ICC के नए World Cup फॉर्मेट के बाद भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले एक ही टूर्नामेंट में कई बार देखने को मिल सकते हैं। जानिए नए नियमों की पूरी जानकारी।
एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड: क्रिकेट की दुनिया में विश्व कप केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों की भावनाओं का सबसे बड़ा मंच होता है। हर चार साल में होने वाला One Day World Cup हो या हर दो साल में आयोजित T20 World Cup, इनके फॉर्मेट में होने वाला छोटा बदलाव भी सीधे खेल की रणनीति, रोमांच और भविष्य को प्रभावित करता है।
अब इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 15 जुलाई को ऐसा ही बड़ा फैसला लिया है, जिसने आने वाले दो विश्व कपों की पूरी तस्वीर बदल दी है।
ICC ने 2027 पुरुष ODI World Cup और 2028 पुरुष T20 World Cup के लिए नए टूर्नामेंट फॉर्मेट की घोषणा की है। इन बदलावों के तहत ‘Super Series’, ‘Super 7’, ‘Super 10’ और ‘Eliminator’ जैसे नए चरण जोड़े गए हैं।
ICC का कहना है कि इनका उद्देश्य अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले, कम औपचारिक (Dead Rubber) मैच और एसोसिएट देशों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। हालांकि आलोचक इसे बड़े मुकाबलों विशेषकर भारत-पाकिस्तान जैसी हाई-प्रोफाइल भिड़ंत की संख्या बढ़ाने की कोशिश भी मान रहे हैं।
क्यों बदला गया World Cup का फॉर्मेट?
पिछले कुछ वर्षों में ICC के बड़े टूर्नामेंटों को लेकर लगातार यह शिकायत सामने आती रही कि ग्रुप चरण के कई मुकाबले औपचारिक बन जाते हैं, क्योंकि कुछ टीमें शुरुआती मैचों में ही बाहर होने की स्थिति में पहुंच जाती हैं। दूसरी ओर, बड़े क्रिकेट देशों के बीच मुकाबले सीमित रह जाते हैं।
ICC के अनुसार नया ढांचा प्रत्येक मैच को अधिक महत्वपूर्ण बनाएगा, नॉकआउट चरण तक पहुंचने की प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा और छोटे क्रिकेट देशों को भी आगे बढ़ने का स्पष्ट रास्ता देगा।
2027 ODI World Cup में क्या होगा नया?
2027 का ODI World Cup दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इसमें कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन इस बार सभी टीमें सीधे मुख्य ग्रुप चरण में नहीं पहुंचेंगी।
पहला चरण: Super Series
Super Series इस नए फॉर्मेट का सबसे बड़ा बदलाव है। ICC रैंकिंग के आधार पर क्वालिफाई करने वाली सबसे निचली तीन टीमें पहले Super Series खेलेंगी। तीनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करेंगी और इनमें से केवल एक टीम मुख्य विश्व कप चरण में जगह बना पाएगी। बाकी दो टीमें यहीं बाहर हो जाएंगी।
यानी 14 टीमें विश्व कप के लिए क्वालिफाई करेंगी, लेकिन मुख्य प्रतियोगिता में केवल 12 टीमें ही खेलेंगी।
दूसरा चरण: Main Group Stage
Super Series के बाद बची हुई 12 टीमों को दो समूहों—ग्रुप A और ग्रुप B—में छह-छह टीमों के रूप में बांटा जाएगा। प्रत्येक टीम अपने ग्रुप की बाकी पांच टीमों के खिलाफ एक-एक मैच खेलेगी। इन मुकाबलों के आधार पर अंकतालिका तैयार होगी और यहीं से तय होगा कि कौन-सी टीमें अगले चरण यानी Super 7 में जगह बनाएंगी।

क्या है Super 7?
