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एफडीआई: 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में भारत के लिए वीडीए ढांचा क्यों अहम

16 फरवरी 2026, नई दिल्ली :

भारत का 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह विकास की संरचना को बदलने की दिशा में उठाया गया कदम है। आर्थिक विस्तार का अगला चरण पारंपरिक क्षेत्रों में मामूली वृद्धि से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगा कि भारत तकनीक-आधारित वित्तीय ढांचे को अपने अधिकार क्षेत्र में कितना स्थापित कर पाता है।

इस बदलाव में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की भूमिका निर्णायक है। एफडीआई केवल पूंजी नहीं लाता, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञता, संस्थागत अनुशासन, वैश्विक नेटवर्क और दीर्घकालिक वित्तीय समर्थन भी साथ लाता है, जिससे उभरते क्षेत्रों को परिपक्व होने का अवसर मिलता है। यदि भारत तकनीक-प्रधान वित्त और डिजिटल प्रणालियों में प्रतिस्पर्धा करना चाहता है, तो उसे ऐसे हालात बनाने होंगे जिनमें वैश्विक कंपनियां यहां केवल प्रतिभा का उपयोग न करें, बल्कि ठोस परिचालन ढांचा स्थापित करें।

वर्तमान स्थिति में एक स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है। भारत में लगभग 9.3 करोड़ क्रिप्टो उपयोगकर्ता हैं और ब्लॉकचेन डेवलपर्स की मजबूत क्षमता मौजूद है। इसके बावजूद कई वैश्विक डिजिटल एसेट कंपनियां अपना पंजीकरण डेलावेयर, सिंगापुर या केमैन आइलैंड्स जैसे क्षेत्रों में कराती हैं। भले ही उनकी इंजीनियरिंग टीमें भारत में कार्यरत हों, लेकिन फंडिंग और स्वामित्व संरचना अक्सर विदेश में रहती है और भारतीय नियामकीय दायरे से बाहर होती है। इसका मुख्य कारण नियामकीय अस्पष्टता है। वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) को अब तक भारत की वित्तीय प्रणाली में स्पष्ट और व्यापक नियामकीय पहचान नहीं मिल सकी है।

इस अस्पष्टता के आर्थिक परिणाम भी सामने आते हैं। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत को 81.04 अरब डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जिसमें लगभग 16 प्रतिशत कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में आया। हालांकि इस श्रेणी में ब्लॉकचेन से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं, लेकिन यह संकेत नहीं देता कि भारत वैश्विक डिजिटल एसेट ढांचे के लिए पसंदीदा केंद्र बन रहा है। अधिकांश निवेश वेंचर कैपिटल के रूप में भारतीय स्टार्टअप्स में आता है, न कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा यहां लाइसेंस प्राप्त सहायक कंपनियां स्थापित करने के रूप में।

वैश्विक स्तर पर निवेश का रुख बदल चुका है। वर्ष 2024–25 में क्रिप्टो से जुड़ी पूंजी सट्टात्मक गतिविधियों से हटकर विनियमित अवसंरचना की ओर गई है। संस्थागत निवेशक अब कस्टडी सिस्टम, सेटलमेंट लेयर और अनुपालन-आधारित प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दे रहे हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां नीतिगत स्पष्टता मौजूद है। सिंगापुर इसका उदाहरण है। कुल फिनटेक फंडिंग में गिरावट के बावजूद 2024 की दूसरी छमाही में वहां क्रिप्टो और ब्लॉकचेन निवेश 22 प्रतिशत बढ़कर 267 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वहीं यूएई ने पिछले वर्ष 45.6 अरब डॉलर का एफडीआई आकर्षित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधा अधिक था। केवल दुबई में 1,369 ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की घोषणा हुई, जिनमें वेब3, एआई और फिनटेक अग्रणी रहे। ये आंकड़े स्पष्ट नीति-निर्माण का परिणाम माने जा रहे हैं।

अमेरिका ने अलग रास्ता अपनाया, लेकिन परिणाम समान रहा। 2024 की शुरुआत में स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ को मंजूरी मिलने के बाद संस्थागत भरोसा बढ़ा। हालांकि ईटीएफ में आने वाला निवेश एफडीआई की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन इससे प्रणालीगत जोखिम की धारणा कम हुई और कंपनियों के लिए अनुपालन-आधारित सेवाओं का विस्तार आसान हुआ। अमेरिका में अब लगभग 22 प्रतिशत आबादी के पास क्रिप्टो स्वामित्व है, जो नियामकीय मान्यता के साथ मुख्यधारा में प्रवेश का संकेत देता है।

भारत की स्थिति अलग है। यहां अपनाने की दर ऊंची है और तकनीकी क्षमता मजबूत है, लेकिन नियामकीय स्पष्टता सीमित है। लाइसेंसिंग, कस्टडी, बाजार निगरानी और टोकनाइज्ड एसेट तथा स्टेबलकॉइन के नियमन को लेकर स्पष्ट नियमों के अभाव में निवेशक भारत को डिजिटल एसेट परिचालन के स्थिर आधार के रूप में नहीं देख पा रहे हैं। केवल मांग का उच्च स्तर दीर्घकालिक पूंजी को आकर्षित नहीं कर सकता; नियामकीय स्थिरता अनिवार्य है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को एक संरचित और स्पष्ट वीडीए ढांचे की आवश्यकता है, जो लाइसेंसिंग के स्पष्ट मार्ग निर्धारित करे, वैश्विक मानकों के अनुरूप कस्टडी और अनुपालन मानदंड तय करे और यह स्पष्ट करे कि डिजिटल एसेट व्यापक वित्तीय प्रणाली में किस प्रकार समाहित होंगे। इससे भारत केवल प्रतिभा उपलब्ध कराने वाला देश न रहकर ऐसा क्षेत्र बन सकता है जहां कंपनियां पंजीकरण कर पूंजी जुटाएं और आधारभूत ढांचा विकसित करें।

यदि 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य वास्तविक अर्थ में हासिल करना है, तो भारत को उच्च अपनाने और निम्न निवेश-निश्चितता की वर्तमान स्थिति से आगे बढ़ना होगा। डिजिटल एसेट से जुड़ा एफडीआई अब विनियमित अवसंरचना की ओर बढ़ रहा है। संस्थागत पूंजी वहीं जाती है जहां स्पष्टता हो। ऐसे में एक सुसंगत वीडीए ढांचा केवल नवाचार का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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