Friday, 28 August 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
एमईआरआई कॉलेज में टीवी एंकरिंग और करियर अवसरों पर एक्सपर्ट टॉक ₹22,006 करोड़ के दावे पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ भुगतान, NCLT ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया में की बड़ी कटौती 27 अगस्त 1896: जब सिर्फ 38 मिनट में खत्म हो गई इतिहास की सबसे छोटी जंग, जानिए एंग्लो-जांजीबार युद्ध की पूरी कहानी राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग के बेटों की टीम इंडिया में एंट्री, U-19 ऑस्ट्रेलिया सीरीज में बनाई जगह SAD-BJP गठबंधन पर सियासी घमासान शुरु, भगवंत मान बोले- ‘अकाली बीजेपी के साथ जाने के लिए भीख मांग रहे’ नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड की तबाही में 160 से ज्यादा मौतें, करीब 300 भारतीयों के भी लापता होने की खबर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिकी यात्रा से पहले डॉ. के. ए. पॉल ने धर्मों के बीच समानता का आह्वान किया MERI समूह ने दिखाई भारत की स्पेस-मैरीटाइम शक्ति की नई राह, 2047 के आर्थिक लक्ष्य पर फोकस एमईआरआई कॉलेज में टीवी एंकरिंग और करियर अवसरों पर एक्सपर्ट टॉक ₹22,006 करोड़ के दावे पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ भुगतान, NCLT ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया में की बड़ी कटौती 27 अगस्त 1896: जब सिर्फ 38 मिनट में खत्म हो गई इतिहास की सबसे छोटी जंग, जानिए एंग्लो-जांजीबार युद्ध की पूरी कहानी राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग के बेटों की टीम इंडिया में एंट्री, U-19 ऑस्ट्रेलिया सीरीज में बनाई जगह SAD-BJP गठबंधन पर सियासी घमासान शुरु, भगवंत मान बोले- ‘अकाली बीजेपी के साथ जाने के लिए भीख मांग रहे’ नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड की तबाही में 160 से ज्यादा मौतें, करीब 300 भारतीयों के भी लापता होने की खबर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिकी यात्रा से पहले डॉ. के. ए. पॉल ने धर्मों के बीच समानता का आह्वान किया MERI समूह ने दिखाई भारत की स्पेस-मैरीटाइम शक्ति की नई राह, 2047 के आर्थिक लक्ष्य पर फोकस

एमएलएफएफ टेंडर प्रक्रिया पर हाईकोर्ट के फैसले तक रोक की मांग, स्काईलार्क और श्री साई ने दिल्ली सरकार से मांगा हस्तक्षेप

प्रतिबंधात्मक पात्रता शर्तों से प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने का दावा, स्वतंत्र जांच और ₹500 करोड़ से अधिक संभावित राजस्व नुकसान की आशंका

नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से 154 दिल्ली सीमा प्रवेश बिंदुओं पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली लागू करने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस निविदा में भाग लेने वाली स्काईलार्क इंफ्रा इंजीनियरिंग प्रा. लि. और श्री साई एंटरप्राइजेज एंड डेवलपर्स प्रा. लि. ने अलग-अलग प्रतिनिधित्व के माध्यम से दिल्ली सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। दोनों कंपनियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय का अंतिम फैसला आने तक टेंडर प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए और किसी भी कंपनी को लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी न किया जाए।

दोनों कंपनियों ने अपने प्रतिनिधित्व में कहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका W.P.(C) No. 8368/2026 में निविदा की पात्रता शर्तों की वैधानिकता, निष्पक्षता और संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। ऐसे में न्यायिक निर्णय आने से पहले टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देना सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े कर सकता है।

प्रतिनिधित्वों के अनुसार, निविदा में ऐसी पात्रता शर्त शामिल की गई, जिसके तहत किसी भी बोलीदाता के लिए एक ही अनुबंध के अंतर्गत लगातार दो वर्षों तक 122 टोल लेन संचालित करने का अनुभव अनिवार्य किया गया। कंपनियों का दावा है कि इस शर्त के कारण पूरे देश में केवल तीन कंपनियां ही तकनीकी रूप से पात्र रह गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। उनका यह भी कहना है कि एमसीडी ने अपनी पूर्व की एक निविदा में इसी शर्त को अत्यधिक प्रतिबंधात्मक मानते हुए हटा दिया था, जबकि वर्तमान परियोजना के दायरे में कोई ऐसा महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जिससे इसे दोबारा लागू करना आवश्यक हो।

दोनों कंपनियों ने अपने प्रतिनिधित्व में दिल्ली विजिलेंस विभाग और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) से इस पूरी निविदा प्रक्रिया, पात्रता शर्तों के निर्धारण और खरीद प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरी प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और सार्वजनिक हित के अनुरूप रही है या नहीं।

स्काईलार्क ने अपने प्रतिनिधित्व में दावा किया है कि उसकी वित्तीय बोली ₹1,057.77 करोड़ थी, जबकि वर्तमान H-1 बोली ₹963.99 करोड़ की है, जिसके बीच लगभग ₹469 करोड़ का अंतर है। कंपनी का कहना है कि यदि पात्रता शर्तें अधिक व्यापक और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने वाली होतीं, तो अधिक योग्य कंपनियां भाग ले सकती थीं और नगर निगम को ₹500 करोड़ से अधिक अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना थी।

मुख्य मांगें

दोनों कंपनियों ने दिल्ली सरकार से आग्रह किया है कि—

  • दिल्ली उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय तक एमएलएफएफ निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
  • न्यायालय का फैसला आने तक किसी भी प्रकार का लेटर ऑफ अवार्ड जारी न किया जाए।
  • पूरे मामले की स्वतंत्र जांच दिल्ली विजिलेंस विभाग और केंद्रीय सतर्कता आयोग से कराई जाए।
  • आवश्यकता पड़ने पर वर्तमान निविदा को निरस्त कर निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गैर-प्रतिबंधात्मक पात्रता शर्तों के साथ नई निविदा जारी की जाए।
  • सार्वजनिक हित, अधिकतम प्रतिस्पर्धा और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

दोनों कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी विशेष बोलीदाता पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, समान अवसर और सार्वजनिक हित को सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ी परियोजनाओं का आवंटन ऐसी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, जो संविधान के मूल सिद्धांतों, विधि के शासन और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती हो।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।