Super 7 इस नए वनडे विश्व कप फॉर्मेट का सबसे अहम और रोमांचक चरण होगा। Main Group Stage के बाद दोनों ग्रुपों की शीर्ष तीन-तीन टीमें सीधे Super 7 में पहुंचेंगी।
इनके अलावा दोनों ग्रुपों में चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों में से बेहतर रिकॉर्ड वाली एक टीम भी इस चरण के लिए क्वालिफाई करेगी। इस तरह कुल सात टीमें Super 7 में खेलेंगी। यहां सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबले खेलेंगी और इन्हीं नतीजों के आधार पर सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमों का फैसला होगा।
Super 7 में कैसे होंगे मुकाबले?
Super 7 में पहुंचने वाली टीमें अपने ग्रुप से आगे आई टीमों के खिलाफ दोबारा नहीं खेलेंगी।
वे केवल दूसरे ग्रुप से आई टीमों के खिलाफ मैच खेलेंगी।
ग्रुप चरण के कुछ अंक (Points Carry Forward) भी साथ ले जाए जाएंगे, जिससे शुरुआती मैचों का महत्व बना रहेगा।
इसके बाद अंकतालिका के आधार पर शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।
नए फॉर्मेट का फायदा
ICC का मानना है कि इससे –
- हर मैच का महत्व बढ़ेगा।
- शुरुआती दौर में बड़ी टीमों के बाहर होने की संभावना कम होगी।
- ज्यादा प्रतिस्पर्धी मुकाबले देखने को मिलेंगे।
- Dead Rubber मैच घटेंगे।
साथ ही Super 7 चरण में शीर्ष टीमों के बीच लगातार बड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे।
भारत-पाकिस्तान के तीन मुकाबले संभव
नए फॉर्मेट की एक और खास बात यह है कि इसमें भारत और पाकिस्तान के बीच एक ही विश्व कप में तीन मुकाबले होने की संभावना बढ़ सकती है।
यदि दोनों टीमें पहले Main Group Stage में एक ही ग्रुप में हों, फिर Super 7 के लिए क्वालिफाई कर जाएं और अंत में सेमीफाइनल या फाइनल जैसे नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने आ जाएं, तो दोनों के बीच एक ही टूर्नामेंट में तीन बार भिड़ंत हो सकती है।

हालांकि यह पूरी तरह दोनों टीमों के प्रदर्शन और टूर्नामेंट के नतीजों पर निर्भर करेगा।यही वजह है कि कई विशेषज्ञ इस बदलाव को प्रसारण (Broadcast) और व्यावसायिक हितों से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि ICC का कहना है कि बदलाव का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता को अधिक संतुलित बनाना है।
टी20 विश्व कप में भी अहम बदलाव
वनडे विश्व कप 2027 के साथ-साथ ICC ने 2028 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की मेजबानी में होने वाले टी20 विश्व कप के प्रारूप में भी बड़ा बदलाव किया है। पिछले कुछ संस्करणों में अलग-अलग चरणों और सुपर राउंड के कारण टूर्नामेंट को लेकर काफी भ्रम देखने को मिलता था।
अब ICC ने प्रतियोगिता को अधिक प्रतिस्पर्धी, रोमांचक और दर्शकों के लिए आसान बनाने की कोशिश की है। नए प्रारूप में हर मुकाबले का महत्व बढ़ेगा, मजबूत टीमों को लगातार कठिन मैच खेलने होंगे और नॉकआउट तक पहुंचने का रास्ता भी पहले से अलग होगा। ICC का मानना है कि इससे टूर्नामेंट की गुणवत्ता बेहतर होगी और प्रशंसकों को शुरुआत से लेकर फाइनल तक अधिक रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।
पहला चरण: Main Group Stage (Super 10)
2028 के T20 World Cup में कुल 20 टीमें हिस्सा लेंगी, जिन्हें दो समूहों ग्रुप A और ग्रुप B में 10-10 टीमों के रूप में बांटा जाएगा। प्रत्येक टीम अपने समूह की बाकी नौ टीमों से एक-एक मुकाबला खेलेगी, यानी हर टीम को कुल नौ ग्रुप मैच खेलने होंगे। इन मुकाबलों के बाद अंक तालिका के आधार पर प्रत्येक समूह की शीर्ष चार टीमें अगले चरण के लिए क्वालिफाई करेंगी।
