हरियाणा के नूंह में SIR फॉर्म भरकर घर लौट रही एक विधवा महिला के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नूंह, हरियाणा: हरियाणा के नूंह जिले से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई है। निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से संबंधित फॉर्म भरकर घर लौट रही एक विधवा महिला के साथ कथित तौर पर चलती ऑटो में सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना ने न केवल नूंह बल्कि पूरे प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
SIR फॉर्म भरने गई थी पीड़िता
पुलिस के अनुसार पीड़िता नूंह जिले के तावड़ू थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत आवश्यक दस्तावेज और फॉर्म जमा कराने गई थी। सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वह अपने गांव लौटने के लिए एक ऑटो रिक्शा में बैठी।
महिला का आरोप है कि कुछ दूरी तय करने के बाद ऑटो चालक ने अपने अन्य साथियों को भी वाहन में बैठा लिया। इसके बाद ऑटो को मुख्य सड़क से हटाकर सुनसान इलाके की ओर ले जाया गया, जहां उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। वारदात के बाद आरोपी उसे वहीं छोड़कर फरार हो गए।
चलती ऑटो में कथित गैंगरेप का आरोप
पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शुरुआत में उसे किसी अनहोनी का अंदेशा नहीं था। लेकिन रास्ते में जब ऑटो का रूट बदला गया और उसमें अन्य लोग बैठाए गए, तब उसे शक हुआ।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी है। भारतीय कानून के तहत यौन अपराध की पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
परिजनों को बताई आपबीती
वारदात के बाद पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुंची और अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार के सदस्य उसे लेकर तुरंत पुलिस के पास पहुंचे, जहां उसकी शिकायत दर्ज की गई।
पुलिस ने बिना देरी किए पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और उसका विस्तृत बयान दर्ज किया। इसके साथ ही घटनास्थल से भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सामूहिक दुष्कर्म सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका की पुष्टि के लिए जांच जारी है। सभी आरोपियों की तलाश में अलग-अलग टीमों को लगाया गया है।
पुलिस किन बिंदुओं पर कर रही है जांच?
मामले की जांच कई स्तरों पर की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही जिस ऑटो में महिला के साथ वारदात होने का आरोप है, उसकी पहचान और आवाजाही का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
तकनीकी जांच के तहत मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य फॉरेंसिक पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूत चार्जशीट तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है, लेकिन गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के दायरे में लाया जाएगा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
SIR अभियान के दौरान सामने आई घटना
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब निर्वाचन आयोग की ओर से Special Intensive Revision (SIR) अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सरकारी कार्यालयों में पहुंच रहे हैं।
ऐसे में सरकारी कार्य से लौट रही महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्य से आने-जाने वाली महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।
महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
नूंह की इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। सरकारी काम से घर लौट रही एक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महिलाएं दिनदहाड़े भी सुरक्षित नहीं हैं।
सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों तक आने-जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो आम महिलाओं का विश्वास कानून-व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के साधनों का पर्याप्त सत्यापन, चालकों का रिकॉर्ड और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। ऐसी घटनाएं केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं होतीं, बल्कि समाज में भय का माहौल भी पैदा करती हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। जांच टीम पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों को एक-दूसरे से मिलाकर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के समय ऑटो किस मार्ग से गुजरा, रास्ते में किन-किन स्थानों पर रुका और आरोपियों की पहचान किन साक्ष्यों के आधार पर मजबूत की जा सकती है। यदि आवश्यकता पड़ी तो आसपास के लोगों और संभावित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाएगी और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जाएगी और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह को सोशल मीडिया पर साझा न करें और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा रखें।
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