में विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ हो वह सिर्फ गैरी सोबर्स थे।
उनकी बल्लेबाजी में कलात्मकता थी, गेंदबाजी में विविधता थी और फील्डिंग में अद्भुत फुर्ती। यही वजह है कि क्रिकेट इतिहास में उनके जैसा दूसरा खिलाड़ी आज तक नहीं मिला।
गरीबी में बीता बचपन
28 जुलाई 1936 को ब्रिजटाउन (बारबाडोस) में जन्मे गैरी सोबर्स का बचपन आसान नहीं था। उनका पूरा नाम Garfield St Aubrun Sobers था। जब वे केवल पांच वर्ष के थे, तब उनके पिता McDonald Sobers का निधन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रॉयल नेवी में सेवा देते समय हो गया। पिता के साये के बिना उनकी परवरिश उनकी मां Thelma Sobers ने बेहद कठिन परिस्थितियों में की।
बारबाडोस की गलियों में खेलने वाला यह लड़का शुरू से ही असाधारण प्रतिभा का धनी था। बचपन से ही सोबर्स क्रिकेट के साथ-साथ फुटबॉल, बास्केटबॉल और गोल्फ जैसे खेलों में भी समान रूप से दक्ष थे। लेकिन क्रिकेट उनकी असली पहचान बनने वाला था।
17 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू, दुनिया ने देखी नई प्रतिभा
सोबर्स ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ सबीना पार्क, जमैका में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। शुरुआत में उनकी पहचान एक बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के रूप में थी।
वह धीमी लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाजी करते थे, लेकिन जरूरत पड़ने पर चाइनामैन (Left-arm Wrist Spin) और लेफ्ट-आर्म मीडियम पेस भी उतनी ही प्रभावी तरीके से डाल सकते थे।

यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी। कप्तान को जिस तरह की गेंदबाजी चाहिए होती, सोबर्स उसी अंदाज में गेंदबाजी करने में सक्षम थे। क्रिकेट इतिहास में ऐसे खिलाड़ी बेहद कम हुए हैं, जिन्होंने तीन अलग-अलग प्रकार की गेंदबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलतापूर्वक अपनाया हो।
365* की वह शानदार पारी
फरवरी 1958, स्थान था किंग्स्टन (जमैका) का Sabina Park और मुकाबला था वेस्ट इंडीज का मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ था।
उस समय सोबर्स केवल 21 वर्ष के थे। उन्होंने 614 मिनट तक बल्लेबाजी करते हुए 365 रन नाबाद बनाए और उस समय का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

इस पारी ने महान ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज लेन हटन (Len Hutton) के 364 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। लगभग 36 वर्षों तक यह रिकॉर्ड कायम रहा, जिसे आखिरकार 1994 में वेस्टइंडीज के ही ब्रायन लारा ने इंग्लैंड के खिलाफ 375 रन बनाकर तोड़ा।