ICC का मानना है कि इस प्रारूप से बड़ी और उभरती टीमों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले देखने को मिलेंगे, साथ ही किसी एक खराब मैच से टीम के बाहर होने की संभावना भी कम होगी। इससे पूरे ग्रुप चरण में रोमांच और प्रतिस्पर्धा लगातार बनी रहेगी।
दूसरा चरण: Super 5
ग्रुप चरण समाप्त होने के बाद दोनों समूहों की शीर्ष पांच-पांच टीमें अगले दौर यानी Super 5 में पहुंचेंगी। इस चरण में प्रत्येक टीम दूसरे समूह से क्वालिफाई करने वाली पांचों टीमों के खिलाफ एक-एक मुकाबला खेलेगी। यानी ग्रुप चरण में खेले गए मैच दोबारा नहीं होंगे, बल्कि नए प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले होंगे।
इन मैचों के बाद संयुक्त अंक तालिका तैयार की जाएगी। इस चरण का उद्देश्य केवल मजबूत टीमों को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें दूसरी शीर्ष टीमों के खिलाफ भी अपनी क्षमता साबित करने का अवसर देना है। इससे हर मैच की अहमियत और प्रतिस्पर्धा दोनों पहले से अधिक बढ़ जाएंगी।
तीसरा चरण: Eliminator
Super 5 चरण के बाद दोनों समूहों की दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमें Eliminator मुकाबले खेलेंगी। यानी चार टीमें दो Eliminator मैचों में आमने-सामने होंगी। इन मुकाबलों में जीतने वाली दोनों टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी, जबकि हारने वाली टीमों का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।
चौथा चरण: Semifinal
सेमीफाइनल में कुल चार टीमें खेलेंगी। इनमें Super 5 के दोनों समूहों की शीर्ष टीमों को सीधे सेमीफाइनल का टिकट मिलेगा, जबकि बाकी दो स्थान Eliminator जीतने वाली टीमों को मिलेंगे। इसके बाद दो सेमीफाइनल खेले जाएंगे और विजेता टीमें फाइनल में जगह बनाएंगी। ICC का मानना है कि यह व्यवस्था लीग में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों को सीधा लाभ देगी।
यह नया चरण नॉकआउट रोमांच को और बढ़ाएगा क्योंकि एक हार सीधे टूर्नामेंट से बाहर कर देगी।

पांचवां चरण: Final
दोनों सेमीफाइनल जीतने वाली टीमें फाइनल में आमने-सामने होंगी। इस एक मुकाबले का विजेता ICC Men’s T20 World Cup 2028 का चैंपियन बनेगा। नए प्रारूप का उद्देश्य लीग चरण से लेकर फाइनल तक हर मैच को अधिक प्रतिस्पर्धी और रोमांचक बनाना है।
खिलाड़ियों और प्रसारकों को क्या होगा फायदा?
ICC के इस बदलाव के पीछे व्यावसायिक पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- बड़े देशों के बीच अधिक हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिलेंगे।
- Super Seven और Super 10 चरण में लगभग हर मैच नॉकआउट जैसा महत्व रखेगा।
- ब्रॉडकास्टर्स को अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले मिलेंगे।
- दर्शकों की दिलचस्पी पूरे टूर्नामेंट के दौरान बनी रहने की संभावना बढ़ेगी।
- टीमों को रणनीति बनाने के लिए नए समीकरण अपनाने होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल फुटबॉल और अन्य वैश्विक टूर्नामेंटों की तरह दर्शकों की रुचि अंत तक बनाए रखने की कोशिश है।
भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों पर क्या असर पड़ेगा?
क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार पारंपरिक मजबूत टीमों को नए फॉर्मेट में भी बढ़त मिल सकती है क्योंकि उनके पास गहरी बेंच स्ट्रेंथ और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता होती है।
हालांकि Super Seven और Super 10 चरण में लगातार कठिन मुकाबले होने से किसी भी टीम के लिए गलतियों की गुंजाइश कम होगी। एक खराब मैच पूरे अभियान पर असर डाल सकता है।
यानी मजबूत टीमों को भी अब पूरे टूर्नामेंट में निरंतर प्रदर्शन करना होगा।
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