Monday, 13 July 2026
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दयनीय स्थिति में दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम, जलभराव की समस्या पर हाईकोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फटकार, दिए निर्देश

नई दिल्ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने जलभराव की समस्या के खिलाफ अभी से गंभीरता से लेते हुए उस पर कार्रवाई करने का अधिकारियों को निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में जल निकासी यानी ड्रेनेज सिस्टम बहुत दयनीय और खराब स्थिति में है। शहर की हालत और सरकारी अधिकारियों के रवैये को लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि अथॉरिटीज किसी के वश में नहीं होतीं। सुधार की भावना अधिकारियों के भीतर से आनी चाहिए। अदालतें सब कुछ नहीं कर सकती हैं।

कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि ड्रेनेज सिस्टम का हाल बहुत बुरा है। यह पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। क्या हमारे पास दिल्ली में जल निकासी की कोई व्यवस्था है भी या नहीं है? बहुत ही दयनीय स्थिति है। नव निर्माणों को ही देखिये। उनमें भी बाढ़ आ रही है। इसका निर्माण किसने कराया है? बेंच ने भारत मंडपम के पास एक अंडरपास का जिक्र करते हुए यह बात कही। बेंच ने कहा, आज के समय में जब हमारे पास इतनी सारी टेक्नोलॉजी हैं तो भी यह हाल है।

पीठ दिल्ली में जलभराव की समस्या और मानसून या बाकी वक्त में यहां बारिश के पानी को संचित करने के सिस्टम और ट्रैफिक जाम को सुगम बनाने के मुद्दे पर खुद से संज्ञान लेकर शुरू की गई दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा थी। नई दिल्ली इलाके में जलभराव के कुछ उदाहरण देते हुए जस्टिस मनमोहन ने कहा कि हममें से कुछ लोग शिकायत कर रहे थे कि मॉनसून के दौरान हमारे ड्राइंग रूम में मछलियां आ गईं, जबकि हम शाकाहारी हैं। एक बंगले में पानी के साथ एक सांप आ गया।

पीठ ने कहा कि आईटीओ, चिड़ियाघर और हाईकोर्ट के पास सीवरेज लाइनें टूटी हुई हैं। जब नई दिल्ली इलाके में अधिकारियों की संवेदनहीनता है, कोई शहर के अन्य हिस्सों की स्थिति की कल्पना नहीं कर सकता। इसे एक चेतावनी के रूप में लें और अभी से काम करना शुरू कर दें। अप्रैल या मानसून का इंतजार न करें। स्थिति बहुत खराब है। एजेंसियों को कोई भी अपने इशारों पर नहीं चला सकता। नाराज पीठ ने कहा कि हर कोई अपने इलाके में बाघ है, कोई किसी की नहीं सुनता। पीठ ने कहा कि हर साल मानसून के दौरान, दिल्लीवासियों को सेंट्रल दिल्ली में पानी में डूबे मिंटो ब्रिज की ‘प्रसिद्ध’ तस्वीर देखने को मिलती है। जिसमें उसके नीचे एक बस फंसी हुई है। पीठ ने अधिकारियों से सवाल करते हुए कहा कि तुम सब क्या कर रहे हो? आपके सफाईकर्मी कूड़ा-कचरा नालियों में डाल देते हैं और फिर आप नालों की सफ़ाई के लिए एक ठेकेदार को नियुक्त करते हैं। उन्हें क्या करना है, इस पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं। हालात बहुत खराब हैं। मामले में अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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