वुशु का महाकुंभ: 350 खिलाड़ियों की टक्कर, दूसरे दिन DLWQ का जलवा

DLWQ ने 24 गोल्ड मेडल किए अपने नाम

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

राजधानी के रोहिणी स्थित एक सरकारी विद्यालय का मैदान इन दिनों खेल प्रतिभाओं का बड़ा मंच बना हुआ है। Delhi Amateur Wushu Association द्वारा आयोजित 23वीं दिल्ली राज्य वुशु चैम्पियनशिप का आगाज जहां भव्य अंदाज में हुआ, वहीं दूसरे दिन मुकाबलों ने रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। तीन दिन तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में दिल्ली भर से करीब 350 खिलाड़ी और 100 से अधिक कोच व अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

प्रतियोगिता का उद्घाटन दो बार एशियन गेम्स पदक विजेता नरेंद्र ग्रेवाल ने किया। उन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वुशु जैसे खेल अनुशासन, संतुलन और मानसिक मजबूती का बेहतरीन उदाहरण हैं। इस मौके पर स्कूल प्रबंधन और कई गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे, जिन्होंने खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यह चैम्पियनशिप दिल्ली की आधिकारिक वुशु प्रतियोगिता है, जिसका आयोजन दिल्ली हाईकोर्ट के 26 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में किया जा रहा है। इस आदेश के तहत DAWA को राजधानी में वुशु गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोजन का मकसद युवा खिलाड़ियों को एक मजबूत प्लेटफॉर्म देना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

दूसरे दिन दिखा खिलाड़ियों का दम

रविवार को प्रतियोगिता के दूसरे दिन सब-जूनियर और जूनियर वर्ग में सांडा (फाइटिंग) और ताओलु (फॉर्म) स्पर्धाओं के मुकाबले खेले गए। पूरे दिन चले मुकाबलों में खिलाड़ियों ने अपनी तकनीक, फुर्ती और संतुलन से दर्शकों को बांधे रखा। ताओलु स्पर्धाओं में DLWQ के खिलाड़ियों का दबदबा साफ नजर आया। उन्होंने कुल 24 स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। वहीं सांडा मुकाबलों में TMAAI, बुद्धा वुशु क्लब और अन्य इकाइयों के खिलाड़ियों ने भी जोरदार प्रदर्शन करते हुए अलग-अलग वर्गों में पदक अपने नाम किए। सब-जूनियर गर्ल्स वर्ग में 24 किग्रा में आराध्या, 28 किग्रा में राशिका और 32 किग्रा में आरुषि ने स्वर्ण जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं सब-जूनियर बॉयज वर्ग में अहिल खान, प्रिंस, शिवम और देव जैसे खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किए। जूनियर गर्ल्स वर्ग में नैंसी बंसल, ऋषिका, उर्वशी कुमारी और खुशी सहित कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों की तकनीकी दक्षता और आत्मविश्वास देखने लायक रहा।

खिलाड़ियों को मिला प्रोत्साहन

दूसरे दिन के मुख्य अतिथि सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट और पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राजवीर सिंह ने विजेताओं को पदक पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि निरंतर अभ्यास और अनुशासन ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकता है। आयोजन के दौरान खिलाड़ियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा गया। मेडिकल टीम लगातार मौजूद रही, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।

अंतिम दिन पर नजरें

अब सभी की निगाहें प्रतियोगिता के अंतिम दिन पर टिकी हैं, जहां सीनियर वर्ग के सांडा मुकाबले खेले जाएंगे। आयोजकों का मानना है कि यह चैम्पियनशिप न केवल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रही है, बल्कि उन्हें बड़े मंच के लिए तैयार भी कर रही है।

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