दिलचस्प बात यह है कि जिस रिकॉर्ड को लारा ने तोड़ा, वही बाद में फिर लारा के पास लौटा जब उन्होंने 2004 में 400 रन बनाए। लेकिन इस महान रिकॉर्ड की नींव सबसे पहले गैरी सोबर्स ने ही रखी थी।
सोबर्स की महानता की गवाही देते आंकड़े
गैरी सोबर्स ने 93 टेस्ट मैचों में 8,032 रन बनाए। उनका बल्लेबाजी औसत 57.78 रहा, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल हैं। गेंदबाजी में उन्होंने 235 विकेट लिए, जबकि फील्डिंग में 109 कैच पकड़े।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड और भी अविश्वसनीय है। उन्होंने 383 मैचों में 28,314 रन, 86 शतक, 1043 विकेट और 407 कैच अपने नाम किए। ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि वे केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में भी एक संपूर्ण खिलाड़ी थे।
6 गेंदों पर 6 छक्के
आज जब भी क्रिकेट में छह गेंदों पर छह छक्कों की बात होती है, तो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में सबसे पहले युवराज सिंह की 2007 टी-20 विश्व कप वाली ऐतिहासिक पारी आती है।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि क्रिकेट इतिहास में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज़ वेस्टइंडीज सर गैरी सोबर्स ही थे।
31 अगस्त 1968 को इंग्लैंड की नॉटिंघमशायर काउंटी के लिए खेलते हुए सोबर्स ने ग्लैमॉर्गन के स्पिनर मैल्कम नैश (Malcolm Nash) के एक ही ओवर की सभी छह गेंदों पर लगातार छह छक्के जड़ दिए।
यह प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-Class Cricket) के इतिहास में पहली बार था, जब किसी बल्लेबाज़ ने यह कारनामा किया। उस दौर में न टी-20 क्रिकेट था और न ही आक्रामक बल्लेबाज़ी इतनी आम थी, इसलिए सोबर्स की यह उपलब्धि अपने समय से कई दशक आगे मानी गई।
बाद में रवि शास्त्री (1985), हर्शल गिब्स (2007), युवराज सिंह (2007), रॉस व्हाइटली (2017), कीरोन पोलार्ड (2021) और दीपेंद्र सिंह ऐरी (2023) जैसे बल्लेबाज़ों ने भी यह उपलब्धि हासिल की, लेकिन इसकी शुरुआत करने वाले पहले खिलाड़ी हमेशा सर गैरी सोबर्स ही रहेंगे।
कप्तान के रूप में भी दिखाई असाधारण नेतृत्व क्षमता
1965 में गैरी सोबर्स को वेस्टइंडीज टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपी गई। उन्होंने लगभग सात वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया। यह वह दौर था जब कैरेबियाई क्रिकेट लगातार मजबूत हो रहा था और आने वाले वर्षों में विश्व क्रिकेट पर अपना दबदबा बनाने की तैयारी कर रहा था।
सोबर्स की कप्तानी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सकारात्मक सोच थी। वे हमेशा जीत के लिए खेलते थे और खिलाड़ियों को खुलकर प्रदर्शन करने की आज़ादी देते थे।
उनकी नेतृत्व शैली ने बाद में क्लाइव लॉयड की विश्व विजेता वेस्टइंडीज टीम के लिए मजबूत आधार तैयार किया। विवियन रिचर्ड्स, माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स और जोएल गार्नर जैसे खिलाड़ियों की स्वर्णिम पीढ़ी जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ी, उसकी पृष्ठभूमि तैयार करने में सोबर्स की सोच और नेतृत्व की बड़ी भूमिका मानी जाती है।
सोबर्स को कैसे मिली ‘सर’ की उपाधि
गैरी सोबर्स की महानता केवल मैदान तक सीमित नहीं रही। क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 1975 में ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय द्वारा Knight Bachelor की उपाधि से सम्मानित किया गया और तभी से दुनिया उन्हें Sir Garfield Sobers के नाम से जानने लगी।
इसके बाद उन्हें 1998 में Barbados National Hero घोषित किया गया, जो देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
2009 में उनका नाम ICC Cricket Hall of Fame में शामिल किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने अपने साल के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर के पुरस्कार का नाम भी Sir Garfield Sobers Trophy रखा, जो इस बात का प्रमाण है कि विश्व क्रिकेट उनके योगदान को कितनी ऊंची जगह देता है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने गैरी सोबर्स
गैरी सोबर्स का प्रभाव केवल उनके खेलने के समय तक सीमित नहीं रहा। ब्रायन लारा, सर विवियन रिचर्ड्स, क्लाइव लॉयड, जैक्स कैलिस और सचिन तेंदुलकर सहित अनेक महान खिलाड़ियों ने समय-समय पर स्वीकार किया कि सोबर्स उनके लिए प्रेरणा रहे।
जब ब्रायन लारा ने 1994 में सोबर्स का 365* का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा था, तब उन्होंने सबसे पहले उन्होंने अपने हीरो को सम्मान दिया। वहीं विवियन रिचर्ड्स ने कई मौकों पर कहा कि कैरेबियाई क्रिकेट की पहचान बनाने वालों में गैरी सोबर्स का स्थान सबसे ऊपर है।

आज भी दुनिया भर के क्रिकेट कोच युवा खिलाड़ियों को गैरी सोबर्स का उदाहरण देते हैं कि एक खिलाड़ी केवल किसी एक कौशल तक सीमित नहीं होना चाहिए। मेहनत और निरंतर सीखने की इच्छा उसे हर क्षेत्र में बेहतर बना सकती है।
एक ऐसी विरासत, जो हमेशा जीवित रहेगी
17 जुलाई 2026 को बारबाडोस में 89 वर्ष की आयु में गैरी सोबर्स का निधन हो गया। उनके परिवार ने बताया कि पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
क्रिकेट वेस्टइंडीज, ICC, BCCI, ECB, Cricket Australia सहित दुनिया के लगभग सभी प्रमुख क्रिकेट बोर्डों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर हजारों खिलाड़ियों, पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने उन्हें याद करते हुए लिखा कि क्रिकेट ने अपना सबसे संपूर्ण खिलाड़ी खो दिया है।
BCCI ने दी सोबर्स को भावभीनी श्रद्धांजलि
वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स के निधन पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
BCCI ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक थ्रोबैक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि, “क्रिकेट ने आज अपने सबसे महान ऑलराउंडर को खो दिया। सर गैरी सोबर्स केवल एक महान क्रिकेटर नहीं थे, बल्कि इस खेल के सच्चे प्रतीक थे। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।”
अपने संदेश में BCCI ने भारत के हालिया वेस्टइंडीज दौरे का भी जिक्र किया, जब रोहित शर्मा, विराट कोहली, रविचंद्रन अश्विन, शुभमन गिल समेत भारतीय खिलाड़ियों ने बारबाडोस में गैरी सोबर्स से मुलाकात की थी।
बोर्ड ने उस खास पल का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि क्रिकेट के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक के साथ बिताए गए वे पल हमेशा यादगार रहेंगे। BCCI ने अंत में उनके परिवार, मित्रों और पूरी क्रिकेट बिरादरी के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सर गैरी सोबर्स का योगदान और उनकी विरासत हमेशा क्रिकेट जगत को प्रेरित करती रहेगी।
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